पागलपन-मानसिक रोग के कारण, लक्षण, घरेलू दवाएं/आयुर्वेदिक औषधि उपचार एवं सेवन विधि

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क्या होता है पागलपन रोग What is Mental Disease?

पागलपन एक गंभीर बीमारी है जिसमें लोगों को काफी कठनाइयों का समाना करना पड़ता है। यह एक प्रकार का पागलपन मतिभ्रम, भ्रम, और बेहद उलझा हुआ सोच और आचरण के कुछ संयोजन में हो सकता है। एक पागल व्यक्ति को सोचने और समझने तथा निर्णय लेने में कठनाई होती है। इस अवस्था में पागल व्यक्ति को दूसरों पर निर्भर होना पड़ता है। यदि पागलपन अत्यधिक गम्भीर रूप से हो तो ऐसे व्यक्ति से समाज को खतरा हो सकता है, क्योंकि वह स्वयं को भी चोट पहुंचा सकता है और दूसरे को भी हानि पहुँचा सकता है। इसलिए इस तरह के व्यक्ति को पागलखाने में रखना चाहिए जहाँ उसकी देखरेख के अतरिक्त इलाज भी किए जाते हैं। और पागलपन से ग्रसित मरीजों का ध्यान रख कर उनकी देख भाल की जाती है। इस बीमारी में लोग छोटी से छोटी बातों को शीघ्र ही भूल जाते हैं। यह बीमारी बहुत ही कष्टदायक और गंभीर होती है अगर इसका सयम पर इलाज न हो पाए तो व्यक्ति पागल हो जाता है।

आयुर्वेदिक औषधिजड़ी-बूटी इलाज

पागलपन के कारण: दिमाग पर चोट लगने से और कोई बुरी खबर सुनने से तथा किसी हादसे के होने या दिल दिमाग पर चोट लगने के कारण से, सदमें में रहने के कारण, खराब भोजन के कारण, ज्यादा डारने के कारण, ज्यादा दुःख होने के कारण, चिंता और मानसिक तनाव ज्यादा होने के कारण, ज्यादा सम्भोग के कारन आदि।

पागलपन के लक्षण: उल्टी सीधी रहकते करना, मुहं से लार आना, साफ़ सफाई न रखना, कुछ भी बोलते रहना, बिना वजह होना और हंसना, आँखों का इधर उधर घूमना, नंगे होकर घूमना, सोचने समझने की शक्ति खत्म होना, मतिभ्र्रम होना इत्यादि।

मानसिक (पागलपन रोग) में वचा के प्रयोग: पागलपन रोग से ग्रसित मरीज शीघ्र छुटकारा पाने के लिए वचा का कपड़छन किया हुआ चूर्ण 500 मिलीग्राम से एक ग्राम तक की मात्रा में शहद के साथ सुबह-शाम खिलाने से पागलपन का रोग कुछ ही दिन में ठीक हो जाता है।

पागलपन रोग में तगर के उपचार: पागलपन रोग में तगर 1 ग्राम मात्रा में सेवन करने से या ताजे फलों को दिन में दो तीन बार लगातार दो माह तक प्रयोग करने से पागलपन का रोग में लाभ होता है।

पागलपन रोग (मानसिक) में शिरस/शिरीष के इलाज: मानसिक रोग में सिरस के बीज और करंज के बीजों को पीसकर लेप करने से मानसिक, अपस्मार और नेत्र रोग के लिए गुणकारी होता है।

पागलपन (उन्माद रोग) में शंखपुष्षी के उपचार: पागलपन रोग में शंखपुष्पी का रस 10 से 20 ग्राम तक, कूटकर चूर्ण 500 मिलीग्राम थोड़े शहद के साथ सेवन करने से मानसिक रोग रोग मिटता है। इसका स्वरस 10-20 मिलीग्राम शहद के साथ प्रयोग करने से सभी प्रकार के उन्माद रोग में तत्काल लाभ होता है।

पागलपन रोग में प्याज के इलाज: उन्माद रोग (मानसिक) में रोगी को प्याज के कंदों को कुचलकर सुंघाने से पागलपन के रोगी को शीघ्र आराम मिलता है।

पागलपन या उन्माद रोग में काली मिर्च के प्रयोग: हिस्टीरिया (पागलपन रोग ) में खाली पेट खट्टी दही के साथ मीठी बच 3 ग्राम और काली मिर्च का चूर्ण 1 ग्राम दिन में दो तीन बार सेवन करने से हिस्टीरिया यानि पागलपन रोग नष्ट हो जाता हैं।

मानसिक रोग (पागलपन) में कसौंदी के उपचार: मानसिक रोग अपस्मार, हिस्टीरिया में कसौंदी के फूलों को मसलकर रोगी को सुंघाने से पागलपन में लाभ होता हैं। कसौंदी के सूखे फूलों का काढ़ा 20 ग्राम दिन में दो तीन बार हिस्टीरिया ग्रसित रोगी को खिलाने से पागलपन रोग में लाभ होता हैं।

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पागलपन रोग में गुड़हल पुष्प के इलाज: पागलपन या मानसिक विकार में गुड़हल के 100 पुष्प लेकर शीशी की बरनी में डालकर 20 नीबू निचोड़ कर ढक दें। रात भर रखने के बाद, प्रातः काल मसलकर कपड़े में छानकर रस निकाल लें। रस में 700 ग्राम मिश्री 200 ग्राम गुले गाजबांन का अर्क 210 ग्राम मीठे अनार का रस 220 ग्राम संतरे का रस मिलाकर धीमी आंच पर पका ले। जब चाशनी बन जाए तो उतारकर 250 मिलीग्राम कस्तूरी, केसर तथा गुलाब जल मिलाकर अच्छी तरह पकाएं इसका प्रयोग करने से पागलपन रोग और उन्माद, मानसिक विकार में लाभ होता है।

मानसिक रोग (पागलपन) में खुरासानी अजवायन के उपचार: आवेश रोग (पागलपन) में खुरासानी अजवायन की 30 बूँद 1-1 घंटे के अंतर से 25-30 ग्राम पानी में मिलाकर सेवन करने से स्त्रियों या पुरुषों का हिस्टीरिया रोग तथा पागलपन में लाभ होता है।

पागलपन रोग यानि मानसिक विकार में चित्रक के इलाज: हिस्टीरिया (पागलपन) में चित्रक की जड़, ब्राही और वच का समान भाग चूर्ण बनाकर 1 से 2 ग्राम तक की मात्रा में दिन में दो तीन बार सेवन करने से पागलपन रोग में लाभ होता हैं।

पागलपन (हिस्टीरिया रोग) में धतूरा के प्रयोग: उन्माद रोग (पागलपन) में कृष्ण धतूरा के शुद्ध बीजों को पित्त पापड़ा के स्वरस में घोंटकर पीने से पागलपन की उत्दंडता शीघ्र शांत होता हैं। शुद्ध धतूरा के बीज और काली मिर्च बराबर मात्रा में लेकर, महीन चूर्ण करके 100-150 मिलीग्राम की गोली बना लें। जल के साथ गर्म करके 1-2 रत्ती की गोली बनायें। 1-2 गोली सुबह-शाम को मक्खन के साथ सेवन करने से उन्माद यानि पागलपन रोग शांत हो जाता हैं।

पागलपन रोग में ब्राह्मी के प्रयोग: उन्माद रोग (पागलपन) में ब्राह्मी का रस 6 ग्राम, कूटकर चूर्ण डेढ़ ग्राम, मधु 6 ग्राम मिलाकर रोगी को दिन दो तीन बार पिलाने से या जीर्ण उन्माद मिटाने के लिए लाभप्रद होता है। काली मिर्च 2 नग, ब्राही 3 ग्राम, बादाम गिरी 3 ग्राम मगज के बीज प्रत्येक 3-3 ग्राम मिश्री सफेद 25 ग्राम जल में घोंट छानकर सुबह-शाम पिलाने से पागलपन रोग में लाभदायक होता है।

मानसिक रोग (पागलपन) में भांग के इलाज: पागलपन रोग में 250 मिलीग्राम भांग को हींग के साथ या 65 मिलीग्राम सूखा सार हींग के साथ सेवन करने से स्त्रियों के पागलपन रोग में बहुत लाभ होता हैं।

पागलपन रोग या उन्माद में बला के उपचार: पागलपन रोग में श्वेत पुष्प बला की जाति के मूल का चूर्ण 10 ग्राम, दूध आधा किलो, अपामार्ग चूर्ण 5 ग्राम, जल आधा किलो, इन सबको मिलाकर उबालें। जलकर केवल दूध मात्र शेष रह जाये तब दूध ठंडा होने पर छानकर सुबह-शाम सेवन करने से उग्र तथा गंभीर पागलपन रोग में लाभ होता है।

उन्माद (मानसिक रोग) में अनार के इलाज: उन्माद (पागलपन रोग) में अनार के पत्ते और गुलाब के ताजे 10-10 ग्राम फूलों को सुखाकर आधा किलो जल में पकाकर 250 ग्राम शेष क्वाथ रह जाने पर 10 ग्राम गाय का घी मिलाकर गर्म ही गर्म सुबह-शाम पिलाने से उन्माद या मानसिक रोग में गुणकारी होता है।

पागलपन (मानसिक रोग) में नींबू के प्रयोग: नींबू के स्वरस को मस्तक पर लेप करने से पागलपन रोग का कष्ट दूर हो जाता है। नींबू के बीज को खाने से शांति सा महसूस होता है।

मानसिक रोग (पागलपन) में सफ़ेद कद्दू के प्रयोग: 20 ग्राम सफ़ेद कद्दू यानि पेठे के बीज़ की गिरी रात में किसी मिट्टी के बर्तन में 50 ग्राम पानी में डालकर भिगों दें, सुबह उसे सिल पर पीसकर छान लें तथा 6 माशा मधु मिलाकर सेवन करें, 15 दिन तक नियमित इसका सेवन करने से पागलपन रोग दूर हो जाता हैं।

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