वृषण/अंडकोष के दर्द, सूजन, कारण, लक्षण, घरेलू दवा एवं इलाज

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लिंग:- वृषण का प्रमुख्य कार्य शुक्राणु को पैदा करना तथा उसका संचयन करना है। वृषण (लिंग) अथवा अंडकोश नर प्रजनन तंत्र का प्रमुख अंग है। वृषण एक जोड़ी अंडाकार ढांचा है जो वृषणकोश यानि अंडकोष में उपस्थित रहता है साथ ही वृषण (Testosterone) नामक पुरुष सेक्स हार्मोन (Sex hormones) भी उत्पन्न करता है। शुक्राणु उत्पत्ति के बाद शुक्राणु वृषण से अधिवृषण में पहुंचता है उसके बाद शुक्रवाहिका से प्रवेश करते हुए लिंग तक पहुंचता है। टेस्टोस्टेरोन पुरुष जननांगों की बढ़ोत्तरी में मदद करता है। वृषण एक जोड़ी अंडाकार संरचना है जो वृषणकोश में मौजूद रहता है। इसके अलावा टेस्टोस्टेरोन एक पुरुष सेक्स हार्मोन है जो पुरुष यौन चरित्र के लिए उत्तरदायी है और ये हार्मोन शुक्राणु के उत्पत्ति के लिए भी महत्वपूर्ण है। अंडकोष नर में बस्ती प्रदेश के नीचे एक थैली नुमा होता है और इसे स्क्रोटम कहा जाता है। इस थैली की त्वचा ढीली होती है। जो गर्मियों में बढ़कर ढीली पड़ जाती है तथा सर्दियों में सिकुड़कर छोटी हो जाती है। इसके अंदर वृषण होते हैं जो प्रजनन तंत्र का प्रमुख अंग हैं. वृषण/लिंग अंडकोष के दर्द, सूजन, कारण, लक्षण, घरेलू दवा, इलाज एवं औषधीय उपचार विधि-

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इसके कुछ प्रमुख लक्षण हैं जैसे-

किसी एक अंडकोष में दर्दरहित गाँठ या सूजन का होना।
मूत्र में रक्त का आना।
किसी एक वृषण का छोटा-बड़ा होना।
अंडकोष में कठोरता का होना।
वीर्य के साथ रक्त का आना।
दूसरे वृषण के मुताबिक एक वृषण में बदलाव होना।
अंडकोष की थैली में भारीपन महसूस होना।
वृषण में मंद-मंद दर्द या पेशाब में जलन का होना।

नोट:- अंडकोष की समस्या बहोत बड़ी जटिल समस्या का संकेत देती है इस जटिल समस्या को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

वृषण के कुछ प्रमुख कारण हैं जैसे:-

अंडकोष में झटका या चोट का लगना।
वृषण में बढ़ी हुई नसों के कारण।
अंडकोष से नसों का उतरना।
वृषण में अधिक सूजन का होना।
अंडकोष की थैली की नसों में क्षति पहुंचना।
वृषण ग्रंथि में संक्रमण का होना।

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वृषण (लिंग की सूजन) में सौंठ के फायदे:-

अगर आप लिंग की सूजन से परेशान हैं तो सौंठ, कटेली की जड़, बला मूल, और गोखरू इन सबको 2-3 ग्राम की मात्रा तथा 10 ग्राम पुराना गुड़ को 250 ग्राम गाय के दूध में उबालकर सुबह-शाम नियमित पिलाने से लिंग की सूजन बिखर जाती है।

वृषण के दोष दूर करने में हरड़ के गुण:-

लिंग समस्या में त्रिफला के काढ़े को गोमूत्र यानी गाय के पेशाब में मिलाकर पिलाने से लिंग समस्या से निजात पा सकते हैं।

अरंडी से लिंग दोष का इलाज:-

लिंग दोष में अरंड के बीज और तिल का तेल दोनों को समभाग मिलाकर पकाकर नित्य लिंग पर मालिश करने से मूत्रेन्द्रिय की कमजोरी में लाभ होता है।

वृषण (लिंग) की सूजन में निर्गुन्डी के गुण:-

वृषण की सूजन से परेशान रोगी को निर्गुन्डी के पत्रों को हल्का गर्म करके लिंग के आसपास लेप करने या हल्का गर्म ही गर्म मालिश करने से लिंग की सूजन नष्ट हो जाती है।

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अंडकोष की सूजन में नौसादर बेहद फायदेमंद:-

वृषण की समस्या में 1 ग्राम नौसादर को 50 मिलीलीटर शराब के साथ पीसकर अण्डकोष पर लेप करने से अण्डकोष की सूजन कम हो जाती है। इसके अलावा 10 ग्राम नौसादर को कपड़ा में रखकर हल्का गर्म ही गर्म अण्डकोष का सेंक करने से सुजाक के कारण अण्डकोष की सूजन और दर्द ठीक हो जाते हैं।

पलाश से लिंग की सूजन का निदान:-

लिंग की सूजन में पलाश/ढाक के फूलों को उबालकर गरम-गरम पेडू पर सुबह-शाम बाँधने या लेप करने से लिंग की सूजन बिखर जाती है।

जीरा से वृषण का उपचार: –

लिंग दोष में 10-10 ग्राम जीरा और अजवायन पानी में पीसकर हल्का गर्म करके अण्डकोष पर लेप करने से लिंग दोष रुक जाता है।

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अंडकोष की सूजन में हल्दी से निजात:-

वृषण की सूजन में 2 से 6 ग्राम तक पिसी हुई हल्दी को अण्डों की जर्दी में मिलाकर थोड़ा गर्म करके अण्डकोष पर लेप करने या ऊपर से एरंड के पत्ते को बांधने से चोट की वजह से अण्डकोष की सूजन बिखर जाती है।

माजूफल से अंडकोष का इलाज:-

अंडकोष की समस्या में 12 ग्राम माजूफल और 6 ग्राम फिटकरी को पानी में पीसकर लिंग पर 15 दिन लगातार लेप करने से अण्डकोष में भरा हुआ पानी धीरे-धीरे कम हो जाता है।

लिंग दोष में छोटी हरड़ के गुण:-

अंडकोष की परेशानी से निजात पाने के लिए 10-10 ग्राम छोटी हरड़ और रसौत को पीसकर सरसों के तेल में मिलाकर मालिश करने से अण्डकोषों की खारिस और जख्म ठीक हो जाता है।

अंडकोष वृद्धि में अदरक के गुण:-

अंडकोष वृद्धि में 10 से 20 मिलीलीटर रस में दो चम्मच मधु मिलाकर पीने से वातज अण्डकोष वृद्धि समाप्त हो जाती है।

बकायन से लिंग सूजन का इलाज:-

लिंग की सूजन में 100 ग्राम बकायन के पत्ते को 500 मिलीलीटर पानी में उबालें हुए पानी को कपड़ा भिगोकर अण्डकोष धोने और गर्म पत्ते को बांधने से अण्डकोषों की सूजन बिखर जाता है।

फिटकरी से वृषण रोग का इलाज:-

वृषण रोग में 1 से 4 ग्राम की मात्रा में फिटकरी और माजूफल को लेकर पानी के साथ बारीक पीसकर लिंग पर लेप करने से अण्डकोष के रोग से छुटकारा मिलता है। इसके अलावा भुनी फिटकरी 1-1 ग्राम सुबह-शाम पानी के साथ प्रयोग करने से अण्डकोष की सूजन और बढे़ हिस्से ठीक हो जाते हैं।

अंडकोष की समस्या में दालचीनी से निदान:-

अंडकोष में पानी भर जाने पर आधा चम्मच दालचीनी पाउडर सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करने से अण्डकोष का पानी निकल जाता है।

कद्दू/घिया से अंडकोष का इलाज:-

कद्दू के बीजों का रस अंडकोष दोष लिए बहुत उपयोगी है। पौरुष ग्रंथि वृद्धि को रोकने के लिए 40 साल से ऊपर के लोगो को इसका प्रयोग प्रतिदिन खानें में शामिल करना चाहिए। इससे सभी प्रकार के लिंग दोष दूर हो जाते हैं।

मासिक धर्म की जानकारी के लिए यहां क्लिक करें-

मर्दानगी वृद्धि में मूली के फायदे:-

मर्दानगी बढ़ोत्तरी में मूली के 5 ग्राम बीज मक्खन के साथ सुबह के समय एक माह तक नियमित रूप से सेवन करने से पौरुष परिपुष्ट (मर्दानगी) में वृद्धि होती है।

वृषण/लिंग अंडकोष के दर्द, सूजन, कारण, लक्षण, घरेलू दवा, इलाज एवं औषधीय उपचार विधि- Vrishan/ling andkosh ke dard, sujan, karan, lakshan, gharelu dava, ilaj evam aushadhiy upchar vidhi in hindi.

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