पुनर्नवा के फायदे, औषधीय गुण, आयुर्वेदिक उपचार एवं नुकसान

Sponsored

पुनर्नवा की घरेलू दवाएं, उपचार: पुनर्नवा योनिशूल, सुखप्रसव, सफ़ेद पानी, कुष्ठ रोग, अनिद्रा, नेत्ररोग, आँख की लालाई, आँख की खुजली, तिमिर रोग, मुखपाक, हृदय रोग, छाती की मांस फटने पर, खांसी, दमा रोग, बच्चों की बिमारी, बच्चों की खांसी, बच्चों का श्वांस रोग, बच्चों का फुफ्फुस विकार, बच्चों की लार, बच्चों के जिगर वृद्धि, बच्चों के जुकाम, वमन, भुख वृद्धि, विरेचक, उदर रोग, पेशाब की जलन, पेशाब की रूकावट, शरीर पुष्ट, ड्रॉप्सी, पीलिया रोग, गुर्दे के रोग, जलोदर, प्लीहा रोग, गांठ की पीड़ा, आमवात, सूजन, जलमय शोथ, हड़फूटनी, बाइटें, बुखार, विद्रधि का फोड़ा, नारू रोग, स्तन के फोड़े, शारीरिक कमजोरी, दीर्घायु, गर्भशाय, वृद्ध शरीर, वीर्य वर्धक, त्वचा की झुर्रियां, प्रमेह आदि बिमारियों के इलाज में पुनर्नवा की घरलू दवाएं, लाभ, होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक, औषधीय चिकित्सा प्रयोग एवं सेवन विधि निम्नलिखित प्रकार से किये जाते है: पुनर्नवा के फायदे, लाभ, घरेलू दवाएं, उपचार, औषधीय गुण, सेवन विधि एवं नुकसान:-

Table of Contents

पुनर्नवा के विभिन्न भाषाओँ में नाम

हिंदी               –      गदहपूरना, साठी, गड़बिन्दो,
अंग्रेजी           –       स्प्रैडिंग होगवीड
संस्कृत          –       पुनर्नवा, शोथघ्नी
गुजराती        –        साटोडी, बसेडो
तमिल           –       सुकुएटी
तेलगू            –        आतावासा, मिदि
पंजाबी          –        इटसित
मराठी          –         घेटुली
अरबी           –         हंदकूकी
कन्नड़         –         मुचोहुमोसी

पुनर्नवा के घरेलू दवाओं में उपयोग किये जाने वाले भाग

पुनर्नवा के औषधीय प्रयोग किये जाने वाले भाग-पुनर्नवा की जड़, पुनर्नवा की पत्ती, पुनर्नवा का तना, पुनर्नवा का फूल, पुनर्नवा के फल आदि घरेलू दवाओं में पुनर्नवा के प्रयोग किये जाने वाले भाग

पुनर्नवा में पाये जाने वाले पोषक तत्व

पुनर्नवा में पुनर्नवीन नामक एक किंचित चरपरा क्षाराभ, पोटेशियम नाइट्रेट, भस्म में क्लोरायडम नाइट्रेट और क्लोरेट पाये जाते हैं।

योनिशूल में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

योनिशूल में स्त्रियों के योनिशूल में पुनर्नवा स्वरस को योनि में लेप करने या पिचकरी देने से योनिशूल में लाभ होता है।

सुखप्रसव में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

सुखप्रसव प्रसव के समय होने वाली पीड़ा में पुनर्नवा मूल को तरल में स्निग्ध करके योनि में धारण करने से बच्चा सुख पूर्वक और शीघ्र हो जाता है।

सफ़ेद पानी में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

प्रदर रोग (सफ़ेद पानी) में पुनर्नवा की 3 ग्राम मात्रा को जलभांगरे के रस के साथ खिलाने से स्त्रियों का सफ़ेद पानी रोग मिटता है।

कोष्ठ रोग में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

कुष्ठ रोग (सफ़ेद दाग/कोढ़) से ग्रसित मरीज को पुनर्नवा को सुपारी के साथ सुबह-शाम खिलाने से कुष्ठ रोग में शीघ्र लाभ होता है।

अनिद्रा के रोग में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

अनिद्रा रोग में पुनर्नवा का काढ़ा 50-100 मिलीलीटर अनिद्रा के रोगी को पिलाने से रोगी को नींद अच्छी आ जाती है।

नेत्ररोग में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

नेत्र रोग में पुनर्नवा की जड़ों को पीसकर गाय के घी में मिलाकर आँखों में अंजन करने से आँख की फूली कट जाती है। पुनर्नवा की जड़ों को पीसकर मधु में मिलाकर आँखों पर लेप करने से नेत्ररोग में शीघ्र लाभ होता है।

आँख की लालाई में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

आँख की लालाई में पुनर्नवा की जड़ों को पीसकर मधु में मिलाकर आँखों पर लेप करने से नेत्ररोग की लालाई फौरन ठीक हो जाती है।

आँख की खुजली में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

आँख की खुजली में पुनर्नवा की जड़ों को भांगरे के रस के साथ घिसकर आँखों में लगाने से आँखों की खुजली नष्ट हो जाती हैं।

तिमिर रोग में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

तिमिर रोग में पुनर्नवा की जड़ों को केवल जल के साथ पीसकर आँखों में लेप करने से तिमिर रोग दूर हो जाता हैं।

मुखपाक में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

मुखपाक में पुनर्नवा की जड़ों को गाय के दूध में पीसकर छालों पर लेप या कुल्ला करने से मुखपाक में लाभ होता है।

हृदय रोग में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

हृदय रोग से छुटकारा पाने के लिए पुनर्नवा के पत्तों का शाक बनाकर खाने हृदय रोग में अत्यंत लाभ होता है। पुनर्नवा का पंचांग या मूल का सूख चूर्ण शोथ, मूत्रकृच्छ तथा हृदय रोग में प्रयोग करने से लाभ होता है। पुनर्नवा की लगभग 3 ग्राम की मात्रा में शहद या किंचित गर्म जल से नित्य प्रातःकॉल और शाम को प्रयोग करने से हृदय रोग में लाभ होता है।

छाती की मांस फटने पर पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

उरःक्षत (छाती की मांस फटने पर) रोगी के थूक में बार-बार रक्त आ रहा हो तो 5-10 ग्राम पुनर्नवा मूल तथा शाठी चावलों के चूर्ण को मुनक्का के रस, दूध और गाय के देशी घी में पकाकर पिलाने से रोगी को लाभ होता है।

खांसी में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

कास (खांसी) की समस्या से छुटकारा पाने के लिए पुनर्नवा की जड़ों के चूर्ण में खडं मिलाकर दिन में दो बार सेवन करने से सूखी खांसी जड़ से खत्म हो जाती है।

दमा रोग में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

दमा रोग में पुनर्नवा मूल के तीन ग्राम चूर्ण में 500 मिलीग्राम हल्दी मिलाकर सुबह-शाम नियमित रूप से खिलाने से दमा रोग में शीघ्र लाभ होता हैं।

बच्चों की खांसी में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

बच्चों की खांसी में पुनर्नवा पत्र स्वरस 110 ग्राम, मिश्री चूर्ण 150 ग्राम तथा पिप्पली चूर्ण 12 ग्राम इन तीनों को मिलाकर पकायें, जब चाशनी गाढ़ी हो जाये तो उतारकर बंद बोतल में भर लें, इस शर्बत की 8-10 बून्द तक बच्चों को दिन में दो तीन बार चटाने से बच्चों की खांसी ठीक हो जाती है।

बच्चों के श्वांस रोग में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

बच्चों के श्वांस रोग में पुनर्नवा पत्र स्वरस 95 ग्राम, मिश्री चूर्ण 180 ग्राम तथा पिप्पली चूर्ण 12 ग्राम इन तीनों को मिलाकर पकायें, जब चाशनी गाढ़ी हो जाये तो उतारकर बंद बोतल में भर लें, इस शर्बत की 4-10 बून्द तक बच्चों को दिन में दो तीन बार चटाने से बच्चों श्वांस रोग ठीक हो जाता है।

फुफ्फुस विकार में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

फुफ्फुस विकार से ग्रसित बच्चे को पुनर्नवा पत्र स्वरस 96 ग्राम, मिश्री चूर्ण 190 ग्राम तथा पिप्पली चूर्ण 12 ग्राम इन तीनों को मिलाकर पकायें, जब चाशनी गाढ़ी हो जाये तो उतारकर बंद बोतल में भर लें, इस शर्बत की 4-10 बून्द तक बच्चों को दिन में दो तीन बार चटाने से बच्चे को फुफ्फुस विकर रोग से मुक्ति मिलती है।

बच्चो के लार में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

बच्चों के अधिक लार के बहने पर पुनर्नवा पत्र स्वरस 120 ग्राम, मिश्री चूर्ण 215 ग्राम तथा पिप्पली चूर्ण 12 ग्राम इन सबको मिलाकर पकायें, जब चाशनी गाढ़ी हो जाये तो उतारकर बंद बोतल में भर लें, इस शर्बत की 4-10 बून्द तक बच्चों को दिन में दो तीन बार बच्चे को चटाने से लार का बहना बंद हो जाता है।

बच्चों की जिगर वृद्धि में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

बच्चों के जिगर बढ़ने पर पुनर्नवा पत्र स्वरस 110 ग्राम, मिश्री चूर्ण 220 ग्राम तथा पिप्पली चूर्ण 12 ग्राम इन तीनों को मिलाकर पकायें, जब चाशनी गाढ़ी हो जाये तो उतारकर बंद बोतल में भर लें, इस शर्बत की 4-10 बून्द तक बच्चों को दिन में दो तीन प्रयोग कराने से बच्चे का जिगर समान हो जाता है।

बच्चों के जुकाम में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

बच्चों के जुकाम में पुनर्नवा पत्र स्वरस 95 ग्राम, मिश्री चूर्ण 180 ग्राम तथा पिप्पली चूर्ण 12 ग्राम इन तीनों को मिलाकर पकायें, जब चाशनी गाढ़ी हो जाये तो उतारकर बंद बोतल में भर लें, इस शर्बत की 4-10 बून्द तक बच्चों को दिन में दो तीन बार बच्चे को चटाने से जुकाम में लाभ होता है।

वमन (उल्टी) में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

वमन में पुनर्नवा मूल का 2-5 ग्राम चूर्ण का प्रयोग दिन दो तीन बार करने से अधिक मात्रा में हो रही उल्टी में लाभकारी होता है।

भूख की वृद्धि में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

भूख के न लगने पर पुनर्नवा मूल के 3 ग्राम चूर्ण को पीसकर मधु के साथ खाने से भूख बढ़ती है।

विरेचन में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

विरेचक में पुनर्नवा मूल का चूर्ण दिन में दो बार चाय के चम्मच जितनी मात्रा में सेवन करने से मृदु विरेचक का काम करता है।

उदर रोग में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

उदर रोग से छुटकारा पाने के लिए पुनर्नवा मूल को गोमूत्र के साथ प्रयोग करने से सभी प्रकार के उदर रोग में लाभ होता है।

Sponsored
पेशाब की जलन में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

मूत्रकृच्छ (पेशाब की जलन) में पुनर्नवा के 5-7 पत्तों को 2-3 नग काली मिर्च के साथ घोंट छानकर पिलाने से मूत्र वृद्धि होकर पेशाब की जलन मिटती है।

पेशाब की रुकवाट में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

पेशाब की रुकवाट से परेशान मरीज को पुनर्नवा के 5 से 10 मिलीलीटर पत्र रस को देशी गाय के दूध में मिलाकर पिलाने से मूत्र की रुकावट मिटती है।

शारीरक पुष्ट में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

शारीरिक पुष्ट में पुनर्नवा को देशी गाय के दूध के साथ नियमितरूप से सुबह-शाम सेवन करने से शरीर में पुष्ट होता है।

ड्रोप्सी में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

ड्रोप्सी की बीमारी में रोगी को नियमित रूप से पुनर्नवा का प्रयोग करने से ड्रॉप्सी रोग में यह औषधि लाभकारी है।

पीलिया रोग में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

पाण्डु (पीलिया रोग) में पुनर्नवा के पंचाग के 15-20 ग्राम रस में हरड़ का 2-4 ग्राम चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम एक माह तक नियमित मरीज को पिलाने से पीलिया रोग नष्ट हो जाता है।

गुर्दे का रोग में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

गुर्दे की बीमारी में पुनर्नवा के 10-20 ग्राम पंचांग का काढ़ा को सुबह-शाम रोग को पिलाने से गुर्दे के विकारों को यह औषधि दूर करती है।

जलोदर (पेट अधिक पानी भरने पर) पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

पेट के अधिक पानी भरने पर पुनर्नवा के 40-60 ग्राम सूखे फ़ॉन्ट में 1-2 ग्राम शोरा डालकर पिलाने से जलोदर रोग मिटता है।

प्लीहा रोग में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

प्लीहा रोग में सफेद पुनर्नवा की 10-20 ग्राम मूल को तंदुलोदक के साथ पीसकर सेवन करने से प्लीहा रोग ठीक हो जाती है।

गांठ की पीड़ा में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

गाँठ की पीड़ा में सफ़ेद पुनर्नवा की मूल को सरसों के तेल में सिद्ध करके पैरो के तालू में मालिश करने से गांठों की पीड़ा दूर हो जाती है।

आमवात में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

आमवात में पुनर्नवा के काढ़ा को कपूर तथा सौंठ के 1 ग्राम चूर्ण को सात दिन तक आमवात में सेवन करने से आमवात के आम की पाचन क्रिया शुद्ध होती हैं।

सूजन में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

सूजन में पुनर्नवा मूल, देवदारु तथा मूर्वा को मिश्रित कर 3 ग्राम की मात्रा आवश्यकतानुसार शहद के साथ सेवन करने से गर्भावस्था से उत्पन्न शोथ उतर जाती है।

जलमय शोथ में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

जलमय शोथ में पुनर्नवा की जड़, चिरायता और शुंठी, तीनों को समान मात्रा में मिलाकर पुनर्नवा की 20 ग्राम मात्रा लेकर 400 मिलीलीटर पानी में पकाकर चतुर्थाश शेष काढ़ा पीने से सर्वांग जलमय शोथ में शीघ्र लाभ होता है।

हड़फूटनी में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

हड़फूटनी में पुनर्नवा 3 ग्राम की मात्रा को खेर की लुगदी के साथ सुबह-शाम खाने से हड़फूटनी मिटती है।

बाइटें में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

बाइटें में पुनर्नवा की 25 से 50 ग्राम जड़ों का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम नियमित प्रयोग करने से बाइटें मिटते है।

बुखार में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

बुखार से परेशान मरीज को पुनर्नवा मूल की 2 ग्राम मात्रा चातुर्थिक ज्वर में दूध अथवा ताम्बूल के साथ सुबह शाम सेवन करने से बुखार में लाभ होता है। पुनर्नवा पेशाब की जलन मूत्र मार्ग में संक्रमण के कारण उत्पन्न होने वाले बुखार में भी तुरंत लाभ पहुंचाता है। लाल पुनर्नवा, परवल की पत्ती, परवल का फल, करेला, पाठा, ककोड़ा इन सबका शक बुखार में गुणकारी होता है।

विद्रधि का फोड़ा (काख) में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

विद्रधि के फोड़े में सफ़ेद पुनर्नवा की 5 ग्राम जड़ को 500 ग्राम पानी में पकाकर चतुर्थाश शेष काढ़ा 20 से 30 मिलीलीटर मात्रा सुबह-शाम पीने से अपक्क्व विद्रधि नष्ट होती है।

नारू में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

नारू में पुनर्नवा की जड़ और सौंठ को पुनर्नवा के स्वरस में पीसकर नारू पर बांधने या लेप करने से नारू नष्ट हो जाता है।

स्तन के फोड़े में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

स्तन के फोड़े से परेशान स्त्रियों को पुनर्नवा की मूल को मट्ठा के साथ पीसकर लेप करने से स्तन के फोड़े में लाभ होता है।

शरीर की कमजोरी में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

शरीर की कमजोरी दूर करने के लिये पुनर्नवा औषधि बहुत ही गुणकारी है। यह एक समान है और बलवर्द्धक टॉनिक है। महिलाओं के लिये सर्वश्रेष्ठ टॉनिक है।

दीर्घायु में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

दीर्घायु में 20 ग्राम पुनर्नवा नित्य देशी गाय का दूध के साथ 6 माह तक नियमित रूप से सेवन करने से आयु बढ़ती है।

गर्भाशय विकार में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

गर्भाशय विकार में अनार्तव में पुनर्नवा की जड़ को कपास की जड़ के साथ पीसकर काढ़ा बनाकर प्रयोग करने से गर्भाशय विकार दूर होता है।

वृद्धि शरीर में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

वृद्धि शरीर में पुनर्नवा की जड़ों का चूर्ण दो ग्राम गाय के दूध के साथ पीसकर सेवन करने से वृद्ध शरीर भी नवीन हो जाती है।

वीर्य के दोष में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

वीर्य के दोष में पुनर्नवा की जड़ों का काढ़ा बनाकर समभाग असगंध का चूर्ण मिलाकर मटर जैसी गोलिया बना लें, एक-एक गोली खाकर ऊपर से मिश्री मिला कर दूध पाने से वीर्य के दोष दूर हो जाते है।

चेहरे की झुर्रियां में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

चेहरे की झुर्रियां में पुनर्नवा के पंचाग के चूर्ण को गाय के दूध और खंड के साथ सेवन करने से चेहरे की झुर्रियां नष्ट हो जाती है।

प्रमेह रोग में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

प्रमेह रोग में पुनर्नवा के फूलों को सुखाकर चूर्णकर बनाकर एक ग्राम की मात्रा में लेकर तीन ग्राम मिश्री मिलाकर काने से ऊपर से दूध पीने से बल बढ़ता है और प्रमेह शीघ्र ही नष्ट होता है।

सर्पविष में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

सर्पविष में पुनर्नवा के जड़ों को शुद्ध पानी में पीसकर दंश के स्थान पर लेप करने या पट्टी बढ़ने से सर्पविष उतर जाता है।

बिच्छू दंश में पुनर्नवा के फायदे एवं सेवन विधि:

बिच्छू दंश में पुनर्नवा के पत्ते और अपामार्ग की टहनियों को पीसकर बिच्छू के डंक पर लेप करने से बिच्छू का विष उतरता है।

पुनर्नवा का परिचय

पुनर्नवा का बहुवर्षायु क्षुप भारतवर्ष में वर्षा ऋतु में सब जगह उत्पन्न होता है। पुनर्नवा की दो जातियां लाल और सफेद पाई जाती है। पुनर्नवा में रक्त जाति वनस्पति का प्रयोग अधिकता से औषधि के रूप में किया जाता है। पुनर्नवा का कांड पत्र पुष्प सभी रक्त वर्ण के होते हैं। फलों के पक जाने पर वायवीय भाग सूखा जाता हैं। परन्तु मूल भूमि में पड़ी रहती है, जो वर्षा ऋतु में फिर से उग आती है। इसलिए इसका नाम पुनर्नवा है।

पुनर्नवा के बाह्य-स्वरूप

यह बहुवर्षीय प्रसरणशील 2-3 मीटर लम्बा क्षुप कई कोमल शाखाओं और प्रशाखाओं से युक्त, पत्र आधे से एक इंच लम्बे गोल या अंडकार मृदु-रोमश आमने समाने लगे होते हैं। पुष्प छोटे गुलाबी छोटे-छोटे मुण्डकों में प्रायः अवृंत होते हैं। फल 1/2 इंच लम्बे, पंच रेखीय ग्रंथि युक्त होते हैं। मूल स्थूल दृढ और श्वेत होता हैं। वर्षाकाल में पुष्प और फल आते हैं।

पुनर्नवा के औषधीय गुण-धर्म

पुनर्नवा शोथहर, शीतल, हृदयोत्तेजक, शूलहर, मूत्रल है इसका प्रयोग शोथ रोग, हृदय रोग, जलोदर, पाण्डु और मूत्रकृछ्र तथा वृक्क विकारों में किया जाता हैं। पुनर्नवा का विशिष्ट प्रभाव गुर्दों और मूत्र वह संस्थान पर पड़ता हैं। इसलिए यह मूत्रल और शोथहर है। यह रक्त वह संस्थान और हृदय पर भी अच्छा असर डालती हैं। यह मूत्रल, शोथघ्न, विषध्न, हृदय, रसायन दीपनीय, व्रणरोपण, व्रणशोथपाचं, वृष्य, रक्त भारवर्धक, अनुलोमन, रेचन, कासध्न, स्वेदजनन, कुष्ठघ्न, ज्वरध्न तथा मेदोहर हैं। पोटेशियम नाइट्रेट की उपस्थिति के कारण यह हृदय की मांसपेशियों की संकुचन क्षमता को बढ़ाता हैं। दूसरी मूत्रल औषाधियां जहां शरीर में पोटेशियम नाइट्रेट की मात्रा का रहास करती है, वहीं पुनर्नवा मूत्रल होने के साथ-साथ पोटेशियम प्रदायक है।

पुनर्नवा से नुकसान

गर्भवती स्त्रियों और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पुनर्नवा के उपयोग से बचना चाहिए। क्योंकि पुनर्नवा एक मूत्रवर्धक के रूप में काम आता है। इसलिए उच्च रक्तचाप और गुर्दे के रोग में लोगों को पुनर्नवा का प्रयोग सावधानी पूर्वक करना चहिए।

यदि पुनर्नवा का प्रयोग पानी के बिना या खाली पेट लिया जाता है तो यह गले में जलन पैदा कर सकती है।

पुनर्नवा का प्रयोग 12 साल से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पुनर्नवा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। पुनर्नवा में अधिक मात्रा में आयरन के कारण यह आप के पेट खराब कर सकता है।

Subject-Punarnava ke Aushadhiy Gun, Punarnava ke Aushadhiy Prayog, Punarnava ke Labh, Punarnava ke Fyade, Punarnava ke Gharelu Upchar, Punarnava ki Gharelu Davaen, Punarnava ke Fyade, Aushadhiy Gun, Ayurvedic Upchar Evam Nuksan, Punarnava ke Fayde, , Labh, Gharelu Davaen, Upchar, Sevan Vidhi Evam Nuksan, Punarnava Benefits And Side Effects In Hindi.

Sponsored

Reply

Don`t copy text!