तुलसी के फायदे, औषधीय गुण, आयुर्वेदिक उपचार एवं नुकसान

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तुलसी की घरेलू दवाएं, उपचार: तुलसी कुष्ठ रोग, शारीरिक दुर्बलता की वृद्धि, सिरदर्द, मस्तिष्क वृद्धि, मस्तक पीड़ा, सिर की जुएं, त्वचा की सुंदरता, दन्त की पीड़ा, कंठ रोग, मुख की दुर्गंध, स्तम्भन, रतौंधी रोग, जुकाम, वमन, न्यूमोनिया रोग, प्रसव की पीड़ा, सर्दी-जुकाम, खांसी, श्वांस रोग, काली खांसी, कुक्कुर खांसी, गले की खराश, सूखी खांसी, दमा रोग, छोटे बच्चों का सर्दी-जुकाम, दस्त, खूनी दस्त, पाचन शक्ति, यकृत प्लीहा, बस्ती की सूजन, मूत्रदाह, पूय रोग, नामर्दी रोग, स्वरभंग, गंठिया रोग, साटिका रोग, कब्जियत, कान की पीड़ा, कान की सूजन, बुखार, मलेरिया बुखार, विषमज्वर, कफज्वर, आंत्रज्वर, सधारणजवर, सफ़ेद दाग झाई, चेहरे के दाग, घाव, सर्पविष, बिच्छू विष, ततैया विष आदि बीमारियों के इलाज में तुलसी के फायदे, होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक उपचार, औषधीय चिकित्सा प्रयोग निम्नलिखित प्रकार से किये जाते है: तुलसी के फायदे, लाभ, घरेलू दवाएं, उपचार, सेवन विधि एवं नुकसान:-

Table of Contents

तुलसी के विभिन्न भाषाओँ में नाम

हिंदी                   –      तुलसी
अंग्रेजी               –       हौली बेसिल
संस्कृत              –       वृंदा, सुगंधा, अमृता, पत्र पुष्पा
गजराती            –       तुलस
मराठी               –        तुलसा, काली तुलसी
बंगाली              –        तुलसी, कुरल
तैलगू                –        वृंदा, गगेरा, कृष्णा तुलसी
कुलनाम            –        लमीएसए
वैज्ञानिक नाम   –         ओसीमम सैंक्टम

तुलसी में पाये जाने वाले पोषक तत्व

तुलसी की पत्तियों में पीताभृत वर्ण का तेल पाया जाता है, जो शुष्क होने पर क्रिस्टलीय हो जाता है। इसे तुलसी कपूर कहते हैं। इसके अतरिक्त कुछ पोषक तत्व है:-

आयरन                 –            1.3 मिलीग्राम
पानी                     –            8.7 ग्राम
विटामिन A           –            2237 मिलीग्राम
पोटैशियम             –            125 मिलीग्राम
फास्फोरस             –            24मिलीग्राम
कैल्शियम             –            75 मिलीग्राम
टोटल फैट             –            271 ग्राम
कुल कैलोरी           –            9.8 मिलीग्राम
कार्बोहाइड्रेड          –             1.1
ऐस                       –             0.6 ग्राम
सोडियम               –             1.7 मिलीग्राम
प्रोटीन                   –             1.3 ग्राम
विटामिन B           –             7.6 mcg
विटामिन C           –             339 mcg
विटामिन E           –             176 mcg
विटामिन K           –             66 mcg
तुसली में आदि पोषक तत्व पाये जाते है।

तुलसी के घरेलू दवाओं में उपयोग किये जाने वाले भाग

तुलसी के औषधीय प्रयोग किये जाने वाले भाग-तुलसी की जड़, तुलसी की पत्ती, तुलसी का तना, तुलसी का फूल, तुलसी के फल, तुलसी का तेल आदि घरेलू दवाओं में प्रयोग किये जाने वाले तुलसी के भाग है।

कुष्ठ रोग में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

कोष्ठ रोग में तुलसी पत्रों का 10-20 ग्राम स्वरस प्रतिदिन प्रातः काल पीने से लाभ होता है। तुलसी के पत्रों को नींबू के सरस् में पीसकर दाद, वातरक्त, कुष्ठ आदि के ऊपर लेप करने से लाभ होता हैं। तुलसी पत्र स्वरस, पत्थर चुना, गाय का घी इन सभी को एक साथ घोंटकर सेवन करने से कोष्ठ ठीक होता है।

शारीरिक दुर्बलता में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

शारीरिक दुर्बलता में 20 ग्राम तुलसी बीजचूर्ण में 40 ग्राम मिश्री मिलाकर महीन-महीन पीसकर 1 ग्राम की मात्रा में शीत ऋतु में कुछ दिन प्रयोग करने से वात कफ रोगों से बचाव होता हैं। तथा दुर्बलता दूर होती है। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती हैं। स्नायु मंडल सशक्त होता हैं।

मस्तिष्क शक्ति वृद्धि में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

मस्तिष्क शक्ति वृद्धि में तुलसी को छाया में सूखाकर मंजरी के चूर्ण को 1-2 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ चाटने से लाभ होता है। तुलसी के 5 पत्र प्रतिदिन पानी के साथ पीने से बुद्धि मेधा तथा मस्तिष्क की शक्ति बढ़ती हैं।

सिरदर्द में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

सिरदर्द से ग्रसित मरीज को तुलसी का तेल नाक में टपकाने से पुराना सिर दर्द तथा अन्य सिर के रोग नष्ट होते है।

सिर की जुएं नाशक में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

सिर की जुएं को नाशक करने में तुलसी के तेल को सिर में लगाने से जुंएं एवं लीखें मर जाती है।

त्वचा की सुंदरता में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

त्वचा की सुंदरता पाने के लिए और चेहरा निखारने के लिए तुलसी के तेल को मुंह पर लगाने से चेहरा का रंग साफ़ हो जाता है।

दंतपीड़ा में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

दंतशूल की पीड़ा से परेशान मरीज को काली मिर्च और तुलसी के पत्तों की गोली बनाकर दांत के नीचे दिन में दो तीन बार रखने से दंतशूल दूर होता है।

कंठ रोग में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

कंठ रोग में तुलसी के रस को हल्के गर्म गुनगुने पानी में मिलाकर कुल्ला करने से, कंठ के रोगों में बहुत लाभ होता है।

मुख की दुर्गंध में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

मुख की दुर्गंध को नाश करती है तुलसी -तुलसी रस युक्त जल में हल्दी और सैंधा नमक मिलाकर कुल्ले करने से मुख की दुर्गंध नष्ट होती है। और दन्त तथा गले के सभी प्रकार के विकार दूर होते है।

स्तम्भन शक्ति वृद्धि में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

स्तम्भन शक्ति वृद्धि में तुलसी की जड़ का चूर्ण 2-4 ग्राम और जमीकंद का चूर्ण मिलाकर 125-250 मिलीग्राम तक पान में रखकर खाने से स्तम्भन व सेक्स क्षमता की वृद्धि होती हैं। तथा नपुंसकता दूर होकर पुरुष बलवान होता है।

रतौंधी रोग में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

रतौंधी से ग्रसित मरीज को समस्या से छुटकारा पाने के लिए तुलसी के पत्तों का स्वरस 5-10 मिलीग्राम दिन में दो तीन बार आँखों में डालने से रतौंधी नष्ट होती है।

जुकाम में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

पीनसरोग (जुकाम) से छुटकारा पाने के लिए मरीज को तुलसी के पत्ते या मंजरी को सूंघने से मस्तक के कृमिनष्ट होकर नाक से बदबू बंद हो जाता है।

वमन (उल्टी) में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

वमन से शीघ्र आराम पाने के लिए तुलसी के पत्तों का रस छोटी इलायची तथा अदरक का रस सेवन करने से वमन तथा जी मिचलाना बंद होता है।

न्यूमोनिया रोग में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

न्यूमोनिया में काली तुलसी के पत्रों के 5-10 ग्राम रस में गाय का घी गुनगुना कर दुगनी मात्रा में मिलाकर चटाने से 2-3 दिन में न्यूमोनिया रोग में आराम होता है।

प्रसव की पीड़ा में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

प्रसव की पीड़ा में तुलसी के पत्रस्वरस में पुराना गुड़ तथा खंड मिलाकर प्रसव होने के बाद तुरंत पिलाने से प्रसव के बाद का दर्द नष्ट होता है।

सर्दी-जुकाम में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

सर्दी-जुकाम से ग्रसित मरीज को तुलसी पत्र मंजरी सहित 50 ग्राम, अदरक 25 ग्राम, काली मिर्च 15 ग्राम, जल 500 ग्राम काढ़ा बनाकर चौथाई शेष रहने पर छानकर 10 ग्राम छोटी इलायची बीजों का महीन चूर्ण मिलाकर 200 ग्राम चीनी डालकर पकायें, एक तार की चाशनी हो जाने पर छानकर रख लें। इस शर्बत का आधी से डेढ़ चम्मच की मात्रा में बच्चों को तथा 2 से चार चम्मच तक बड़ों को सेवन कराने से सर्दी-जुकाम शीघ्र ही नष्ट हो जाता है।

खांसी में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

खांसी से शीघ्र छुटकारा पाने के लिए तुलसी पत्र और मंजरी 50 ग्राम, अदरक 25 ग्राम, काली मिर्च 15 ग्राम, जल 500 ग्राम की मात्रा में काढ़ा बनाकर एक चौथाई भाग शेष रहने पर छानकर रख लें, इस काढ़े का सुबह-शाम नियमित सेवन करने से खांसी में लाभ होता है।

श्वाँस रोग में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

श्वांस रोग में तुलसी पत्र मंजरी सहित 50 ग्राम, अदरक 25 ग्राम, काली मिर्च 15 ग्राम, जल 500 ग्राम काढ़ा बनाकर चौथाई शेष रहने पर छानकर 10 ग्राम छोटी इलायची बीजों का महीन चूर्ण मिलाकर 200 ग्राम चीनी डालकर पकायें, एक तार की चाशनी हो जाने पर छानकर रख लें। इस शर्बत का आधी से डेढ़ चम्मच की मात्रा में बच्चों को तथा 2 से चार चम्मच तक बड़ों को सेवन कराने से श्वांस रोग में आराम मिलता है।

काली खांसी में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

काली खांसी से ग्रसित मरीज को लसी पत्र और मंजरी 50 ग्राम, अदरक 25 ग्राम, काली मिर्च 15 ग्राम, जल 500 ग्राम की मात्रा में काढ़ा बनाकर एक चौथाई भाग शेष रहने पर छानकर रख लें, इस काढ़े का सुबह-शाम नियमित सेवन करने से काली खांसी में लाभ होता है।

कुक्कुर खांसी में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

कुक्कुर खांसी से छुटकारा पाने के लिए मरीज को तुलसी पत्र मंजरी सहित 50 ग्राम, अदरक 25 ग्राम, काली मिर्च 15 ग्राम, जल 500 ग्राम काढ़ा बनाकर चौथाई शेष रहने पर छानकर 10 ग्राम छोटी इलायची बीजों का महीन चूर्ण मिलाकर 200 ग्राम चीनी डालकर पकायें, एक तार की चाशनी हो जाने पर छानकर रख लें। 2 से चार चम्मच तक सेवन करने से कुक्कुर खांसी में आराम मिलता है।

गले की खराश में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

गले की खराश में तुलसी के शर्बत को जुकाम तथा गले की खराश में गर्म पानी के साथ पिलाने से गले की खराश ठीक हो जाती है।

पुरानी खांसी में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

पुरानी खांसी तथा दमे में तुलसी दल 10 तथा वासा के पीले रंग के तीन पत्र काली मिर्च 1 तथा अदरक मटर के 4-6 दोनों के बराबर गिलोयकांड का 6 इंच लम्बा टुकड़ा सभी को कूटकर 1 गिलास जल में पकायें, आधा शेष रहने पर 10-15 ग्राम गुड़ मिलाकर 3 खुराक बना लें, चार-चार घंटे के अंतर में सेवन से पुरानी से पुरानी खांसी ठीक हो जाती है। खांसी में तुलसी पत्र स्वरस 5-10 मिलीग्राम में काली मिर्च का चूर डालकर पीने से खांसी का वेग कम हो जाता हैं।

दमा रोग में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

दमा रोग में 7 पत्ते तुलसी के, 5 लौंग लेकर एक गिलास पानी में पकायें। तुलसी पत्र व् लौंग को पानी में डालने से पहले टुकड़े कर लें। पानी पकाकर जब आधा शेष रह जाये, तब थोड़ा सा सैंधा नमक डालकर गर्म-गर्म पी जायें। यह काढ़ा पीसकर कुछ समय के लिए वस्त्र ओढ़कर पसीना लें। इससे ज्वर तुरंत उतर जाता हैं। तथा सर्दी, जुकाम व दमा रोग भी ठीक हो जाती हैं। इस काढ़े को तीन में दो बार दो तीन दिन तक ले सकते हैं।

छोटे बच्चों का सर्दी-जुकाम में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

छोटे बच्चों के सर्दी-जुकाम में तुलसी व अदरक का रस 5-7 बून्द मधु मिलाकर चटाने से बच्चों का कफ, सर्दी, जुकाम, ठीक हो जाता हैं। नवजात शिशु को यह अल्प मात्रा में प्रयोग कराये।

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दस्त में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

अतिसार (दस्त) में तुलसी दल दस जीरा 1ग्राम दोनों को पीसकर मधु मिलाकर चटाने से दिन में 3-4 बार में दस्तों की मरोड़ तथा पेचिश में लाभ होता हैं:दस्त में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:CLICK HERE

खूनी दस्त में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

खूनी दस्त से ग्रसित मरीज को तुलसी की फाँट 5-60 मिलीग्राम जायफल का चूर्ण मिलाकर 3-4 बार पीने से खूनी दस्त में आराम मिलता है।

पाचन शक्ति में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

पाचन शक्ति अजीर्ण अग्निमाद्य, बालकों की यकृत प्लीहा की कविकृतियों में तुलसीदल के स्वरस का फाँट दिन में तीन बार भोजन से पहले पिलाने से लाभ होता हैं।

यकृत प्लीहा रोग में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

यकृत प्लीहा रोग में तुलसीदल के स्वरस का काढ़ा बनाकर दिन में दो तीन बार भोजन से पूर्व पिलाने से यकृत प्लीहा रोग में शीघ्र लाभ होता है।

बस्तिशोथ में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

बस्तिशोथ (नाभि के निचले हिस्से की सूजन)में तुलसी के बीज और जीरे का चूर्ण 1 ग्राम लेकर उसमें 3 ग्राम मिश्री मिलाकर सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से मूत्रदाह, पूय तथा बस्ती शोथ बस्ती की सूजन बिखर जाती हैं।

पेशाब की जलन में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

पेशाब की जलन में तुलसी के बीज और जीरे का चूर्ण 1 ग्राम लेकर उसमें 3 ग्राम मिश्री मिलाकर सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से मूत्रदाह पेशाब की जलन में शीघ्र आराम मिलता है।

पूय्मेह रोग में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

पूय्मेह रोग में तुलसी के बीज और जीरे का चूर्ण 2 ग्राम लेकर उसमें 3 ग्राम मिश्री मिलाकर सुबह-शाम तथा दोपहर दूध के साथ प्रयोग करने से पूय्मेह रोग में लाभ होता है।

पथरी में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

पथरी की पीड़ा से ग्रसित मरीज को पथरी से छुटकारा पाने के लिए तुलसी के बीज को कूटकर चूर्ण बनाकर सुबह-शाम नियमित सेवन करने से पथरी गल कर निकल जाती है।

नामर्दी (नपुंसकता) में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

नामर्दी के रोग से छुटकारा पाने के लिए तुलसी के बीज का चूर्ण अथवा मूल चूर्ण में बराबर की मात्रा में गाय का देशी घी मिलाकर 1-3 ग्राम की मात्रा में, गाय के दूध के साथ लगातार सेवन करने से एक माह या छः सप्ताह तक नपुंसकता में लाभ होता हैं।

धातु दुर्बलता में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

धातु दुर्बलता से शीघ्र छुटकारा पाने के लिए मरीज को तुलसी के बीज 1 ग्राम या गाय दूध के साथ सुबह-शाम नियमित सेवन करने से धातु की दुर्बलता दूर हो जाती है।

स्वरभंग में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

स्वरभंग हो जाने पर तुलसी की जड़ को मुलेठी की तरह चूसते रहने से स्वरभंग दूर हो जाता हैं। तथा आवाज मधुर हो जाती है।

गंठिया रोग में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

गंठिया रोग में संधिशोथ एवं गठिया के दर्द में तुलसी पंचाग का चूर्ण 2-4 ग्राम सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करने से गंठिया रोग में आराम मिलता है।

साटिका रोग में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

साटिका रोगी को तुलसी काढ़ा का पीड़ा ग्रस्त वात नाड़ी पर बफारा देने से या काली तुलसी शोथ तथा वेदना युक्त विकारों में लेप करने से रोग ठीक हो जाता है। ऊर्ध्वगत वात, अस्थिगतवात, सन्धिवात तथा पारद दोषजनित विकारों में इसका पंचाग का बफारा देने से लाभ होता हैं।

अपच (कब्जियत) में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

कब्जियत रोग से परेशान मरीज को तुलसी की 2 ग्राम मंजरी को पीसकर 100 मिलीग्राम काले नमक के साथ दिन में 3 से 4 बार प्रयोग करने से कब्जियत में शीघ्र लाभ होता हैं।

कान के दर्द में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

कर्णशूल में तुलसी के पत्तों का ताजा रस गर्म करके 2-4 बून्द कान में टपकाने से कान की पीड़ा फौरन बंद हो जाता हैं।

कान के पीछे की सूजन में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

कान के पीछे की सूजन में तुलसी के पत्ते एरंड की कोपले और थोड़े नमक को पीसकर उसका गुनगुना लेप करने से कान के पीछे की सूजन नष्ट होती हैं।

बुखार में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

सभी प्रकार के बुखार में तुलसी दल 20, मिर्च 10 नग दोनों का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम तथा दोपहर सेवन करने से सभी प्रकार के बुखार में लाभ होता हैं।

मलेरिया बुखार में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

मलेरिया ज्वर में तुलसी का पौधा मलेरिया प्रतिरोधी है। तुलसी के पौधे को छूकर वायु में कुछ ऐसा प्रभाव उत्पन हो जाता है कि मलेरिया के मछर वहां से भाग जाते है, इसके पास नहीं बैठते। मलेरिया बुखार में तुलसी पत्रों का काढ़ा तीन-तीन घंटे के अंतर से सेवन करने से मलेरिया बुखार उतर जाता है।

बिषमज्वर में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

विषमज्वर में तुलसी पत्र स्वरस 5-10 मिलीग्राम में मिर्च चूर्ण मिला दिन में तीन बार प्रयोग करें। तुलसी मूल का काढ़ा आधा औंस की मात्रा में दिन में दो बार सेवन करने से ज्वर तथा विषम ज्वर उतर जाता हैं।

कफप्रधान बुखार में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

कफ प्रधान ज्वर में तुलसी दल 21 नग, लवंग 5 नग अदरक रस आधा ग्राम को पीसछानकर गर्म करें इसमें 10 ग्राम शहद मिलाकर सेवन करें। तुलसी पत्तों को पानी में पकाकर जब आधा जल शेष रह जाये छानकर, चुटकी भर सैंधा नमक मिलाकर गुनगुना पीने से कफप्रधान बुखार में लाभ होता है।

आंत्रज्वर में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

आंत्र ज्वर में तुलसी पत्र 10 ग्राम तथा जावित्री 1/2 से 1 ग्राम तक, पीसकर मधु के साथ चटाने से आंत्रज्वर में लाभ होता हैं। काली तुलसी, वन तुलसी तथा पोदीना, बराबर स्वरस लेकर 3-7 दिन तक सुबह-दोपहर-शाम प्रयोग करने से आंत्रज्वर ठीक हो जाता हैं।

सर्दी से होने वाला बुखार में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

सर्दी से होने वाले बुखार में तुलसी पत्र, श्वेत जीरा, छोटी पीपल तथा खंड, चारों को कूटकर सुबह-शाम नियमित सेवन करने से सर्दी के कारण होने वाला बुखार शीघ्र ठीक हो जाता हैं। तुलसी पत्र चूर्ण 1 भाग, शुंठी चूर्ण 1 भाग तथा पिसी अजवायन मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से ज्वर का वेग कम होता हैं।

सफेद दाग की झांई में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

सफेद दाग की झांई में तुसली पत्र स्वरस 1 भाग, नींबू का रस 1 भाग, कसौंदी पत्र स्वरस -1 भाग, तीनों को बराबर-बराबर लेकर एक तांबे के बर्तन में डालकर चौबीस घंटे के लिये धूप में रख दें। गाढ़ा हो जाने पर इसके लगातार लेप करने से सफेद दाग की झांई में लाभ होता हैं।

चेहरे के दाग में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

चेहरे के दाग में तुलसी की जड़ को पीसकर प्रातःकॉल सौंठ मिलाकर जल के साथ प्रयोग करने से चेहरे के दाग ठीक हो जाते हैं। तुलसी की जड़ को पीसकर मधु के साथ दिन में 3-4 बार चेहरे पर लेप करने से चेहरे की सुंदरता निखरती है।

घाव में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

घावों को शीघ्र भरने के लिये तुलसी के 10-20 ग्राम पत्तों को उबाउलकर ठंडा करके लेप करने से घाव शीघ्र भर जाते है। तुलसी के पत्तों का रस भी घाव को भरने में बहुत उपयोगी हैं।

सर्पविष में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

सर्प विष में तुलसी के पत्तों का स्वरस 5-10 मिलीग्राम पिलाने से और इसकी मंजरी और जड़ों का लेप बार-बार दंशित स्थान पर करने से सर्प दंश की पीड़ा और विष में लाभ होता हैं। अगर रोगी बेहोश हो गया हो तो तुलसी के रस को नाक में टपकाने से विष उतर जाता है।

बिच्छू के विष में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

बिच्छू का विष उतरने के लिए तुलसी के पत्तों का स्वरस 5-10 मिलीग्राम पिलाने से और इसकी मंजरी और जड़ों का लेप बार-बार दंशित स्थान पर करने से दंश की पीड़ा शांत हो जाती है।

ततैया विष में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:

ततैया विष में तुलसी के पत्तों का स्वरस 5-10 मिलीग्राम पिलाने से और तुलसी की मंजरी और जड़ों का लेप बार-बार दंशित स्थान पर करने से दंश की वेदना शांत होती है।

तुलसी का परिचय

विष्णु बल्ल्भा, सुखवल्लरी, श्री कृष्ण बल्ल्भा, वृंदा, वैष्णवी आदि पवित्र नामों से विभूषित तुलसी के माहात्म्य वर्णन करना ऐसा है, जैसे सूरज को को दीपक दिखाना, या समुद्र किनारे बैठकर लहरों का गिनना। सर्वरोग निवारक जीवनीय शक्ति वर्धक, तुलसी औषधि को प्रत्यक्ष देवी कहा गया हैं। क्योंकि सर्वत्र सुलभ, सुगंधित, सुंदर तथा इससे सस्ती औषधि मनुष्य जाति के लिये अन्य कोई और नहीं हैं। तुलसी के धार्मिक महत्व के कारण हर-घर आंगन में तुलसी के पौधे लगाये जाते हैं। तुलसी की कई जातियां मिलती हैं। जिनमें श्वेत व कृष्ण प्रमुख हैं। कृष्ण आभा लिये होते हैं। इसके अतिरिक्त आदि जातियां भी काफी महत्व की हैं।

तुलसी के बाह्य-स्वरूप

तुलसी क्षुप 2-4 फीट ऊंचा, रोमेथ तथा सुगंधित होता हैं। पत्र आयताकार तथा लट्वाकार होता हैं। 6-8 इंच लम्बी मंजरी कतिपय बैगनी रंग की होती हैं। बीज गोलाकार, चिकना तथा भूरे रंग के होते हैं। शीत ऋतु में पुष्प तथा फल आते हैं।

तुलसी के औषधीय गुण-धर्म

कफवात शामक, जनतधन, दुर्गंध नाशक, दीपन, पाचन, अनुलोमन, कृमिघ्न, कफध्न, हृदयोत्तेजक, स्वेदजनन, ज्वरध्न व शोथहर है।
बीज :- मूत्रल एवं बल्य है।
पत्र :- प्रतिश्याय, वातश्लैष्मिक ज्वर एवं विषम ज्वर में तुलसी स्वरस अथवा क्वाथ एक उत्तम औषधि है।

तुलसी खाने के नुकसान

तुलसी के बीजों स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत लाभदायक हैं लेकिन तुलसी का अधिक सेवन आपको के लिए कुछ नुकसान भी पहुंचा सकते हैं जैसे कि घुटन या हार्मोन के उतार चढ़ाव को बल दे सकते है।

मासिक धर्म में तुलसी के अधिक प्रयोग करने से मासिक धर्म को और उत्‍तेजित कर सकता है तथा इसके परिणामस्‍वरूप बच्‍चे को खतरा हो सकता है।

तुलसी के अधिक सेवन करने से आप के खून को पतला करने की क्षमता तुलसी में मौजूद होती है, इसलिए यदि आप खून पतला एंटी -क्लॉटिंग करने वाली दवाओं का सेवन कर रहे हैं तो इसके साथ तुलसी के पत्‍तों का प्रयोग नहीं करना चहिए। इसका प्रयोग आपके रक्त को अत्‍यधिक पतला करने का कारण बन सकता है।

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