मूर्छा, मिर्गी, अपस्मार के कारण, लक्षण, घरेलू दवाएं/ आयुर्वेदिक औषधि एवं उपचार विधि

Sponsored

Table of Contents

क्या होती है मूर्छा,बेहोशी , मिर्गी/अपस्मार What is Epilepsy in Hindi?

यह बीमारी ज्यादातर बाल्यावस्था में प्रारम्भ होती है। यह बीमारी बालकों की तुलना से वयस्कों में बहुत कम ही देखने को मिलती है। अगर किसी व्यस्क में पहली बार मिर्गी का दौरा पड़ा हो तो यह लक्ष्नात्मक दौरों की श्रेणी में आता है। बिना किसी कारण बस बार-बार मुँह से झाग या शरीर में अकड़न आने लगे तो इसे मिर्गी रोग कहते है। आयुर्वेद की भाषा में मिर्गी को अपस्मार और आधुनिक साइंस में इसे Epilepsy Disease भी कहा जाता है। इस प्रकार की मिर्गी में दौरे लम्बे समय तक चलते हैं। अगर इस अवस्था में रोगी व्यक्ति को अधिक समय तक ध्यान न दिया गया तो व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है।

आयुर्वेदिक औषधिजड़ी-बूटी इलाज

मिर्गी के लक्षण-( Symptoms of Epilepsy )

मिर्गी पीड़ित व्यक्ति के मुख से सफ़ेद रंग का झाग निकलने लगता है और पीड़ित को बेहोशी आ जाती है। ये बेहोशी लगभग 10 मिनट से 2 घंटे तक रहे तो इस अवस्था को मिर्गी का लक्षण कहा जाता है। मिर्गी आने के बहुत सारे कारण हो सकते है जैसे कि बचपन में बच्चे की सर पर चोट लगने के कारण और ये एक अनुवांशिक रोग भी हो सकता है। जन्म के समय यदि शिशु के शरीर या मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी हो जाने के कारण भी यह बीमारी हो सकती है। जिस व्यक्ति को ब्रेन ट्यूमर हो उसे मिर्गी के दौरे बार-बार आते ही रहते हैं और ब्रेन स्ट्रोक होने पर ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुँचती है।

मिर्गी रोग (अपस्मार) में वचा के प्रयोग

मिर्गी रोग में वचा के 500 मिलीग्राम चूर्ण में शहद के साथ सुबह-शाम नियमित रूप से एक दो माह तक निरंतर सेवन करने से मिर्गी रोग शीघ्र ठीक हो जाता है।

मिर्गी रोग में तगर के उपचार

मिर्गी रोग से ग्रसित मरीज को 2 ग्राम तगर और फलों को नियमित रूप से सुबह-शाम तथा दोपहर एक माह तक लगातार सेवन करने से मिर्गी रोग में लाभ होता है।

अपस्मार में शिरस/शिरीष के इलाज

मिर्गी रोग में सिरस के बीज, मुलेठी, हींग, लहसुन, सौंठ, वच इन सब को एक साथ कूटकर समान भाग लेकर, बकरी के मूत्र में घोंटकर अंजन बना के इसकी नस्य देने से तथा इसी का अंजन करने से मिर्गी रोग में शीघ्र आराम मिलता है।

अपस्मार (मिर्गी रोग) में शंखपुष्षी के उपचार

मिर्गी रोग में शंखपुष्पी का स्वरस 2 भाग सुबह-शाम शहद के साथ मिलाकर रोगी को पिलाने से मिर्गी रोग नष्ट हो जाता हैं। शंखपुष्पी, बच और ब्राही को समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें, इस चूर्ण को 3 ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार रोगी को खिलने से अपस्मार, हिस्टीरिया और उन्माद जैसे रोगों में लाभ होता हैं।

मिर्गी में सहिजन के इलाज

अपस्मार (मिर्गी) और स्त्रियों के आवेश के रोग में सहिजन की मूल का काढ़ा 25-50 ग्राम तक की मात्रा में सुबह-शाम नियमित रूप पिलाने से मिर्गी रोग में लाभ होता है।

मिर्गी रोग में रीठा के उपचार

मिर्गी रोग में रीठे के बीज, गुठली और छिलके समेत पीसकर मिर्गी के रोगियों को सुबह-शाम सुंघाने से मिर्गी रोग में राहत मिलती है।

मिर्गी रोग में पर्णबीज के प्रयोग

मिर्गी रोग बहुत ही खतरनाक बीमारी होती है, इस रोग में व्यक्ति की जान भी जा सकती है मिर्गी रोग में पर्णबीज के पत्तों का 5 मिलीलीटर रस निकलकर रोगी को सुबह-शाम सेवन कराने से रोगी को फौरन आराम मिलता है।

Sponsored
मिर्गी रोग में पलाश/ढाक के इलाज

मिर्गी रोग में पलाश की जड़ों को पीसकर 4 से 5 बून्द तक नाक में टपकाने से मिर्गी का दौरा शीघ्र ही शांत हो जाता है और रोगी को कुछ ही देर में आराम मिल जाता है।

मिर्गी रोग में नागरमोथा के प्रयोग

मिर्गी रोग में नागरमोथा को उत्तर दिशा की तरफ से पुण्य नक्षत्र में अच्छे दिन में उखाड़ कर, गाय के दूध में मिलाकर रोगी को पिलाने से मिर्गी रोग में लाभ होता हैं।

मिर्गी रोग में काली मिर्च के उपचार

अर्दित रोग (मिर्गी रोग) में यदि जीभ में जकड़न हो तो काली मिर्च के चूर्ण करके जीभ पर घिसने से जीभ के जकड़न में शीघ्र लाभ होता हैं।

मिर्गी रोग में कसौंदी के प्रयोग

अपस्मार, अपतन्त्रक एवं आक्षेपक रोग में कसौंदी की मूलत्वक या पंचांग का काढ़ा 15 से 20 ग्राम दिन में दो-तीन बार सेवन करने से मिर्गी में लाभ होता हैं।

मिर्गी रोग में लता करंज के उपचार

मिर्गी रोग में लता करंज के पत्तों का 15 से 20 ग्राम रस दिन में दो-तीन बार प्रयोग करने से मिर्गी रोग में फौरन आराम मिलता है।

अपस्मार रोग में कटेरी के इलाज

मिर्गी रोग में कटेरी की जड़ को नींबू के रस में घिसकर आँख में अंजन लगाने से धुंध और मिर्गी रोग में लाभ होता है।

अपस्मार रोग में इन्द्रायण के उपचार

मिर्गी रोग में इन्द्रायण की जड़ के चूर्ण का नस्य दिन में दो तीन बार लेने से मिर्गी शीघ्र आराम मिलता है।

मिर्गी रोग में दूब घास के प्रयोग

दूब के पंचांग का स्वरस, मासिक धर्म, भूतोन्माद और अपस्मार में गुणकारी हैं। दूब के रस में सफेद चंदन का चूर्ण और मिश्री मिलाकर रोगी को पिलाने से मिर्गी रोग में लाभ होता है।

मिर्गी रोग में आक के इलाज

मिर्गी रोग में सफ़ेद आक के एक भाग फूल और पुराना गुड़ 3 भाग लेकर दोनों को एक साथ पीस लें, और चने जैसी गोलियाँ बना लें, प्रातः-सांय 1 या 2 गोली ताजे जल के साथ सेवन करने से मिर्गी रोग में तत्काल आराम मिलता है।

अपस्मार रोग में काली मिर्च के उपचार

काली मिर्च और आक के ताजे फूल को महीन पीसकर 300 मिलीग्राम की गोलियाँ बना ले और सुबह-शाम सेवन करे, या फिर आक के दूध में आवश्यकता अनुसार चीनी या मिश्री पीसकर 125 मिलीग्राम की मात्रा में प्रतिदिन प्रातः कॉल 10 ग्राम गर्म दूध के साथ सेवन करने से मिर्गी रोग जड़ से नष्ट हो जाती है।

अपस्मार रोग में अखरोट के प्रयोग

मिर्गी रोगी को अखरोट गिरी को निर्गुन्डी के रस में पीसकर आँखों में अंजन और नस्य देने मिर्गी में लाभ होता है।

मिर्गी रोग में शहतूत के उपचार

शहतूत का रस और आंवले का मुरब्बा मिर्गी रोग में बहुत लाभदायी होता है।

मिर्गी रोग में मेहदी के प्रयोग

एक गिलास दूध के साथ चार चम्मच मेंहदी के पतों का रस निकालकर रोगी को पिलाने से शीघ्र आराम हो जाता है।

अपस्मार रोग में नारियल के उपचार

मिर्गी रोग में नारियल के तेल में आक (मदार) का दूध मिलाकर रोगी के पैरों, हथेलियों और बांहों पर नियमित मालिश करने से दौरा का समय घटता है और मिर्गी रोग में लाभ होता है।

मिर्गी (मूर्छा) अपस्मार के कारण, लक्षण एवं इलाज-Epilepsy, Cause, symptoms Treatment in Hindi

Search Link: Epilepsy/ mirgi-murchha-apasmar ke karan, lakshan, evam ilaj, aushadhiy prayog/ ayurvedik aushadhiy upchar sevan vidhi in hindi. mirgi ki gharelu davaen evam prayog vidhi. mirigi rog ki deshi gharelu upchar evam prayog vidhi, murchha-apasmar ke upchar, ilaj, evam sevan vidhi. apasmar ki gharelu ayurvedik/aushadhiy davaen, gun, upchar/prayog in hindi. murchha ki deshi davaen evam gharelu ilaj/upchar/prayog/aushadhiy gun in hindi..

Sponsored

Reply

Don`t copy text!