मासिक धर्म के कारण, लक्षण, घरेलू दवाएं/आयुर्वेदिक औषधि एवं उपचार विधि

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पीरियड्स: माहवारी यानी मासिक धर्म हर लड़की, हर महिलाओं के शरीर की एक प्राकृतिक क्रिया है जो उनके जीवन का एक हिस्सा है। हालांकि, कभी-कभी महिलाओं के मासिक धर्म में देरी की समस्या से भी गुज़रना पड़ता है। नियमित समय पर माहवारी न होना, महिला के लिए कष्टदायक हो जाता है। पीरियड्स में बिलम्ब होने पर डर सा बना रहता है कि कहीं पार्टी, पूजा या त्यौहार के समय न आ जाएं। ऐसे में ज़ाहिर सी बात है कि लड़कियों एवं महिलाओं को काफी कथनियों का समाना करना पड़ता है। हालांकि, आजकल महिलाएं आयुर्वेदिक एवं अंग्रेजी दवाईयों के प्रयोग से मासिक धर्म को नियमित समय पर लाने की कोशिश करती हैं। इन दवाइयों का प्रयोग सावधानी पूर्वक करना चाहिए क्योंकि कि इनके कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। जिनका प्रभाव आपके स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। इसलिए कोई भी दवाईयों के प्रयोग से सावधानी बरतना चाहिए। मासिक धर्म को सही समय पर लाने के लिए हम कुछ आयुर्वेदिक दवाईयों एवं घरेलु नुस्खे के माध्यम से अपने मासिक धर्म को नियमित समय पर कर सकती है।

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आयुर्वेदिक औषधिजड़ी-बूटी इलाज

मासिक धर्म के कारण कुछ इस प्रकार से हैं जैसे: हार्मोन में बदलाव, तनाव, थायराइड, पीसीओएस (पॉलिस्टिक ओवरी सिंड्रोम), सही पोषक तत्व न लेना, दवाइयों के साइड इफ़ेक्ट इत्यादि।

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मासिक धर्म के लक्षण: महिलाओं के लिए पीरियड्स (माहवारी) का समय कफी कष्टदायक होता है। पीरियड्स आने के कुछ ही दिन पहले से उन्हें माहवारी के कुछ लक्षण नज़र आने लगते हैं। इनमें से कुछ लक्षण इस प्रकार हैं जैसे: भूख न लगना या बहुत ज़्यादा भूख लगना, कुछ महिलाओं को मासिक धर्म के पहले या पीरियड्स के दौरान बहुत ज़्यादा भूख लगना, बाहर की चीज़ें व मीठा खाने की तीव्र इच्छा करना, वहीं, कुछ महिलाओं की खाने की इच्छा बिल्कुल ख़त्म हो जाना, महिलाएं में काफ़ी चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग्स होना, पेट में ऐंठन होना, कमर में ऐंठन की समस्या, सिरदर्द होना, शरीर का अतिसंवेदनशील हो जाना, महिलाओं के स्तनों में दर्द इत्यादि। महिलाओं के लिए ये समय काफ़ी कष्टदायक होता है और आजकल लगभग हर महिला को इस समस्या का समाना करना पड़ता है।

माहवारी के समय कुछ परहेज:

मासिक धर्म आने से 3 दिन पहले ठंडी एवं खट्टी चीज़ों का सेवन नहीं करना चाहिए।
गर्म चीज़ों का प्रयोग न करें।
जंक फूड बिलकुल बंद कर देना चाहिए।
अपनी साफ सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए।
ज्यादा हार्ड वर्क नहीं करना चाहिए।

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मासिक धर्म में घृतकुमारी या एलोवेरा के प्रयोग: मासिक धर्म में घृतकुमारी या एलोवेरा के 10 ग्राम गूदे पर 450 मिलीग्राम पलाश का क्षार बुरक कर सुबह-शाम सेवन करने से मासिक धर्म शुद्ध होने लगता है।

मासिक धर्म में अदरक से उपचार: मासिक धर्म में महिलाओं को अदरक का अधिक से अधिक प्रयोग करने से मासिक धर्म में होने वाले दर्द, पेट के ऐंठन को कम करने में मदद करती है। अदरक शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिन के स्तर को मीडियम रखता है प्रोस्टाग्लैंडिन ऐंठन का मुख कारण है। अदरक का नियमित सेवन किये जाने पर प्रोस्टाग्लैंडिन को नियंत्रित रखता है। इस प्रकार हम बहुत सी बीमारीयों से निदान पा सकते हैं।

मासिक धर्म में अकरकरा से उपाय: मासिक धर्म में अकरकरा का 100 मिलीलीटर काढ़ा बनाकर सुबह-शाम नियमित रूप प्रयोग करने से मासिक धर्म में लाभ होता है।

मासिक धर्म में दूधी से इलाज: मासिक धर्म (रक्त प्रदर) में हरी दूधी को छाया में सुखाकर कूट छानकर प्रतिदिन एक चम्मच सुबह-शाम खाने से वीर्य की उतपत्ति होती हैं और अनावश्यक मासिकस्राव रुक जाता है।

मासिक धर्म में अपराजिता के प्रयोग: मासिक धर्म (माहवारी) में अपराजिता का स्वरस 10 ग्राम निकालकर 10 ग्राम मिश्री में मिलाकर नियमित रूप से प्रयोग करने से मासिक धर्म में लाभदायक होता है।

मासिक धर्म में अर्जुन से उपचार: रक्तप्रदर (मासिक धर्म) में अर्जुन की छाल का 1 चम्मच चूर्ण, 1 कप दूध में उबालकर पकायें आधा दूध शेष रहने पर थोड़ी मात्रा में मिश्री मिलाकर सुबह-शाम तथा दोपहर सेवन करने से मासिक धर्म नियमित रूप से होने लगता है।

मासिक धर्म में अशोक से उपाय: माहवारी (मासिक धर्म) में अशोक की छाल 70 ग्राम चार गुना-गुना पानी में तब तक पकायें जब तक एक चौथाई पानी शेष न रह जायें, इस काढ़ा में 80 ग्राम, दूध डालकर तब तक उबालना चाहिये जब तक सब पानी जल न जाये, उसके बाद छानकर महिलाओं को सुबह-शाम पिलाने से मासिक धर्म में बहुत लाभदायक होता है।

मासिक धर्म में आयापान से इलाज: रक्तस्राव (मासिक धर्म) में आयापान की पत्तियों को पीसकर लगाने से तथा पत्र स्वरस 15-20 ग्राम की मात्रा का नियमित सेवन करने से मासिक धर्म में का रक्तस्राव बंद हो जाता है।

मासिक धर्म में बबूल के प्रयोग: माहवारी में बबूल का भुना हुआ गोंद 4 1/2 ग्राम और गेरू 4 1/2 ग्राम, इन सबको पीसकर प्रातः काल फंकी लेने से माहवारी में अधिक रक्त का बहना बंद हो जाता है। बबूल की 20 ग्राम छाल को 400 ग्राम पानी में उबालकर शेष 100 ग्राम काढ़ा दिन में दो-तीन बार पिलाने से भी मासिक धर्म में अधिक रक्त का बहना बंद हो जाता है।

माहवारी में बरगद से उपचार: मासिक धर्म में बरगद की जटा के अंकुर 10 ग्राम को गाय के दूध 100 ग्राम में पीसकर छानकर सुबह-शाम-दोपहर पिलाने से माहवारी में लाभ होता है। बरगद के 15 ग्राम कोमल पत्तों को 150 से 200 ग्राम जल में घोटकर सुबह-शाम पिलाने से मासिक धर्म में शीघ्र लाभ होता है। महिलाओं या पुरुषों के मूत्र में रक्त आता हो तो बरगद के सेवन से लाभ होता है।

मासिक धर्म में बला से उपाय: रक्त प्रदर (मासिक धर्म) में बला की जड़ व पत्ते को चावलों के धोवन के साथ पीस छान कर मासिक धर्म के समय सेवन करने से अनियमित मासिक धर्म नियमित रूप से होने लगती है।

माहवारी में भांग से इलाज: मासिक धर्म आने से पहले उदर को मृदु विरेचन देकर उदर को शुद्ध कर लेना चाहिए। फिर गांजा सुबह-शाम-दोपहर सेवन करने से मासिक धर्म का दर्द कम हो जाता है और रक्तस्राव नियमानुसार होने लगता है।

मासिक धर्म में भुई आंवला के प्रयोग: माहवारी में भुई आंवला के बीजों का पांच ग्राम चूर्ण चावल के पानी के साथ दो या तीन दिन पीने से मासिक धर्म में अधिक रक्त का आना निश्चय ही बंद हो जाता है अथवा इसकी जड़ के चूर्ण को भी इसी प्रकार प्रयोग में लेन से माहवारी में लाभ होता है।

मासिक धर्म में चमेली से उपचार: मासिक धर्म में चमेली के 20 ग्राम पंचांग को आधा किलो पानी में पकाकर चतुर्थाश शेष काढ़ा सुबह-शाम पिलाने से तिल्ली आदि अंगों के बहाव की रुकावट और माहवारी की रुकावट बंद हो जाता है।

मासिक धर्म में चांगेरी से उपाय: मासिक धर्म में चांगेरी के पंचाग के स्वरस की 5-10 मिलीलीटर मात्रा में दिन में दो-तीन बार प्रयोग करने से पतली धमनियों का संकोच होकर रक्तस्राव में रूकावट आता है।

मासिक धर्म में दालचीनी से इलाज: माहवारी में दालचीनी के काढ़ा का सेवन करने से रक्तस्राव बंद होता है, अतः फेफड़ो में रक्तस्राव हो, गर्भाशय के द्वारा अत्यधिक रक्तस्राव हो और अन्य किसी भी प्रकार के रक्तस्राव में दालचीनी का काढ़ा 15-20 मिलीलीटर सुबह-शाम- दोपहर सेवन करने से लाभ होता है।

मासिक धर्म में धनिया के प्रयोग: मासिक धर्म में धनिया का काढ़ा 15-20 ग्राम सुबह-शाम पिलाने से माहवारी में प्रमाण से अधिक रुधिर का आना शीघ्र बंद हो जाता है।

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मासिक धर्म में अरंडी से उपचार: माहवारी में एरंड के पत्तों को गर्म कर पेट पर बांधने से मासिक धर्म नियमित होने लगता है।

माहवारी की रुकावट में अजवायन से उपाय: मासिक धर्म की रुकावट में अजवायन 10 ग्राम और पुराना गुड़ 50 ग्राम को 150 ग्राम जल में पकाकर सुबह-शाम सेवन करने से गर्भाशय का मल साफ़ हो जाता है तथा रुका हुआ मासिक धर्म फिर से जारी हो जाता है। 3 ग्राम अजवायन चूर्ण को सुबह-शाम गर्म दूध के साथ सेवन करने से मासिक धर्म की रुकावट दूर होकर, रजस्त्राव खुलकर होता है।

मासिक धर्म में गाजर के प्रयोग: मासिक धर्म में गाजर का काढ़ा सुबह-शाम पीने से गर्भाशय से दूषित पदार्थ निकालकर गर्भाशय शुद्ध हो जाता है। एक सप्ताह सेवन करने से माहवारी ठीक प्रकार से होने लगता है और मासिक धर्म में होने वाले कष्ट भी नष्ट हो जाते हैं। 20 ग्राम गाजर के बीज, प्याज, सोया, बथुआ, मूली, पालक, मैथी, अजवायन इन सबके बीज 3-3 ग्राम, बैंगन, धमासा, कुटकी, इन्द्रायण, उल्ट कंबल तथा ऊंटकटारा इन सबकी जड़ 3-3 ग्राम तथा बांस की लकड़ी का चूरा तीन ग्राम, इन सब में 20 ग्राम गुड़ मिलाकर एक किलोग्राम पानी में काढ़ा बना कर 100 ग्राम शेष रह जाने पर इसकी 3 मात्रा स्त्री को तीन बार पिलाने से कष्टार्तव, मूढगर्भ और गर्भाशय के अंदर अशुद्ध रक्त बाहर निकल कर गर्भाशय शुद्ध हो जाता है।

मासिक धर्म में गूलर फल से उपचार: मासिक धर्म में गूलर के 3-4 पके फलों को मिश्री या खांड के साथ दिन में दो-तीन बार पिलाने से माहवारी में शीघ्र आराम हो जाता है अथवा गूलर के सूखे फलों का चूर्ण के बराबर की मिश्री मिलाकर, 5 ग्राम से 10 ग्राम तक की मात्रा में ताजे जल से दिन दो-तीन बार 21 दिन तक सेवन करने से रक्त प्रदर, अधिक रक्तस्राव, गर्भपात, रक्तप्रमेह, रक्त अतिसार या ऊर्ध्वग रक्त पित्त में पूर्ण लाभ होता है।

मासिक धर्म में गुलदाऊदी से उपाय: माहवारी में गुलदाऊदी व सेवती के 15-20 ग्राम फूलों को 250 ग्राम पानी में पकाकर चतुर्थाश शेष काढ़ा को नियमित सुबह-शाम पीने से मासिक धर्म की रुकावट लाभ होता है।

मासिक धर्म में इन्द्रायण से इलाज: मासिक धर्म की रुकावट में इन्द्रायण के बीज तीन ग्राम, काली मिर्च 5 नग, दोनों को एक साथ पीसकर 250 ग्राम पानी में काढ़ा करें, जब एक चौथाई भाग जल शेष रह जाये तब छानकर पीने से रुका हुआ माहवारी पुनः आरम्भ हो जाता है।

माहवारी में करेला रस के फायदे एवं सेवन विधि: मासिक धर्म के समय करेला के पत्तों के 14-15 मिलीलीटर रस में सौंठ, काली मिर्च और पीपल का चूर्ण बुरक कर दिन में दो-तीन बार पिलाने से मासिक धर्म शुद्ध हो जाता है।

मासिक धर्म में मैनफल से उपचार: माहवारी (मासिक धर्म) से जूझती हुई महिलाओं को मैनफल के सूखे हुए फल की धूनी योनि में देने से मासिक धर्म की रुकावट, दर्द, अनियमितता आदि कष्ट दूर हो जाते हैं अथवा यह औषधि गर्भधारण के लिए अति उत्तम सावित हुई है।

मासिक धर्म में मरुआ से उपाय: माहवारी के समय महिलाओं को मरुआ का 25-30 ग्राम फाँट नियमित रूप से सेवन करने रजः स्राव पुनः आरम्भ हो जाता है।

माहवारी में मूली से उपाय: मासिक धर्म में मूली के बीजों के चूर्ण को 4 ग्राम की मात्रा से सुबह-शाम प्रयोग करने से मासिक धर्म की रुकावट शीघ चालू हो जाता है।

मासिक धर्म में नागरमोथा से इलाज: माहवारी (मासिक धर्म) में नागरमोथा को पीसकर उसमें थोड़ा सा गुड़ मिलाकर वैर जैसी गोलियां बनाकर सुबह-शाम खाने से स्त्रियों का मासिक धर्म ठीक होने लगता है।

मासिक धर्म में नीम के प्रयोग: रजोरोध (मासिक धर्म) में नीम की छाल 20 ग्राम जौकुट की हुई गाजर के बीज 6 ग्राम, ढाक के बीज 6 ग्राम, काले तिल और पुराना गुड़, 15-20 ग्राम सबको मिटटी के बर्तन में 300 ग्राम पानी के साथ पकावें, 100 ग्राम शेष रहने पर छानकर एक सप्ताह तक पिलाने से मासिक धर्म खुलकर होने लगता है। परहेज (गर्भवती स्त्री को नहीं देना चाहिये)

माहवारी में निर्गुन्डी से उपचार: मासिक धर्म में कष्टार्तव तथा माहवारी कम होने पर निर्गुन्डी के बीजो के 2 ग्राम चूर्ण की फंकी सुबह-शाम प्रयोग करने से मासिक धर्म ठीक होने लगता है।

मासिक धर्म में प्याज से उपाय: माहवारी में प्याज को कच्ची अवस्था में नियमितरूप सेवन करने से मासिक धर्म नियमित रूप से होने लगता है।

मासिक धर्म की पीड़ा में पिप्पली से इलाज: मासिक धर्म की पीड़ा में पिप्पली, सौंठ, मरीच और नागकेशर समभाग, लेकर चूर्ण बना लें, इस चूर्ण को गाय के देशी घी में मिलाकर दूध के साथ सेवन करने से बांझन स्त्री को संतान की प्राप्ति हो जाती है। माहवारी के समय होने वाले दर्द व अंतस्रावी ग्रंथि (हार्मोन्स) के विकार में भी यह लाभदायक होता है।

मासिक धर्म में राई के प्रयोग: मासिक धर्म की रुकावट में, मासिक धर्म में कष्ट या स्राव कम होता हो, तो निवाये जल में राई का चूर्ण मिलाकर कमर तक डूबे जल में बिठाने से मासिक धर्म में लाभ होता है।

मासिक धर्म में शीशम से उपचार: मासिक धर्म में होने वाले रक्त प्रदर में शीशम के 10-15 मिलीलीटर पत्र स्वरस माहवारी में होने वाले रक्त प्रदर में सुबह-शाम सेवन करने से रक्त प्रदर में लाभ होता है।

मासिक धर्म में तगर से उपाय: मासिक धर्म में सुगन्धबाला का 1-3 ग्राम चूर्ण या 50-100 मिलीलीटर काढ़ा मासिक धर्म को नियमित करता है। ये निद्राकारक है तथा पुरातन प्रमेह में भी लाभकारी है।

मासिक धर्म की रुकवाट में तिल से इलाज: मासिक धर्म यदि कष्ट से आता हो तो तिल का 100 मिलीग्राम काढ़ा बनाकर पिलाने से मासिक धर्म का कष्ट दूर होता है। तिल के 100 मिलीग्राम काढ़ा में 2 ग्राम सौंठ, 2 ग्राम काली मिर्च और 2 ग्राम पीपल का चूर्ण बुरककर दिन में दो-तीन बार पिलाने से माहवारी की रुकावट मिटती है।

मासिक धर्म की पीड़ा में तिल के प्रयोग: मासिक धर्म की पीड़ा में तिल के तेल में पीसकर हल्का गर्म करके नाभि के नीचे लेप करने से मासिक धर्म की पीड़ा नष्ट हो जाता है।

मासिक धर्म की अनियमिता में तिल से उपचार: मासिक धर्म को नियमित करने के लिए तिल का चूर्ण आधा ग्राम की मात्रा में दिन में दो-तीन बार जल के साथ प्रयोग करने से ऋतु स्त्राव नियमित हो जाता है। तिल का काढ़ा बनाकर लगभग 100 मिलग्राम सुबह-शाम पीने से मासिक-धर्म नियमित हो जाता है।

मासिक धर्म में उलटकंबल से उपाय: मासिक धर्म में उलटकंबल के जड़ की छाल का सांद्र चिकना रस, 2 ग्राम की मात्रा में कुछ समय तक नियमित सेवन करने से सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाता है।

मासिक धर्म में जांघों की पीड़ा में उलटकंबल से इलाज: मासिक धर्म के समय जांघों की पीड़ा में उलटकंबल की जड़ का रस 4 ग्राम में खंड मिलाकर सेवन करने से दो ही दिनों में जांघों की पीड़ा शांत हो जाती है।

मासिक धर्म के समय कमर की पीड़ा में उलटकंबल के प्रयोग: मासिक धर्म के समय कमर में होने वाले दर्द में उलटकंबल की जड़ की छाल छः ग्राम और काली मिर्च 3 नग दोनों को शीतल जल में पीसकर छानकर 1 सप्ताह पहले सेवन करने से माहवारी के समय कमर दर्द की पीड़ा शांत होती है।

मासिक धर्म के रक्तस्राव में उलटकंबल से उपचार: मासिक धर्म के रक्तस्राव में उलटकंबल की 50 ग्राम सूखी छाल को जौ कूटकर 620 ग्राम पानी में काढ़ा तैयार कर उचित मात्रा में दिन में दो-तीन बार सेवन करने से कुछ ही दिनों में मासिक धर्म का रक्तस्राव बंद हो जाता है।

रक्तस्राव में तेजपात से उपाय: रक्तस्राव में शरीर के किसी भी अंग से रक्तस्राव होने पर एक चम्मच तेजपात का चूर्ण एक कप पानी के साथ दो-तीन बार सेवन करने से रक्तस्राव में लाभ होता है।

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