वीर्य वृद्धि गाढ़ा और शुक्राणु कमी के कारण, लक्षण, घरेलू दवा एवं इलाज

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वीर्य वृद्धि: पौरुष में वृद्धि की चाह रखने वालों लोगों के लिए खुशखबरी है। सूत्रों के अनुसार माना गया है कि नियमित रूप से एक घंटे तक व्यायाम करने से वीर्य बढ़ोत्तरी में लाभदायक होता है। दुनिया भर के कई देशों में पुरुषों के शुक्राणुओं की संख्या में लगातार आ रही गिरावट चिंता का विषय बना हुआ है। शुक्राणुओं की संख्या में आ रही लगातार गिरावट का सीधा संबंध प्रजनन क्षमता से है। घटती शुक्राणु की संख्या पुरुष की एक जटिल समस्या है। जिसके चलते गर्भाधान में कठिनाई का समना करना पड़ता है। कम शुक्राणु की संख्या एक स्थिति है जिसे (Oligospermia) कहा जाता है। ये एक ऐसी स्थिति है जिसमें शुक्राणु की संख्या 15 Million शुक्राणु प्रति एम.एल से कम हो जाते हैं। अगर वीर्य के नमूने में कोई शुक्राणु नहीं हैं, तो इस स्थिति को (Azoospermia) कहा जाता है. वीर्य वृद्धि गाढ़ा और शुक्राणु के कारण, लक्षण, घरेलू दवा एवं इलाज उपचार विधि:-

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वीर्य के कमी के कारण:-

वीर्य की कमी के कई कारण होते हैं जैसे- हस्तमैथुन, खान-पान पे सही तरह से ध्यान न देना, अधिक सेक्स करना, स्वप्नदोष, कमजोरी, चिंता करना, मानसिक कमजोरी, अश्लील पुस्तकें पढ़ना, स्वप्न में लड़कियों की अश्लील तस्वीरें देखना आदि वीर्य की कमी के कारण हैं।

वीर्य की कमी के लक्षण:-

हमेशा चिंतित रहना, किसी भी काम में मन का न लगना, हमेशा सुस्ती, अपंगता, कमजोरी और मानसिक कमजोरी आदि वीर्य की कमी के लक्षण हैं।

वीर्य की कमी दूर करें इन परहेजों से-

गर्म मिर्च जैसे मसालेदार पदार्थ और मांस का सेवन न करें। हस्तमैथुन करना, अश्लील पुस्तकों और चलचित्रों को देखना, बीड़ी, सिंगरेट, अफीम, चरस, चाय, शराब आदि पदार्थों का सेवन बंद कर दें। ऐसा करने से आप के वीर्य में बढ़ोत्तरी होगी।

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वीर्य की कमी दूर करने में रीठा के गुण:-

वीर्य की वृद्धि चाहने वाले लोगों को रीठे की गिरी को पीसकर उसमें समभाग गुड़ मिलाकर एक चम्मच की मात्रा सुबह शाम एक कप गाय के दूध के साथ सेवन करने से वीर्य की पुष्टि होती है।

पुनर्नवा से वीर्य दोष का उपचार:-

वीर्य दोष में पुनर्नवा की जड़ों का काढ़ा बनाकर समभाग असगंध का चूर्ण मिलाकर मटर जैसी गोलिया बना लें, एक-एक गोली सुबह-शाम खाकर ऊपर से मिश्री मिलाकर दूध पाने से वीर्य के दोष दूर हो जाते हैं।

निर्गुन्डी से कामेन्द्रिय की शिथिलता का इलाज:-

कामेन्द्रिय की शिथिलता में निर्गुन्डी को घिसकर कामेन्द्रिय यानि लिंग पर लेप करने से, कामेन्द्रिय की शिथिलता दूर हो जाती है।

मूली से इन्द्रिय शैथिल्यता का उपचार:-

इन्द्रिय शैथिल्य में मूली के बीजों को तेल में औटाकर उस तेल की कामेन्द्रिय (लिंग) पर मालिश करने से कामेन्द्रिय की शिथिलता दूर होकर उसमें उत्तेजना पैदा होती है।

शुक्र-धातु में मौलसिरी के फायदे:-

शुक्र-धातु में मौलसिरी की छाल के चूर्ण को 2-4 ग्राम की मात्रा में 2 चम्मच मधु के साथ सुबह-शाम तथा दोपहर प्रयोग करने से धातु का गिरना बंद हो जाता है।

वीर्य पुष्टि में काली मिर्च के उपयोग:-

वीर्य पुष्टि करने के लिए एक गिलास दूध में 8-10 काली मिर्च को डालकर अच्छी तरह उबालकर, सुबह-शाम नियमित रूप से प्रयोग करने से वीर्य में पुष्टि होती है तथा गर्मी के मौसम में प्रयोग की मात्रा कम कर देना चहिए।

कसौंदी से वीर्य पुष्ट का इलाज:-

वीर्यविकार में कसौंदी की मूलत्वक के चूर्ण को महीन पीसकर 1-4 ग्राम की मात्रा में 5-10 ग्राम शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम एक गिलास दूध के साथ प्रयोग करने से वीर्य का पतलापन दूर होकर वीर्य पुष्ट होता है तथा धातु क्षय ठीक हो जाता है।

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कामोद्दीपन में कसौंदी के फायदे:-

कासमर्द का पेय (कामोद्दीपन) में कसौंदी के बीजो को धीमी आंच में हल्का घी डालकर भूनकर तथा चूर्ण करके पाल्सन काफी की तरह प्रयोग जठरग्निदीपन, कामोद्दीपन, तथा सौमनसीजनं योग के रूप में प्रयोग करने से कामोद्दीपन की क्षमता बढ़ जाता है।

वीर्यवर्धक में इमली के गुण:-

वीर्यवर्धक में इमली को पानी में कुछ दिन तक भिगोकर छिलका उतार दें, छिलके निकले सफेद बीजों को सूखाकर बारीक चूर्ण रख लें, एक चम्मच की मात्रा में दिन में दो तीन बार दूध के साथ सेवन करने वीर्य का पतलापन दूर होता है। इसके अलावा पेशाब की जलन तथा मूत्र-दाह दूर होता है।

बलसंवृद्धि में गुड़हल पुष्प का प्रयोग:-

बलसंवृद्धि में गुड़हल के सूखे फूलों का एक-एक चम्मच चूर्ण एक कप दूध के साथ सुबह-शाम नियमित रूप से सेवन करने से एक दो माह में रक्त की कमी दूर होकर शारीरिक स्फूर्ति व बलवृद्धि हो जाती है।

अरंडी से गुप्त रोग का इलाज:-

गुप्त रोग में एरंड की मींगी 1 नग, दूध 125 ग्राम, जल 250 ग्राम, औटावें दूध मात्र शेष रहने पर 10 ग्राम चीनी या मिश्री डालकर पीला दें, इस प्रकार 1 गिरी से शुरू करके, एक सप्ताह तक 1-1 गिरी बढ़ाकर घटाये। 1 गिरी पर लाने से रक्त के रोग नष्ट हो जाते हैं। यह प्रयोग गुप्त रोग के लिए अत्यंत लाभदायक है।

वीर्य की कमी दूर करने में गन्ना के फायदे:-

वीर्यवृद्धि में गन्ना रस को आंवले के 2-4 ग्रामं चूर्ण के साथ सेवन करने से वीर्यवृद्धि, तृप्ति, श्रमनाशक (थकान को दूर करने वाला), दाह, रक्त पित्त, शूल और पेशाब की जलन का नाश होता है।

वीर्य वर्धक में बला की दवा:-

वीर्य वर्धक में बला मूल 10 ग्राम, महुआ वृक्ष की छाल 5 ग्राम, दोनों को 250 ग्राम पानी में पीस छानकर उसमें 25 ग्राम मिश्री या खंड मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने प्रमेह दूर होकर वीर्य गाढ़ा हो जाता है।

वीर्य की कमी दूर करने में बरगद के गुण:-

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वीर्य वर्धक में बरगद के वृक्ष के फलों को हवादार स्थान में कपड़े पर सुखाकर लोहे का स्पर्श न हो महीन चूर्ण लेकर समभाग मिश्री चूर्ण मिला लें। 6 ग्राम की मात्रा में प्रातः सुखोष्ण दूध के साथ सेवन से वीर्य का पतलापन, शीघ्रपतन आदि दोष दूर होते है। इसके अलावा वीर्य सन्तानोपती में समर्थ हो जाता है। यदि स्त्री पुरुष दोनों सेवन करें तो रज वीर्य शुद्ध होकर सुंदर संतान पैदा होता है।

वीर्य बढ़ोत्तरी में आयापान के फायदे:-

वीर्य वर्धक में आयापान के पत्तों का स्वरस थोड़ी-थोड़ी मात्रा में सेवन करने से बल बढ़ता है।

वीर्य वृद्धि में अश्वगंधा के गुण:-

वीर्य वर्धक में अश्वगंधा को एक साल तक यथाविधि सेवन करने से शरीर रोग रहित हो जाता है। इसके अलावा केवल सर्दियों में ही इसके सेवन से दुर्बल व्यक्ति भी बलवान होता है। वृद्धा अवस्था दूर होकर नव यौनव प्राप्त होता है।

सेवन विधि: अश्वगंधा का चूर्ण, तिल व घी 10-10 ग्राम लेकर और तीन ग्राम शहद मिलाकर नियमित शरद ऋतू में प्रयोग करें।

वीर्य बढ़ोत्तरी में अलसी का उपयोग:-

वीर्य वर्धक में अलसी, काली मिर्च और शहद के साथ तीसी का सेवन करने से कामोद्दीपक तथा वीर्य को गाढ़ा करने में मददगार होता है।

वीर्य वर्धक में दूधी के गुण:-

पुरुषार्थ (वीर्य वर्धक) में दूधी को कूट छानकर इसके 2-5 ग्राम चूर्ण को 2 चम्मच शक्कर के साथ सेवन करने से कामशक्ति बढ़ती है। इसके अलावा छोटी दूधी प्रतिदिन उखाड़कर साफ़ करके 15 ग्राम की मात्रा में लेकर 6 बादाम गिरी के साथ मिलाकर दोपहर के समय सेवन करने से गर्मी और शुक्रप्रमेह आदि दूर होकर वीर्यकोष को शक्ति प्राप्त होती है।

मेंहदी से वीर्यस्राव का इलाज:-

वीर्यस्राव में मेंहदी के 8-10 ग्राम पत्र स्वरस में थोड़ा जल और मिश्री मिलाकर रात्रि के समय सोने से पहले सेवन करने से वीर्यस्राव रुक जाता है।

वीर्य स्तम्भन में लता करंज के फायदे: वीर्य स्तम्भन में लता करंज के पत्तों के रस को हथेली और तलुओं पर मलने से वीर्य स्तम्भन होता है। इसके अलावा लता करंज के एक बीज को सेक्स करते समय मुँह में चबाने से भी वीर्य स्तम्भन होता है।

वीर्य बढ़ोत्तरी में बबूल के गुण:-

वीर्य वर्धक में बबूल की फलियों को छाया में सुखाकर पीस ले और बराबर की मात्रा में मिश्री मिला लें, एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित रूप से जल के साथ सेवन करने से वीर्य गाढ़ा होगा और सभी प्रकार के दोष दूर हो जायेंगे। इसके अलावा बबूल के गोंद को घी में तलकर उसका पकवान बनाकर खाने से पुरुषों का वीर्य बढ़ता है और प्रसूति काल में स्त्रियों को खिलाने से उनकी शक्ति में भी वृद्धि होती है।

वीर्यस्राव में अखरोट की दवा:-

अखरोट के फलों के छिलके की भस्म बना लें, और इसमें बराबर की मात्रा में खंड मिलाकर 10 ग्राम तक की मात्रा में जल के साथ 10 दिन प्रातः सांय सेवन करने से धातुस्राव या वीर्यस्राव बंद होता है।

बलवर्धन में अमर बेल का प्रयोग:-

बलवर्धन (शरीर की कमजोरी) में 10.15 ग्राम ताजा अमर बेल को कुचलकर स्वच्छ महीन कपड़े में बांधकर, 1/2 किलोग्राम गाय के दूध में डालकर या लटकाकर माध्यम आंच पर पकाये। जब एक चौथाई दूध शेष रह जाये तो ठंडा कर मिश्री मिलाकर सेवन करने से दुर्बलता दूर होती है तथा शरीर में एक अलग सा निखार देखने को मिलता है।

कनेर फूल से गुप्त रोग का उपचार:-

कामेन्द्रिय (गुप्त रोग) में सफेद कनेर की 10 ग्राम जड़ पीसकर 20 ग्राम वनस्पति घी में पकायें, फिर ठंडा करके जमने पर कामेन्द्रिय (लिंग) पर मालिश करने से लाभ होता है।

वीर्य बढ़ोत्तरी में अनार के गुण:-

अनार वीर्य वृद्धि का रामबाण औषधि है इसके इस्तेमाल से भी आप अपने वीर्य गणना को बहुत ज्यादा कर सकते हैं और एक अच्छा सम्भोग सुख प्राप्त सकते हैं। अनार में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स आपके सीमन (सीमेन) के क्वालिटी की बढ़ोत्तरी में मदद करता है। ये आपके वीर्य को सुरक्षित रखता है और आपके वीर्य में वृद्धि लाता है।

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वीर्य वृद्धि में अश्वगंधा के फायदे:-

अश्वगंधा का प्रयोग कई तरह की सहवास समस्याओं के लिए किया जाता है जो वीर्य बढ़ोत्तरी को भी बढ़ाने में कारगर साबित हुई है। इसके अलावा अश्वगंध में कई ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो आपके वीर्य आकलन को आसानी से बढ़ा देते हैं और आपके वीर्य क्वालिटी को बरक़रार रखते हैं यानि कि वीर्य को गाढा करने में मदद करते हैं।

वीर्य वृद्धि में केला के गुण:-

वीर्य की बढ़ोत्तरी में केला का इस्तेमाल आपके लिंग के लिए एक बेहतर फल साबित हुआ है। केले में मौजूद विटामिन b 1, बिटामिन c, और मैग्नीशियम आपके वीर्य को बड़े ही आसान तरीके से बढ़ा सकता है।

पालक से वीर्य की कमी का इलाज:-

अक्सर आपने देखा होगा की डॉक्टर आपको हरी सब्जिया खाने की सलाह देते हैं। क्योंकि हरी सब्जियों में मौजूद कई तरह के तत्व आपको बहोत सारी परेशानियों से छुटकारा दिलाते हैं। दोस्तों हम आपको बता दें कि पालक में मौजूद फोलिक एसिड आपके स्पर्म काउंट को बढाने में मददगार साबित हुई है पालक की मदद से आप अपने वीर्य को गाढा भी कर सकते हैं तथा इसके जूस का प्रयोग सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है।

वीर्य वृद्धि में अंडा के फायदे:-

वीर्य की बढ़ोत्तरी में अंडा का सेवन भी आपके के लिए एक अच्छा आहार है, जिसकी मदद से आप अपने वीर्य को भी गाढा कर सकते हैं। ये प्रयोग वीर्य सेल्स को नष्ट होने से बचाता है और आपके वीर्य में बढ़ोत्तरी लाता है।

वीर्य बढ़ोत्तरी में लहसुन बेहद फायदेमंद:-

लहसुन में मौजूद विटामिन बी 6 और फोलिक एसिड आपके वीर्य को बढाने में मदद करता है। वीर्य वृद्धि के लिए आप लहसुन को दूध में उबाल कर सुबह-शाम सेवन करें। ऐसा करने से न केवल आपके वीर्य में वृद्धि होती है बल्कि आपका वीर्य भी गाढा होता है और साथ में आपके शरीर को पुष्टि मिलती है।

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