पथरी के कारण लक्षण घरेलू दवाएं/औषधीय एवं उपचार विधि/Kidney stone Treatment in Hindi.

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stone-पथरी: आजकल गलत खान पान की वजह से पथरी रोग लोगों में एक आम समस्या बनता जा रहा है। इस समस्या के पीछे काफी हद तक आपकी जीनवशैली से जुड़ी अनियमिताएं जिम्मेदारियां होती हैं जैसे: ग़लत खान-पान व कम से कम पानी पीने से भी किडनी में पथरी का जन्म होता है। किडनी की पथरी सबसे कष्टदायक होती है, जिसके प्रारंभिक चेतावनी संकेत भी हमें मिलते हैं। इस समस्या से निदान पाने के लिए सबसे ज़रूरी होता है कि इन संकेतों को पहचानना और समय से इसका इलाज कराना। तो चलिये जानते हैं क्या हैं किडनी की पथरी के ये प्रारंभिक चेतावनी संकेत है। किसी पदार्थ के कारण जब मूत्र कठोर (गाढ़ा) हो जाता है तो पथरी का निर्माण होने लगता है। इस पदार्थ में छोटे छोटे दाने पाए जाते हैं जो बाद में धीरे-धीरे पथरी में बदल जाती है और इस अवस्था में काफी तेज दर्द होता है जो बाजू से लेकर उरू मूल तक बढ़ता जाता है। स्टोन, पेशाब में (Calcium oxalate) या अन्य क्षारकणों (Crystals) का एक दूसरे से मिल जाने से कुछ समय बाद धीरे-धीरे मूत्रमार्ग में कठोर पदार्थ बनने लगता है, जिसे पथरी के नाम से जाना जाता है।

आयुर्वेदिक औषधिजड़ी-बूटी इलाज

पथरी के कारण: ज्यादातर मरीजों में पथरी गोल अण्डाकर और चिकनी होती है। प्रायः ऐसी पथरी के कोई लक्षण नहीं होते है। इस तरह की पथरी मूत्रमार्ग में अवरोध कर सकती है। जिसके वजह से किडनी में बनता हुआ पेशाब सरलता से मूत्रमार्ग में नहीं जा पाती। जिसके कारण किडनी फूल जाती है और आपके पेट में दर्द होने लगता है। यदि इस पथरी का समय पर उपचार नहीं किया जाये तो लम्बे समय तक फूली हुई किडनी कमजोर हो जाती है और बाद में काम करना संपूर्ण रूप से बंद कर देती है। इस तरह किडनी नष्ट होने के कारण पथरी निकाल भी दी जाए, तो फिर से किडनी के काम करने की संभावना बहुत कम रहती है। बिना दर्द वाली पथरी के कारण किडनी खराब होने का भय अधिक रहता है।

पथरी के लक्षण: अधिकतर पथरी की बीमारी 20 से 40 साल की उम्र वाले लोगों और महिलाओं की तुलना में पुरुषों में तीन से चार गुना देखने को मिलती है। इस तरह के मरीजों में पथरी के होने का कोई लक्षण नहीं दिखता है। इसे अंग्रेजी में (Salient Stone) कहते हैं। पथरी के लक्षण निम्नलिखित प्रकार के होते है जैसे: पीठ और पेट में तोड़ी-थोड़ी देर पर दर्द होना, उलटी, जी मिचलाना, पेशाब में जलन होना, पेशाब के साथ खून आना, पेशाब में बार-बार संक्रमण का होना, अचानक पेशाब का बंद हो जाना, पेट में दर्द के साथ लाल पेशाब होना, अचानक पेट में तेज से दर्द होना आदि पथरी के प्रमुख लक्षण हैं।

पथरी में तिल के प्रयोग: पथरी रोग से छुटकारा पाने के लिए मरीज को तिल को छाया में सूखाकर उसे जलाकर उसकी राख सात ग्राम से दस ग्राम तक प्रतिदिन खाने से पथरी गलकर पेशाब की रास्ते से निकल जाती है। इसके आलावा तिल पुष्पों के 4 ग्राम क्षार को 2 चम्मच शहद और 250 ग्राम दूध में मिला कर पिलाने से पथरी गल जाती हैं।

अश्मरी (पथरी) में सूर्यमुखी से उपचार: पथरी रोग से छुटकारा पाने के लिए मरीज को सूरजमुखी की जड़ को गाय के दूध में पीसकर सुबह-शाम प्रतिदिन पिलाने से अश्मरी शीघ्र गल कर निकल जाती है।

पथरी में सत्यानाशी से उपाय: पथरी को जड़ से नष्ट करने के लिए सत्यानाशी का दूध प्रतिदिन नियमित रूप से 1 मिलीलीटर प्रयोग करने से पथरी गल कर पेशाब के रास्ते से निकल जाती है।

गुर्दे की पथरी में सहिजन से इलाज: वृक्काश्मरी (गुर्दे की पथरी) की समस्या से छुटकारा पाने के लिए सहिजन की छाल या मूल का काढ़ा 20 ग्राम दिन में सुबह-शाम तथा दोपहर पिलाने से गुर्दे की पथरी में लाभकारी होता है।

पथरी में पर्णबीज के प्रयोग: पथरी और मूत्राशय के रोग से छुटकारा पाने के लिए पाषाण भेद के पंचाग का 45-50 मिलीलीटर काढ़ा दिन में सुबह-शाम तथा दोपहर पिलाने से पथरी गलकर पेशाब के रास्ते निकल जाती है। इसके आलावा पर्णबीज के 40 मिलीलीटर काढ़ा में 500 मिलीग्राम शिलाजीत और 2 ग्राम शहद मिलाकर सुबह-शाम पिलाने से पित्ताशय की पथरी गल कर निकल जाती है।

पथरी में नीम से उपचार: अश्मरी (पथरी) के दर्द से परेशान मरीज को नीम पत्रों की 20 ग्राम राख कुछ दिनों तक लगातार जल के साथ दिन में दो तीन बार खिलाने से पथरी गल जाती है अथवा 120 ग्राम नीम पत्र पीसकर, 2 किलो पानी में उबालें, जब चौथाई पानी जल जाये, तब नीचे उतारकर बफारा देने से पथरी निकल जाती है।

पथरी में मूली से उपाय: पथरी के दर्द से परेशान मरीज को मूली के शाख का रस 150 ग्राम निकाल के दिन में सुबह-शाम तथा दोपहर पिलाने से पथरी के टुकड़े हो जाते हैं और पेशाब के रास्ते निकल जाती है इसके आलावा मूली के पत्तों के 15 ग्राम रस में 3 ग्राम अजमोद मिलाकर दिन में 3 बार पिलाने से पथरी गल कर निकल जाती है।

पथरी में मेंहदी से इलाज: पथरी में मेंहदी की छाल 10 ग्राम रात को मिटटी के बर्तन में उबालकर रख लें, उस पानी को प्रातः काल छानकर पिलाने से गुर्दे की पथरी गलकर निकल जाती हैं अथवा हदी के पत्ते व लकड़ी 35 ग्राम को रात में एक गिलास पानी में भिगो दें तथा प्रातः काल पानी निहार लें, पहले जौ का क्षार (यवक्षार) 2 ग्राम लेकर ऊपर से उस पानी को पिलाने से पथरी निकल जाती है।

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पथरी में लाजवंती/छुई-मुई के प्रयोग: पथरी में लाजवंती की 10 ग्राम जड़ का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम तथा दोपहर नियमित पिलाने से पथरी गलकर पेशाब के रास्ते से निकल जाती हैं।

पथरी में कुटज से उपचार: अश्मरी (पथरी) में कुटज के मूल की 5 ग्राम छाल को दही में घिसकर दिन में दो तीन बार सेवन करने से पथरी कट कर गिर जाती है अथवा पथरी में बार-बार होने वाला दर्द ठीक हो जाता है।

पथरी में कटेरी से उपाय: अश्मरी (पथरी) मूत्रकृच्छ्र तथा जलोदर में छोटी कटेरी के मूल का चूर्ण बड़ी कटेरी के मूल के चूर्ण के साथ बराबर मात्रा में मिलाकर 2 चम्मच दही के साथ सात दिन तक प्रयोग करने से पथरी पेशाब की रास्ते से कट कर गिर जाती है।

पथरी में जामुन से इलाज: पथरी की समस्या में पके हुये जामुन के 10 ग्राम रस में 245 मिलीग्राम सैंधा नमक मिलाकर दिन में 2-3 बार कुछ दिनों तक निरंतर प्रयोग करने से मूत्राशय की पथरी नष्ट हो जाती है अथवा जामुन के 15-20 ग्राम कोमल पत्तों को कल्क बनाकर इसमें काली मिर्च 2-4 नग का चूर्ण बुरककर सुबह-शाम प्रयोग करने से पथरी के टुकड़े-टुकड़े होकर मूत्र द्वारा बाहर निकल जाते हैं।

पथरी में गुलदाऊदी के प्रयोग: अश्मरी (पथरी) में गुलदाऊदी के सूखे फूल एक ग्राम से लेकर छह ग्राम तक पीसकर बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर खाने से गुर्दे और मसाने की पथरी टूटकर निकल जाती है।

पथरी में गोखरू से उपचार: पथरी से पीड़ित व्यक्ति को गोखरू के 5 ग्राम चूर्ण को 1 चम्मच शहद के साथ दिन में दो तीन बार चटाकर, ऊपर से बकरी का दूध पिलाने से पथरी नष्ट हो जाती है।

पथरी में गेंदा फूल से उपाय: पथरी में गेंदा के पत्तों के 20-25 ग्राम काढ़ा को सुबह-शाम कुछ दिनों तक सेवन करने से पथरी गलकर पेशाब के रास्ते से निकल जाती है।

पथरी में इलायची से इलाज: पथरी की समस्या से शीघ्र छुटकारा पाने के लिए इलायची का चूर्ण खरबूजे के बीजों में मिश्री मिलाकर 2-3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से गुर्दा की पथरी को इलायची नष्ट कर देती है।

पथरी में गन्ना जूस के प्रयोग: अश्मरी (पथरी) के निकल जाने के बाद रोगी को गर्म पानी में बैठा दें, मूत्र वृद्धि के लिये गन्ना रस को दूध में मिलाकर गर्म कर पीला देने से पथरी की समस्या में लाभदायक होता है।

पथरी में बकायन से उपचार: मूत्राश्मरी (पथरी) में बकायन के 5 ग्राम पत्र स्वरस में 500 मिलीग्राम जौखार सुबह-शाम-दोपहर मिलाकर पिलाने से गुर्दे एवं मूत्राशय की पथरी कट कर निकल जाती है।

पथरी में अशोक से उपाय: पथरी में अशोक के 1-2 ग्राम बीज को पानी में पीसकर नियमित रूप से दो चम्मच की मात्रा में पीने से पेशाब न आने की शिकायत हो या पथरी की समस्या हो यह दोनों में लाभदायक होती है।

पथरी में अपराजिता से इलाज: पथरी में अपराजिता की 5 ग्राम जड़ को चावलों के धोवन के साथ पीस-छानकर एक सप्ताह सुबह-शाम पिलाने से मूत्राशय की पथरी कट-कट कर निकल जाती है।

पथरी में अपामार्ग के प्रयोग: वृक्कशूल (पथरी) में अपामार्ग की 5-10 ग्राम ताज़ी जड़ को पीसकर पानी में घोलकर पिलाने से पथरी में लाभदायक होता है। यह औषधि बस्ति (नाभि) की पथरी को टुकड़े-टुकड़े करके निकाल देती है।

पथरी में अनन्तमूल (सारिवा) से उपचार: पथरी में अनन्तमूल एवं मूत्रकृच्छ में सारिवा मूल का 5 ग्राम चूर्ण गाय के दूध के साथ दिन में सुबह-शाम तथा दोपहर सेवन करने से पेशाब के रास्ते से पथरी गल कर निकल जाती है।

पथरी में अजमोद से उपाय: पथरी में अजमोद का चूर्ण दो से तीन ग्राम तथा 10 ग्राम मूली के पत्तो के रस के साथ, 500 मिलीग्राम जवाखार मिलाकर कुछ समय तक नित्य सुबह-शाम सेवन करने से पथरी गल कर निकल जाती है।

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