मकोय/ रसभरी के फायदे और नुकसान एवं औषधीय प्रयोग

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मकोय के औषधीय गुण

मकोय की दवाएं:-सफ़ेद दाग, खूनी बवासीर, बुखार, चेचक रोग, अनिद्रा, नेत्ररोग, कान दर्द, मुखपाक, दांत की पीड़ा, हृदय रोग, जलोदर, वमन, शाक, पाचन शक्ति, यकृत वृद्धि, प्लीहा वृद्धि, पीलिया, सूजन, मूत्रवृद्धि, गुर्दे की सूजन, सफ़ेद दाग, लाल चट्टे, चूहे का विष आदि बिमारियों के इलाज में मकोय के घरेलू दवाएं एवं औषधीय चिकित्सा प्रयोग निम्नलिखित प्रकार से किये जाते है:-मकोय के फायदे और नुकसान एवं सेवन विधि

Table of Contents

मकोय पौधे में पाये जाने वाले पोषक तत्व

मकोय की पित्तयों में प्रोटीन 5.9%, वसा खनिज 2.1%, कार्बोहाइड्रेट 8.9%, कैल्शियम 410%, फास्फोरस 60%, लोहा 20.5% मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम रिबोफ्लेबिन 0. 59%, निकोटिनिक अम्ल 0.92%, विटामिन सी 0.11% तथा बी, कैरोटीन 0.74% मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम होते हैं। कच्चे हरे फलों में चार रिस्ट्रॉयड, एल्केलायड, सोलामार्जिन, सोल्सोनिन तथा ए0 आर0 बी0 सोले नाइग्रीन होते हैं। कुल क्षाराभ 0.101-0.431% होता हैं। पके फलों में ग्लूकोज और फ्रक्टोज 15-20% तथा बिटामिन सी होते हैं तथा बीजों से एक हरे पीले रंग का तेल निकलता हैं।

मकोय पौधे के उपयोग किये जाने वाले भाग

मकोय पौधे के प्रयोग किये जाने वाले भाग-मकोय की जड़, मकोय का तना, मकोय के पत्ते, मकोय के फूल, मकोय का फल, मकोय का चूर्ण आदि मकोय के उपयोगी भाग है।

मकोय वृक्ष के विभिन्न भाषाओँ में नाम

हिंदी            –     मकोय
अंग्रेजी        –     ब्लैक नाईट और नाईट शादे
संस्कृत       –     काकमाची, रसायनवरा, काकिनी, स्रवतिक्ता
पंजाबी        –     केचुमेच
मराठी         –     कुदा
बंगाली        –     काकमाची, गुड़कामाई
तैलगू          –    काचि
कन्नड़        –    गारीकेसोप्पू
अरबी          –    इंबुस्सा-लब
फ़ारसी        –   अंगूर, रोबाह
उत्तर प्रदेश में इसे झांकोइया के नाम से जानी जाती है।

सफ़ेद दाग में मकोय के फायदे एवं सेवन विधि:

कुष्ठ रोग (सफ़ेद दाग) में काकमाची (काली मकोय) की 20-30 ग्राम पत्तियों को पीसकर त्वचा पर लेप करने से कुष्ठ रोग जड़ से नष्ट हो जाता हैं।

खुनी बवासीर में मकोय के फायदे एवं सेवन विधि:

खूनी बवासीर में मकोय के पत्तों को साफ करके ताजा रस निकलकर अधिक-अधिक 15 ग्राम की मात्रा में पीसकर सुबह-शाम नियमित मस्सों पर लेप करने से खुनी बवासीर में लाभदायक होता है।

बुखार में मकोय के फायदे एवं सेवन विधि:

बुखार से परेशान मरीज को मकोय का काड़ा बनाकर सुबह-शाम दो तीन दिन लगातार सेवन करने से बुखार जल्द ही ठीक हो जाता है।

चेचक रोग में मकोय के फायदे एवं सेवन विधि:

चेचक रोग होने से चेहरे पर काले डब्बे बन जाते हैं। यदि चेचक रोग का समय पर उपचार नहीं होता तो यह चेहरे पर दाग छोड़ देता हैं। चेचक रोग के उपचार के लिए मकोय से निकलने के रस को पिलाने से चेचक ठीक हो जाता है।

अनिद्रा में मकोय के फायदे एवं सेवन विधि:

अनिद्रा में मकोय की जड़ों के 10-20 ग्राम काढ़ा में थोड़ा गुड़ मिलाकर रात के समय पिलाने से निद्रा अच्छी तरह से आती हैं।

नेत्ररोग में मकोय के फायदे एवं सेवन विधि:

नेत्र रोग में पिल्ल रोग वालों की आँखों को ढक कर, आँखों को मकोय के घी चुपड़े फलों की धूनी देने से आँख के कीड़े बाहर निकल जाते हैं।

कान दर्द में मकोय के फायदे एवं सेवन विधि:

कर्णशूल (कान दर्द) में कान दर्द में मकोय के पत्तों का हल्का गर्म रस 2-4 बूँद कान में टपकाने से कान दर्द में लाभ होता हैं।

मुख के छाले में मकोय के फायदे एवं सेवन विधि:

मुखपाक में मकोय के 5-6 पत्तों को चबाने से मुख और जिहां के छाले नष्ट हो जाते हैं।

दांत की पीड़ा में मकोय के फायदे एवं सेवन विधि:

दांत की पीड़ा में मकोय के पत्तों के रस में घी या तेल समभाग मिलाकर दांतों के दर्द पर मलने से दांत का कष्ट मिट जाता हैं।

हृदय रोग में मकोय के फायदे एवं सेवन विधि:

हृदय रोग में मकोय के पत्तों, फल और डालियों का सत्व निकालकर, 2 से 8 ग्राम तक की मात्रा में दिन में दो तीन बार प्रयोग करने से सभी प्रकार के हृदय रोग मिटते हैं।

उल्टी में मकोय के फायदे एवं सेवन विधि:

वमन (उल्टी) में मकोय के 10-15 मिलीलीटर रस में 125-250 मिलीग्राम सुहागा मिलाकर पिलाने से उल्टी आना बंद होती हैं।

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मकोय का शाक में मकोय के फायदे एवं सेवन विधि:

मकोय के पत्ते और कोमल शाखाओं का शाक बनाया जाता हैं। मकोय के पके फल खाने के काम आते हैं।

पाचन शक्ति में मकोय के फायदे एवं सेवन विधि:

मंदाग्नि (पाचन शक्ति) में मकोय के काढ़ा 50-60 मिलीलीटर में 2 ग्राम पीपल का चूर्ण डालकर सुबह-शाम भोजनोरांत पिलाने से पाचन शक्ति में बढ़ जाती है। मकोय के इस प्रयोग से आँखों को धोने से नेत्र की ज्योति बढ़ती हैं।

यकृत वृद्धि में मकोय के फायदे एवं सेवन विधि:

यकृत वृद्धि में मकोय के पौधों का 150-160 ग्राम स्वरस नियमित रूप से पिलाने से बढ़ा हुआ जिगर कम हो जाता हैं। एक मिटटी के बर्तन में रस को निकाल कर इतना गर्म करें कि रस का रंग हरे से लाल या गुलाबी हो जाय। तब रात को उबालकर, सुबह ठंढा कर प्रयोग करने से यकृत रोग में लाभ होता है।

प्लीहा वृद्धि में मकोय के फायदे एवं सेवन विधि:

प्लीहा की शांति के लिये मकोय का काढ़ा 50-60 मिलीलीटर सैंधा नमक तथा जीरा मिलाकर पीना चाहिए अथवा पके आम का रस, शहद मिलाकर सेवन करने से प्लीहा वृद्धि में लाभ होता है।

पीलिया रोग में मकोय के फायदे एवं सेवन विधि:

कामला (पीलिया) रोग में मकोय के पत्तों का काढ़ा 50-60 मिलीलीटर में शोरे और नौसादर के तेज़ाब की 4-6 बूँद दाल कर सुबह-शाम पीलाने से बढ़ा हुआ यकृत ठीक हो जाता हैं। मकोय के 40-60 ग्राम काढ़ा में हल्दी का 2-5 ग्राम चूर्ण मिलाकर प्रयोग करने से पीलिया रोग नष्ट हो जाता हैं।

सूजन में मकोय के फायदे एवं सेवन विधि:

शोथ (सूजन) सूजन की जटिल से जटिल समस्या का उत्तम औषधि है, सर्वांग शोथ के ऊपर मकोय के फलों का हल्का गर्म-गर्म सूजन पर लेप करने से सूजन बिखर जाती है।

मूत्रवृद्धि में मकोय के फायदे एवं सेवन विधि:

मूत्रवृद्धि में मकोय के अर्क को 10-15 मिलीलीटर की मात्रा में नियमित पिलाने से अच्छा विरेचन होता है और मूत्रवृद्धि होती हैं। गुर्दे और मूत्राशय की सूजन एवं पीड़ा भी मिटती हैं।

गुर्दे की सूजन में मकोय के फायदे एवं सेवन विधि:

गुर्दे की सूजन में मकोय के अर्क को 15-20 मिलीलीटर की मात्रा में नियमित प्रयोग करने से गुर्दे की सूजन में लाभ होता है।

त्वचा के लाल चट्टे में मकोय के फायदे एवं सेवन विधि:

त्वचा के लाल चट्टे में मकोय के अर्क की थोड़ी मात्रा को शरीर पर लेप करने से बहुत दिनों के लाल चट्टे मिट जाते हैं।

चूहे के विष में मकोय के फायदे एवं सेवन विधि:

चूहे के विष में मकोय का रस उत्तम औषधि है। मकोय का ताजा रस निकालकर लेप करने से चूहे का विष शीघ्र उतर जाता है।

मकोय के नुकसान
मकोय पौधे का परिचय

यह छोटा पौधा भारतवर्ष के छाया-युक्त स्थानों में सर्वत्र पाया जाता हैं। मकोय पूरे वर्ष पर्यन्त फूल और फल देखे जा सकते हैं।

मकोय वृक्ष के बाह्य-स्वरूप

मकोय की झाडी शाखायुक्त एक-डेढ़ फुट तक ऊँची, तथा शाखाओं पर उभरी हुई रेखाएं होती हैं। पत्र अंडाकार या आयताकार, दंतुर या खंडित, 2-3 इंच लम्बे, एक-डेढ़ इंच तक चौड़े होते हैं। मकोय के पुष्प छोटे, श्वेत वर्ण, बहिकक्षीय पुष्प डंडों पर 3-8 के गुच्छों में नीचे झुके होते हैं। मकोय फल छोटे, स्निग्ध गोलाकार अपरिक्व अवस्था में हरे रंग के और पकने पर नीले बैगनी रंग के, कभी-कभी पीले या लाल होते हैं। मकोय के बीज छोटे, चिकने, पीले रंग के, बैगनी के बीजों की तरह होते हैं परन्तु बैंगन के बीजों से बहुत छोटे होते हैं। पकने पर फल मीठे लगते हैं।

मकोय वृक्ष के औषधीय गुण-धर्म

यह त्रिदोशघ्न हैं। स्निग्धता और अल्पमात्रा में उष्ण होने के कारण वातशामक तिक्त और कटु होने से पित्त और कफ का शामक हैं। मकोय रसयान, शोथहर, वेदनास्थापक, व्रण शोधन तथा सवर्णीकरण हैं। यह दीपन, यकृत को उत्तेजना देने वाला, पित्तसारक और रेचन हैं। कफध्न, हिक्का निग्रहण और श्वासहार हैं। यह मूत्रल, स्वेदजन कुष्ठघ्न ज्वरध्न, कटुपौष्टिक और विषध्न हैं। यकृत की क्रिया बिगड़ने से जो सूजन, बवासीर, अतिसार या कई प्रकार के चर्म रोग होते हैं, वे इसके सेवन से नष्ट हो जाते हैं। मकोय, सुरसा, भार्गी निर्गुण यह सब कफ को दूर करने वाले एवं कृमिनाशक हैं। प्रतिश्याय, अरुचि, श्वास, कास नाशक एवं शोधक हैं।

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