शिशु, बाल रोग के घरेलू दवाएं/औषधीय एवं उपचार विधि

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शिशु/बाल रोग: शिशुओं के सुन्दर एवं स्वस्थ की कामना सभी माता-पिता को होती है। परन्तु ऐसा हो नहीं पाता क्योंकि शिशु वयस्कों की तुलना में ज्यादा बीमार होते हैं। शिशुओं की समुचित देखभाल जन्म होते ही शुरू हो जाती है। क्योंकि इसका कारण शिशुओं की स्नायुओं की स्नायु शक्ति सुनियंत्रित और सुगठित नहीं होती है इसलिए शिशुओं की चिकित्सा वयस्कों की चिकित्सा से अलग और कठिन होती है। इन्हीं कारणों से शिशु और बालकों की होमियोपैथिक चिकित्सा का अपना अलग स्थान और महत्त्व है। साथ में उनके वातावरण पर भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि अच्छे वातावरण और अच्छे माहौल में रखने की जरूत होती है। क्योंकि शिशु बहुत ही नाजुक होते हैं। भौतिक जीवनशैली के अलावा शिशु को पल-पल आपके प्‍यार व दुलार की जरूरत होती है। वर्तमान में शिशु की देखभाल कुछ बुनियादी बातों पर निर्भर करती हैं जैसे: समय पर टीकाकारण, समय-समय पर देखभाल रखना आपका दायित्व बनता है। शिशु को किसी भी प्रकार की समस्या हो तो इसका परामर्श किसी विशेषज्ञ से लेना चाहिए।

आयुर्वेदिक औषधिजड़ी-बूटी इलाज

बाल रोग के कुछ सरल घरेलू उपचार

बाल रोग में पिप्पली के प्रयोग: बाल रोग में बच्चों के जब दांत निकलते हो, उस समय 1 ग्राम पिप्पली चूर्ण को 5 ग्राम शहद में मिलाकर मसूढ़ों पर घिसने से, दांत बिना कष्ट दिए निकल जाते हैं।

बच्चों की खांसी में पिप्पली के उपचार: बच्चों की खांसी में बड़ी पिप्पली को घिसकर लगभग 125 मिलीग्राम की मात्रा में शहद के साथ चटाने से बच्चों की खांसी दूर हो जाती है।

बच्चों की प्लीहा वृद्धि में पिप्पली के उपाय: बच्चों की प्लीहा वृद्धि में बड़ी पिप्पली को घिसकर लगभग 125 मिलीग्राम की मात्रा में शहद के साथ दिन में दो तीन बार चटाने से बच्चों की प्लीहा वृद्धि में लाभ होता है।

बच्चों के अधिक रोने पर पिप्पली से इलाज: यदि बच्चा अधिक रोता है तो उसे पिप्पली और त्रिफला के समभाग चूर्ण को, 200 मिलीग्राम से एक ग्राम तक की मात्रा में गाय के घी और शहद में मिलाकर सुबह शाम चटाने से बच्चे का अधिक रोना बंद हो जाता है।

बच्चों के कफ में पिया बासा के प्रयोग: बच्चों को कफ आता हो तो पिया बासा 5-10 ग्राम पत्र स्वरस में थोड़ा शहद में मिलाकर दिन में दो तीन बार चटाने से बच्चों के कफ पिघल कर बिना कष्ट दिए निकल जाते हैं।

बच्चों के बुखार में पिया बासा के उपचार: बच्चों के बुखार में पिया बासा 5-10 ग्राम पत्र स्वरस में थोड़ा शहद में मिलाकर दिन में दो तीन बार चटाने से बच्चों का बुखार शीघ्र उतर जाता है।

बच्चों की खांसी में पुनर्नवा के उपाय: बच्चों की खांसी में पुनर्नवा पत्र स्वरस 110 ग्राम, मिश्री चूर्ण 150 ग्राम तथा पिप्पली चूर्ण 12 ग्राम इन तीनों को एक साथ मिलाकर पकायें, जब चाशनी गाढ़ी हो जाये तो उतारकर बंद बोतल में भर लें, इस शर्बत की 8-10 बून्द तक बच्चों को दिन में दो तीन बार चटाने से बच्चों की खांसी ठीक हो जाती है।

बच्चों के श्वांस रोग में पुनर्नवा से इलाज: बच्चों के श्वांस रोग में पुनर्नवा पत्र का रस 95 ग्राम, मिश्री चूर्ण 180 ग्राम तथा पिप्पली चूर्ण 12 ग्राम इन सब को एक साथ मिलाकर पकायें, जब चाशनी गाढ़ी हो जाये तो उतारकर बंद बोतल में भर लें, इस शर्बत की 4-10 बून्द तक बच्चों को दिन में दो तीन बार चटाने से बच्चों का श्वांस रोग ठीक हो जाता है।

बच्चो के लार में पुनर्नवा के प्रयोग: बच्चों के अधिक लार बहने पर पुनर्नवा पत्र का रस 120 ग्राम, मिश्री चूर्ण 215 ग्राम तथा पिप्पली चूर्ण 12 ग्राम इन सबको एक साथ मिलाकर पकायें, जब चाशनी गाढ़ी हो जाये तो उतारकर बंद बोतल में भर लें, इस शर्बत की 4-10 बून्द तक बच्चों को दिन में दो बार चटाने से लार का बहना बंद हो जाता है।

बच्चों की जिगर वृद्धि में पुनर्नवा के उपचार: बच्चों के जिगर बढ़ने पर पुनर्नवा पत्र स्वरस 110 ग्राम, मिश्री चूर्ण 220 ग्राम तथा पिप्पली चूर्ण 12 ग्राम इन तीनों को एक साथ मिलाकर पकायें, जब चाशनी गाढ़ी हो जाये तो उतारकर रख लें, इस शर्बत की 8-10 बून्द बच्चे को सुबह-शमी तथा दोपहर पिलाने से बच्चे का जिगर समान हो जाता है।

बच्चों के जुकाम में पुनर्नवा के उपाय: जुकाम से ग्रसित बच्चे को पुनर्नवा पत्र का रस 95 ग्राम, मिश्री चूर्ण 180 ग्राम तथा पिप्पली चूर्ण 12 ग्राम इन सबको एक साथ मिलाकर पकायें, जब चाशनी गाढ़ी हो जाये तो उतारकर रख लें, इस शर्बत की 4-10 बून्द तक बच्चों को दिन में दो तीन बार बच्चे को चटाने से जुकाम में लाभ होता है।

बच्चों की खांसी में काली राई से इलाज: बच्चों की खांसी में काली राई के तेल की मालिश बच्चे की छाती पर करने से खांसी ठीक हो जाती है।

बच्चों के अफरा में वचा के प्रयोग: बच्चों के अफारा से छुटकारा पाने के लिए वच को जल में घिसकर पेट पर लेप करने से बच्चों का अफारा मिटता है। इसके अलावा वच के कोयले को एरंडी के तेल या नारियल के तेल के साथ पीसकर बच्चे के पेट पर लेप करने से अफारा मिटता है।

बच्चों के दस्त में वचा के उपचार: बच्चों के दस्त में वचा के कोयलों की 125 मिलीग्राम राख पानी में घोलकर पिलाने से बच्चों का दस्त खत्म हो जाता है।

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छोटे बच्चों के सर्दी-जुकाम में तुलसी के उपाय: छोटे बच्चों के सर्दी-जुकाम में तुलसी व अदरक का रस 5-7 बून्द में शहद मिलाकर चटाने से बच्चों का कफ, सर्दी, जुकाम, ठीक हो जाता हैं। नवजात शिशु को यह अल्प मात्रा में प्रयोग कराये।

बाल रोग में पवांड़ से इलाज: बाल रोग में पवाँड के बीज, हालों, राई, सरसों, मालकांगनी, तिल और नारियल की गिरी बराबर-बराबर मात्रा लें, नारियल की गिरी को छोड़कर सबका महीन चूर्ण कर लें, अब नारियल की गिरी को कतरकर चूर्ण में मिलाकर मशीन से तेल निकलवा लें। इस तेल को गरम करके मालिश करने से बाल रोग से जकड़े कमर जाँघ पिंडली आदि अंग ठीक हो जाते है।

बच्चों की सर्दी में पान के प्रयोग: बच्चों की सर्दी में गर्म पान को थोड़े से एरंड के तेल में चुपड़कर छाती पर बांधने या पीसकर हल्का गर्म करके लेप करने से बच्चे की सर्दी में आराम मिलता है।

बच्चों की घबराहट में पान के उपचार: बच्चों की घबराहट कम करने के लिए पान को गरम करके, थोड़ा सा एरंड का तेल चुपड़कर छाती पर बांधने या पीसकर हल्का गर्म कर लें, अब इसका लेप करने से बच्चों की घबराहट दूर होती है।

बच्चों के कब्ज में पान के उपाय: बच्चों के कब्ज में पान के डंठल को सरसों के तेल में चुपड़कर बच्चों के गुर्दे पर रखने से बच्चों की कब्ज और वादी रोग नष्ट हो जाते हैं।

बच्चों के सूखा रोग में प्याज से इलाज: बच्चों के सूखा रोग में प्याज रस, शहद, व ब्रांडी 15-20 ग्राम नियमित प्रतिदिन सुबह-शाम खिलाने से बच्चों के सूखा रोग में शीघ्र लाभ होता है।

बच्चों के चिड़चिड़ापन में प्याज के प्रयोग: बच्चों के चिड़चिड़ेपन में प्याज के बीजों की चाय बनाकर सेवन कराने से बच्चे का चिड़चडेपन में लाभ होता है।

बच्चों के रोग में करेला पत्ते के उपाय: नवजात शिशु के मुख में करेला के पत्ते का टुकड़ा रखने से उसकी छाती और अंतड़ियों का सब मल और आम निकल जाता है और नवजात शिशु को आराम मिलता है।

बच्चों के डिब्बा रोग में इन्द्रायण से इलाज: बच्चों के डिब्बा रोग में इन्द्रायण की जड़ के एक ग्राम चूर्ण में 275 मिलीग्राम सैंधा नमक मिलाकर गर्म जल के साथ दिन में दो तीन बार सेवन कराने से बच्चों का डिब्बा रोग ठीक हो जाता है।

बच्चों के भस्मक रोग में गूलर छाल के प्रयोग: भस्मक रोग (बच्चों को अधिक भूख लगना) गूलर की अंतर छाल को स्त्री के दूध के साथ पीसकर पिलाने से छोटे बच्चों के भस्म रोग ठीक हो जाते है।

बच्चों के रोग में दूब घास के उपचार: बच्चों के रोग में बड़ी-बड़ी शाखों वाली दूब जो अक्सर कुओं पर होती है उसे पीस छानकर उसमें 2-3 ग्राम बारीक पिसे हुए नागदेसर और छोटी इलायची के दाने मिलाकर, सूर्योदय से पहले उस बच्चे जिसका तालू बैठ गया हो नाक में डालकर सुंघाने से तालू ऊपर को चढ़ जाता है। इसके अलावा बच्चे दूध निकालना बंद कर देते हैं।

बाला रोग में धतूरा के उपाय: नारू (बाला रोग) में धतूरे के पत्तों की पुल्टिस बांधने से बच्चों के बाला रोग में लाभदायक होता है।

बाल रोग में बला से इलाज: बाल रोग में बला के पंचांग का चूर्ण 3 ग्राम का काढ़ा पिलायें तथा 50 ग्राम पंचांग को 3-4 किलो पानी में पकाकर स्नान करायें। ऐसा 5 बार करने से सूखा रोग में निश्चय ही पूर्ण लाभ होता है।

बालरोग में अतीस के प्रयोग: बालरोग में अतीस के कंद को पीसकर चूर्ण को शीशी में भरकर रख लें बालकों के रोगों में लाभकारी है। बालक की उम्र के अनुसार 250 से 500 मिलीग्राम तक शहद के साथ दिन में दो तीन बार चटाने से बालकों के रोगों में लाभ होता है।

डिब्बारोग में आक के उपचार: बच्चों के डिब्बारोग में अर्क पत्र का रस 10 बूँद तथा 30 मिलीग्राम सैंधा नमक मिलाकर पीला देने से उल्टी-दस्त होकर बच्चों का दिब्बा रोग शीघ्र शांत हो जाता है। इसके अलावा पेट में अफारा हो तो गर्म तेल लगाकर आक पत्र से सेंक करने से अफरा में लाभ होता है।

डिब्बारोग में अपराजिता के उपाय: डिब्बारोग में अपराजिता के भुने हुये बीज 1/2 ग्राम की मात्रा में महीन चूर्ण बनाकर उष्णोदक के साथ दिन में दो बार सेवन कराने से डिब्बा रोग नष्ट हो जाता है।

बच्चो के सूखा रोग में अनार से इलाज: बच्चों के सूखा रोग में अनार की कली 20-25 ग्राम, आटे में बंद कर रस निकाल लें। इस रस को थोड़े दूध के साथ नियमित पिलाने से बच्चों के सूखा रोग में गुणकारी होता है।

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