प्याज के फायदे, नुकसान एवं औषधीय गुण

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प्याज के फायदे, नुकसान एवं औषधीय गुण, प्याज की दवा:-मासिक धर्म, यौन शक्ति, पुरुषों की यौनशक्ति, स्त्रियों की योनि शक्ति, सफ़ेद दाग, शारीरिक शक्ति, सुजाक, नपुंसकता, प्रमेह रोग, बवासीर, खुनी बवासीर, अनिद्रा, बच्चों का चिड़चिड़ापन, नजला, रतौंधी, नेत्र ज्योति, दंतपीड़ा, मसूड़ों की सूजन, मोतियाबिंद, गले का रोग, मूर्च्छा, पागलपन, कान का दर्द, कान की सूजन, स्वरभंग, कफ रोग, दमा रोग, पाचन शक्ति, आँतों की शक्ति, दस्त, रक्तस्त्राव, अफरा, वादी का दर्द, पेट का दर्द, कोष्ठ बल्य, पथरी, मूत्ररोग, पेशाब की जलन, विरेचन, हैजा रोग, शरीर की ऐंठन, वमन, असाध्य रोग, खुनी दस्त, बच्चों का सूखा रोग, जलोदर, जुकाम, खांसी, गंठिया रोग, बंद गाँठ, दाद, दाद के दाग, रक्त विकार, एक्जिमा, फोड़ा-फुंसी, यौवन पीड़ा, नारू रोग, कंठमाला, घाव की सूजन, स्नायुशूल, बुखार, पेट की वायु, दाह, लू लगना, भूत बाधा, सर्पविष, बिच्छू विष, ततैया विष, खनखजूरा विष, मकड़ी विष, भंवरा विष आदि बीमरियों के इलाज में प्याज की घरेलु दवाएं एवं औषधीय चिकित्सा प्रयोग निम्नलिखित प्रकार से किये जाते है:प्याज के फायदे, नुकसान एवं सेवन विधि:Pyaaj Benefits And Side Effects In Hindi.

आयुर्वेदिक औषधिजड़ी-बूटी इलाज

Table of Contents

प्याज का विभिन्न भाषाओँ नाम

हिंदी              –       प्याज, कांदा, लाल प्याज
अंग्रेजी           –       ओनियन
संस्कृत          –       प्लान्डू, यवनेष्ट, मुखदुषक
गुजराती        –        कांदो, डुंगली, डूंगरी
मराठी           –        कोंदा
बंगाली          –         पेंचाज
पंजाबी          –         प्याज, गंडा
तैलगू            –         निरुली
अरबी            –         वस्ल
तमिल          –          वनजयम
उर्दू                –         प्याज
फ़ारसी          –         पियाज

प्याज का औषधीय प्रयोग किये जाने वाले भाग

प्याज का घरेलू दवाओं में उपयोग किये जाने वाला भाग-प्याज की पत्ती का शाग बनाकर खाया जाता है। तथा प्याज की तरकारी बनाकर खाया जाता है।

प्याज में पाये जाने वाले पोषक तत्व

प्याज के कंद में प्रोटीन, कार्वोहाइड्रट, कैल्शियम, लौह, विटामिन A, विटामिन B तथा विटामिन C होते हैं। कंद और प्याज की ताज़ी पत्तियों में कुछ अप्रिय गंधवाला उड़नशील तेल होता है। इसमें एक स्थिर तेल भी होता है, जिसमें एलाइड, प्रोपाइल, डाइसल्फाइड नामक पदार्थ होता है।

मासिक धर्म में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

मासिक धर्म में प्याज को कच्ची अवस्था में नियमितरूप से प्रयोग करने से मासिक धर्म नियमित रूप से होने लगती है।

यौन शक्ति में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

काम शक्ति को बढ़ाने के लिए प्याज को किसी बर्तन में भरकर, बर्तन का मुख को बंद कर देना चाहिये क्योंकि उसमें हवा न जाने पाये, उसके बाद इस बर्तन को जहां गाय बाँधी जाती हो उस स्थान पर गाड़ देना चाहिए। चार माह के बाद निकालकर एक प्याज को नियमित प्रयोग करने से कामशक्ति/यौन शक्ति बढ़ती है। प्याज का रस व शहद आधा एवं 2 किलोग्राम खडं 250 ग्राम, मिलाकर शर्बत बनाकर 25 ग्राम प्रतिदिन सेवन करने से स्त्रियों और पुरुषों को यौन शक्ति की प्राप्ति होती है।

बच्चों का सूखा रोग में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

बच्चों के सूखा रोग में प्याज रस, शहद, व ब्रांडी 15-20 ग्राम नियमित प्रतिदिन सुबह-शाम खिलाने से बच्चों के सूखा रोग में शीघ्र लाभ होता है।

पुरुषों की यौन शक्ति में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

पुरुषों की यौन शक्ति को बढ़ाने के लिए प्याज की तीस गांठों को लेकर बर्तन में रखकर उस पर ताजा गाय का दूध इतना डाले कि दूध 8 अंगुल ऊपर आ जाए उसके बाद उसे धीमी आंच पर इतना पकायें की प्याज गल जायें। पकने के बाद आग से नीच उतार लें, उसके बाद प्याज के बराबर गाय का घी और समभाग मात्रा में शहद मिलाकर फिर से थोड़ी देर पकाये अंत में कुलंजन 60-60 ग्राम मिला दे, अब इसका प्रयोग 3-4 चम्मच की मात्रा से सुबह-शाम करने से पुरुषों की काम शक्ति बढ़ती है।

स्त्रियों की योनि शक्ति में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

स्त्रियों की योनि शक्ति बढ़ाने के लिए प्याज का रस व शहद आधा एवं 2 किलोग्राम खडं 250 ग्राम, मिलाकर शर्बत बनाकर 25 ग्राम प्रतिदिन सेवन करने से स्त्रियों की योनि शक्ति बढ़ती है। प्याज की तीस गांठों को लेकर बर्तन में रखकर उस पर ताजा गाय का दूध इतना डाले कि दूध 8 ऊँगली के ऊपर आ जाए उसके बाद उसे मध्यम आंच पर इतना पकायें की प्याज गल जायें। पकने के बाद आग से नीच उतार लें, उसके बाद प्याज के बराबर मात्रा में गाय का घी और समभाग मात्रा में शहद मिलाकर फिर से थोड़ी देर पकाये अंत में कुलंजन 60-60 ग्राम मिला दे, अब इसका प्रयोग 3-4 चम्मच की मात्रा से सुबह-शाम करने से स्त्रियों की योनि शक्ति बढ़ती है।

सफ़ेद दाग (कोढ़) में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

श्वेत कुष्ठ से परेशान मरीज को प्याज के बीजो का नियमित रूप से सुबह-शाम तथा दोपहर लेप करने से सफ़ेद दाग में लाभदायक होता है।

शारीरिक शक्ति बढ़ाने में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

शारीरिक शक्ति को बढ़ाने के लिए प्याज के रस में बराबरा मात्रा में गाय का घी मिलाकर नियमित प्रयोग करने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है।

सुजाक में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

सूजाक में प्याज का रस 6 ग्राम, गाय का घी 4 ग्राम और शहद 3 ग्राम सुबह-शाम सेवन करने से तथा रात्रि को दूध के साथ पीने से सुजाक में लाभ होता है।

नपुंसकता में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

नपुंसकता होने पर पुरुष को बहुत सारी परेशानियों का समाना करना पड़ता है, नपुंसकता के रोगी को प्याज का स्वरस 6 ग्राम में गाय का घी 4 ग्राम और शहद 3 ग्राम सुबह-शाम सेवन करने से तथा रात्रि को सोने से पूर्व दूध के साथ प्रयोग करने से नपुंसकता दूर होती है।

प्रमेह रोग में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

प्रमेह रोग में प्याज का रस 6 ग्राम, गाय का घी 4 ग्राम और शहद 3 ग्राम सुबह-शाम नियमित सेवन करने से तथा रात्रि में सोने से पहले दूध के साथ पीने से प्रमेह रोग में आराम मिलता है।

बवासीर में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

अर्श बवासीर में 2 नग प्याज को पीसकर मस्सों पर लेप करने से या पुल्टिस बांधने से अर्श और गुदा भ्रंश में लाभ होता है। अर्श के मस्सों के लिए दो प्याज भूमल में सेककर छिलका उतारकर लुगदी बनाकर मस्सों पर बांधने से तत्काल बवासीर समाप्त हो जाती है।

खुनी बवासीर में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

रक्तार्श (खुनी बवासीर) में प्याज के 125 ग्राम रस में 20 ग्राम मिश्री मिलाकर सुबह-सुबह पिलाने से खूनी बवासीर में आराम मिलता है।

अनिद्रा में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

अनिद्रा में प्याज के बीजों की चाय बनाकर प्रयोग करने से अनिद्रा रोग को दूर करती हैं।

बच्चों के चिड़चिड़ापन में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

बच्चों के चिड़चिड़ेपन में जब अफीम वगैरह से कुछ फायदा नहीं होता, तब हमे प्याज के बीजों की चाय बनाकर सेवन करने से बच्चों के चिड़चडेपन में लाभ होता है।

नजला रोग में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

नजला रोग से ग्रसित मरीज को प्याज के 10-20 मिलीलीटर रस में 1 चम्मच मधु मिलाकर दिन में दो-तीन बार चाटने से नजला रोग में अत्यंत लाभ होता है।

रतौंधी के रोग में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

रतौंधी के रोग में प्याज के कंद को पीसकर प्याज का रस निकालकर रस में थोड़ा सा लवण मिलाकर आँख में 2-3 बून्द डालने से रतौंधी रोग में लाभ होता हैं।

नेत्रज्योति में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

नेत्रज्योति में प्याज के स्वरस को शहद में मिलाकर नेत्रों में अंजन करने से नेत्र के ज्योति में वृद्धि होती है।

दंतपीड़ा में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

दंतशूल में प्याज और कलोंजी को बराबर मात्रा में मिलाकर चिलम में रखकर उसका धुंआ पीने से दंत की पीड़ा शांत होती है।

मसूड़ों की सूजन में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

मसूड़ों की सूजन में प्याज और कलोंजी को बराबर मात्रा में मिश्रित करके चिलम में रखकर उसका धुंआ को पीने से मसूड़ों की सूजन बिखर जाती है।

मोतियाबिंद रोग में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

मोतियाबिंद रोग में सफेद प्याज का रस 10 मिलीलीटर अदरक का रस 10 मिलीलीटर, नींबू का रस 10 मिलीलीटर, शहद 50 मिलीलीटर, इन सभी को मिलाकर नियमित रूप से 2-4 बून्द आँखों में डालने से मोतियाबिंद रोग नष्ट हो जाता है।

गले के रोग में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

गले के रोग में प्याज को सिरके में मिलाकर पीस छानकर नियमितरूप से सेवन करने से गले के रोग शीघ्र ही नष्ट हो जाते है।

मूर्च्छा में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

मूर्च्छा में प्याज के कंदों को कुचलकर सुंघाने से मूर्च्छा में आराम मिलता है। तथा मनुष्य को शक्ति प्रदान होती है।

पागलपन के रोग में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

पागलपन के रोग में रोगी को प्याज के कंदों को कुचलकर सुंघाने से पागलपन के रोगी को शीघ्र आराम मिलता है।

कान के दर्द में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

कर्णशूल (कान) के दर्द में प्याज के स्वरस को हल्का गर्म करके 2-4 बून्द कान में डालने से कान हो रहा दर्द शीघ्र शांत हो जाता है।

कान की सूजन में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

कान की सूजन में अलसी को प्याज के रस में मिलाकर पकाकर छान लें, इस रस की 8-10 बून्द की मात्रा को कान में डालने से कान के अंदर की सूजन फौरन मिट जाती है।

स्वरभंग होने पर प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

स्वरभंग होने पर प्याज को आग में भूनकर भर्ता बना लें, 250 मिलीग्राम भुना सुहागा मिलाकर खिला दे, उसके बाद भर्ता खिलाने से, आवाज खुल जायेगी।

कफ रोग में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

कफ रोग में छोटे बच्चों के कफ रोगों में प्याज के 5-10 मिलीलीटर रस में 10 ग्राम खंड मिलाकर पिलाने से बच्चों का कफ रोग में लाभ होता है। छोटे शिशुओं की माताओं को 1-2 नग प्याज पानी में उबालकर प्रयोग करने से कफ रोगों में लाभ होता है। इससे वात की कमी होती है, कफ पतला होकर बाहर निकल जाता है।

दमा रोग में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

दमा रोग में प्याज के काढ़े को 40-60 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम नियमित पिलाने से दमा रोग में लाभ होता है।

पाचन शक्ति में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

पाचन शक्ति में प्याज के रस के सेवन से या कच्चा प्याज खाने से आँतों की क्रिया शक्ति व पचान शक्ति बढ़ती है। दस्त साफ़ होता हैं।

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दस्त में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

दस्त से ग्रसित रोगी को प्याज के स्वरस का सेवन या कच्ची प्याज का सेवन करने से दस्त में लाभ होता है।

रक्तस्राव में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

रक्तस्त्राव में सफेद प्याज के 20-30 मिली रस का सेवन दिन में दो-तीन बार करने से रक्तस्राव बंद हो जाता है। सफेद प्याज को छाछ के साथ प्रयोग और भी लाभकारी है।

अफारा में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

अफारा रोगी को प्याज के 20 मिलीलीटर रस में 125 मिलीग्राम हींग और 1 ग्राम काला नमक मिलाकर दिन में दो तीन बार पिलाने से बादी का दर्द और पेट फूलना बंद हो जाता हैं।

पेट दर्द में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

उदरशूल में नींबू का रस तथा नमक थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मिलाकर प्याज 1-2 चम्मच रस निकालकर सुबह-शाम आवश्यकतानुसार पिलाने से पेट दर्द में लाभदायक होता है।

कोष्ठ बल्य में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

कोष्ठ बल्य में 1-2 नग प्याज को 50 ग्राम सिरके के साथ मिलाकर प्रयोग करने से आमाशय को ताकत मिलती है।

पथरी में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

पथरी के रोगी को प्याज का 10-20 मिलीलीटर ताजा रस दिन में दो तीन बार तक तीन महीनें तक पिलाने से गुर्दे और मसाने की पथरी गलकर निकल जाती है और पेशाब साफ़ होता हैं।

मूत्ररोग में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

मूत्ररोग में रोगी को प्याज का 10-20 मिलीलीटर ताजा रस दिन में दो तीन बार तक तीन महीनें तक पिलाने से मूत्र रोग में लाभ होता है।

पेशाब की जलन में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

मूत्रदाह पेशाब की जलन में प्याज का काढ़ा बनाकर पिलाने से पेशाब की जलन मिटती है।

विरेचन में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

विरेचन में मध्यम आकार के तीन प्याज और 10-15 ग्राम इमली के पत्तों की गोलियां बनाकर खिलाने से विरेचन रोग शीघ्र लाभ होता है।

हैजा रोग में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

विसूचिका में प्याज का रस 6 ग्राम, काली मिर्च का महीन चूर्ण 125 मिलीग्राम कपूर 250 मिलीग्राम तथा चूने या केले का पानी 25 ग्राम एकत्र मिलाकर 15-15 मिनट बाद या आधा घंटे के अंतर से खिलाने से वमन तथा दस्त बंद हो जाते है तथा शरीर की ऐंठन भी दूर हो जाती है।

वमन में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

वमन के मरीज को प्याज के रस में चुने का पानी समभाग मात्रा में मिलाकर पिलाने से वमन में लाभ होता है।

शरीर की ऐंठन में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

शरीर की ऐंठन में प्याज 25 ग्राम व काली मिर्च छह नग बिल्कुल महीन खरल करें जो पानी में एक दम मिल जाये फिर रोगी को जितना पी सके, उतना पीला पिलाने से शरीर की ऐंठन में शीघ्र लाभ होता है।

असाध्य रोग में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

असाध्य रोगी के मुख में 250 मिलीग्राम कपूर डालकर ऊपर से 10 ग्राम प्याज का रस प्रयोग करने से असाध्य रोग दूर होता है। प्याज का रस 15-15 मिनट सेवन करने से असाध्य रोगी को लाभ होता है।

खुनी दस्त में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

आमातिसार में एक प्याज के अंदर 60 मिलीग्राम अफीम रखकर उसको आग पर रखकर सेंककर खिलाने से खुनी दस्त मिटता है।

जलोदर (पेट में अधिक पानी भरना) प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

जलोदर, जुकाम, पुरानी खांसी में प्याज का नित्य प्रयोग करने से जलोदर में लाभदायक है।

जुकाम में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

जुकाम से ग्रसित रोगी को प्याज का नित्य प्रयोग करने से जुकाम में बहुत लाभदायक होता है।

पुरानी खांसी में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

पुरानी खांसी में प्याज का रोगी को नियमितरूप से सेवन करने से पुरानी से पुरानी खांसी में आराम मिलता है।

गंठिया रोग में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

गठिया रोगी को प्याज का रस और काली सरसों का तेल बराबर मात्रा में मिलाकर नित्य मालिश करने से गठिया की पीड़ा शांत होती है।

बंद गांठ में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

बंद गांठ में 1-2 नग प्याज में प्याज को बच्चे के पेशाब में पीसकर गर्म करके बंद गांठ पर लेप करने से बंदगांठ शीघ्र बिखर जाती हैं।

दाद में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

दाद के रोगी को प्याज को सिरके में पीसकर दाद या ऐसी सूजन पर जो काले दाग वाली हो लेप करने से दाद में बहुत लाभ होता है।

दाद के काले दाग में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

दाद के काले दाग में प्याज को सिरके में मिलाकर दाद के काले दाग पर लेप करने से दाद के काले धब्बे मिट जाते है।

रक्तविकार में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

रक्त विकार में प्याज का रस 50 ग्राम, मिश्री 10 ग्राम तथा सफ़ेद जीरा भुना हुआ एक ग्राम नित्य रूप से सेवन करने से छाजन, पामा आदि रक्त विकार दूर होते हैं।

एग्जीमा रोग में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

एग्जीमा रोग में प्याज का स्वरस 45 ग्राम में मिश्री को 10 ग्राम तथा सफ़ेद जीरा भुना हुआ एक ग्राम नियमित सुबह-शाम प्रयोग करने से एग्जीमा रोगी को खिलाने से एग्जीमा रोगी को लाभ होता है।

फोड़ा-फुंसी में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

फोड़ा-फुंसी, यौवन पिण्डिका, नारू, कंठमाला इत्यादि रोगो पर प्याज को गाय के घी में तलकर बांधने से अथवा प्याज के स्वरस का लेप करने से फोड़ा-फुंसी में लाभ होता है।

यौवन पीड़ा में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

यौवन पीड़ा में प्याज को गाय के घी में तलकर बांधने से अथवा प्याज के स्वरस का लेप करने से यौवन पीड़ा शांत होती है।

नारू रोग में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

नारू रोग में प्याज को गाय के घी में तलकर बांधने से या प्याज के स्वरस का लगाने से नारू रोग में लाभ होता है।

कंठमाला में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

कंठमाला के रोगी को प्याज को गाय के घी में तलकर बांधने से अथवा प्याज के स्वरस का लेप करने से कंठमाला के रोग में लाभदायक होता है।

घावों की सूजन में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

व्रणशोथ में नाड़ी शूल या घावों की सूजन में प्याज के कल्क को गर्म करके बांधने से घावों की सूजन में लाभ होता है।

बुखार में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

ज्वर (बुखार) में मध्यम मोटाई की एक प्याज के ऊपर काली मिर्च बुरक कर दो तीन बार काने से दुष्ट वायु आदि से पैदा हुआ ज्वर नष्ट हो जाता है।

लू लगने पर प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

लू लग जाने पर प्याज का ताजा रस शरीर पर मालिश करने से लू का प्रकोप तुरंत समाप्त हो जाता है।

भूत प्रेत के बाधा में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

भूत प्रेत की बाधा में शीघ्र फैलने वाले रोगों के उपद्रवों से बचने के लिए प्याज काट कर पास में रखना चाहिए या दरवाजे पर बाँध देने से भूत प्रेत की बाधा से बचने का आसान तरीका है।

सर्पविष में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

सर्प के काटने पर प्याज का रस निकाल कर दंशजनित स्थान पर लेप या मालिश करने से सर्पविष उतर जाता है।

बिच्छू के विष में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

बिच्छू के दंश में प्याज को काटकर उस पर बुझा हुआ चूना मिलाकर बिच्छू के डंक जनित स्थान पर लेप करने से बिच्छू का जहर फौरन उतर जाता है।

ततैया के विष में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

ततैया के काटने पर पीड़ित व्यक्ति को प्याज पर बुझा हुआ चूना मिलाकर ततैया के काटे हुए स्थान पर लेप करने से ततैया का विष शीघ्र उतर जाता है।

मकड़ी के विष में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

मकड़ी के विष में प्याज को काटकर उस पर बुझा हुआ चूना मिलाकर प्रयोग करने से मकड़ी का विष फौरन ठीक हो जाता है।

कनखजूरा के विष में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

कनखजूरा के विष में प्याज और बराबरा मात्रा लहसुन को पीसकर लेप करने से कनखजूरे का जहर उतर जाता है।

भंवरा का विष में प्याज के फायदे एवं सेवन विधि:

भंवरा के विष को उतरने के लिए प्याज और बराबरा मात्रा लहसुन को पीसकर लेप करने से भंवरा का विष उतर जाता है।

प्याज का परिचय

प्याज की रंग भेद से रक्त और श्वेत दो जातियां होती हैं। प्याज का सम्पूर्ण भारतवर्ष में तरकारी के रूप में प्रयोग किया जाता है।

प्याज के बाह्य-स्वरूप

प्याज का क्षुप 2 से 3 फुट ऊंचा होता है। पत्र लब्मे, मांसल, पोले तथा रंभाकर होते है। पुष्पदंड हरे रंग का लम्बा होता है, जिसके अग्रभाग में सवृंतमूर्धज छोटे श्वेत पुष्प होते है, कभी-कभी प्याज के साथ कलिका कंद भी दिखलाई पड़ते हैं। फल त्रिकोष्ठीय होता है, जिसमें छोटे काले बीज होते हैं।

प्याज के औषधीय गुण-धर्म

यह पाचन में भारी, चरपरी, स्निग्ध, स्वाद में मीठी किंचित कडुवी होती है। भावप्रकाश के अनुसार प्याज स्वादुपाकि, स्वादिष्ट, अनुष्ण, वात विनाशक, बलकारी, वीर्यवर्धक और भारी होता हैं। लाल प्याज शीतल, पित्तनाशक, काम को दूर करने वाला दीपन और अत्यंत निद्राकारक होता हैं। प्याज के बीज वृष्य, दंतकृमिः और प्रमेह का नाश करने वाले है। द्रव्य गुण विज्ञान के अनुसार-प्लांडू वात शामक, पित्तवर्धक, कफवर्धक, वेदनास्थापन, शोथहर, व्रणशोथपाचं एवं त्वचा के दोषों को दूर करता हैं। मन के रज और तम दोनों को बढ़ाने के कारण अमेध्य है। यह दीपन, पाचन, अनुलोमन, मूत्रल व वृष्य है। शुक्र जनन, रक्त स्तम्भन आर्तव जनन, बाजीकरण, बल्य ओजोवर्धक और कण्डुघ्न है।

प्याज का अधिक सेवन करने से नुकसान

प्याज का अधिक प्रयोग करने से खून को पतला कर देती है प्याज में अधिक मात्रा में विटामिन K पाये जाते है। इस लिए हमारे शरीर में कौमदीन ड्रग बहुत बढ़ जाता है, और हमारा खून पतला कर देता है।

प्याज में अधिक मात्रा में पानी पाया जाता है, इसे अधिक मात्रा में प्रयोग करने से खट्टी डकारें आती हैं। तथा पेट में समस्या बन जाती है।

प्याज में अधिक मात्रा में फ्रक्टोस पाया जाता है। जिसके कारण कई व्यक्तियों को गैस की समस्या का समाना करना पड़ता है। इसका सेवन अधिक करने से उल्टी, दस्त, जी मिचलाना आदि की समस्या हो सकती है।

प्याज का अधिक मात्रा में सेवन करने से किसी-किसी व्यक्ति को एलर्जी होती है। उन लोगों को प्याज का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करनी चहिए।

अधिक मात्रा में प्याज के सेवन करने से त्वचा पर लालपन गले में खराश तथ ब्लडप्रेशर कम हो सकता हैं।

गर्भवती स्त्रियों को प्याज अधिक सेवन नहीं करना चहिए उनको नुकसान करता है। प्याज का प्रयोग गर्भवती स्त्रियों को नहीं करना चाहिए इसके अधिक सेवन से स्त्री के सीने में जलन हो सकती है।

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