लू के कारण, लक्षण, घरेलू दवाएं/आयुर्वेदिक औषधि एवं उपचार विधि Loo Treatment in Hindi.

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Loo: (Heat Stroke) गर्मी के आते ही कई शहरों का तापमान इतना ज्यादा हो जाता है कि लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। इन दिनों दोपहर के समय बाहर बहुत तेज गर्म हवाएं चलने लगती हैं, इन गर्म हवाओं को ही लू (Heat stroke) कहते हैं। मजबूत इम्युनिटी वाले व्यक्ति जिस गर्म हवाओं का समना नहीं कर पाते हैं और अधिकांश व्यक्ति लू के शिकार हो जाते हैं। “लू” लगने के प्रमुख कारण हो सकते हैं जैसे: शरीर में नमक और पानी की कमी लू के प्रमुख कारण हैं। पसीने की “शक्ल” में नमक और पानी का बड़ा हिस्सा शरीर से निकलकर खून की गर्मी को बढ़ा देता है। शरीर के तापमान में वृद्धि को ही लू लगना कहते है।

आयुर्वेदिक औषधिजड़ी-बूटी इलाज

लू लगने के लक्षण 

  • लू लगने से सिर में दर्द होना।
  • सिर का भारीपन होना।
  • नाड़ी की गति बढ़ने लगती है।
  • साँस की गति बढ़ जाना तथा शरीर में ऐंठन-सी होने लगती है।
  • खून की गति में वृद्धि होना।
  • हाथ और पैरों के तलुओं में जलन होना तथा आँखों में जलन होना।
  • अचानक से तेज बुखार।
  • लू लगने पर कुछ कथनियाँ जैसे शुष्क त्वचा, उल्टी, दौरे या चक्कर आना, बेहोशी, मांसपेशियों में तनाव, कमजोरी की समस्या इत्यादि।
  • हीट स्ट्रोक, जी मिचलाना, त्वचा लाल गर्म और सूखी हो जाना, शरीर का ट्रेम्प्रेचर अधिक होना, जी घबराना, कालरा होना।
  • सांस तेज होना और हृदय की गति अचानक बढ़ जाना।
  • इसके अलावा चिड़चिड़ापन, भ्रम की स्थिति, व्यक्ति के व्यवहार में अचानक विचित्र परिवर्तन और मूड स्विंग होना भी लू लगने के लक्षण होते हैं।
  • बार-बार दस्त लगना ।

लू Loo लगने के कारण

  • लू में घर से बहार जाना
  • तरल पदार्थ या पानी कम पीना
  • गर्मियों में खाली पेट बाहर जाना
  • अधिक शराब का सेवन करना
  • धूप में अधिक समय तक बाहर घूमना

लू एवं गर्मी से बचने के लिए धुप का चश्मा लगाकर निकलें

गर्मी में जब भी घर से बाहर निकलें, अपनी आँखों पर धूप का चश्मा लगाकर ही निकलें ये धूप से आँखों को काफी राहत और ठंडक देता है। जो लोग एयर कंडीशनर या कूलर के सामने बैठ कर काम करते हैं उन्हें एकदम ठंडे वातावरण से तेज धूप में नहीं निकलना चाहिए क्योंकि अचनाक सर्दी से गर्मी की वजह से भी लू लग सकती है।

गर्मी एवं Loo से बचने के लिए अपने पूरे शरीर को कवर कर के ही घर से बाहर निकलें

धूप में निकलने से पहले आप अपने पूरे शरीर को किसी कपड़े से कवर कर लें और दोपहर में सड़कों पर या खुले मैदानों में न घूमें। यदि सड़कों पर पैदल चलना है तो आप छाता या किसी कॉटन कपड़े से अपने पूरे शरीर को अच्छी तरह ढक लें। यदि दोपहिया वाहन चला रहे हो तो सिर पर हैलमेट या टोपी पहनें। गर्म हवा के थपेड़ों से बचने के लिए कान को कपड़े से ढक लें। गर्मी के मौसम या धूप में बिना एसी AC वाली बंद कार में ही यात्रा करनी चाहिए।

लू एवं गर्मी के मौसम में वाहन को धूप में न खड़ी करें

कभी-कभी तो बंद कार लू लगने का बहुत सामान्य कारण होता है। बंद कार यदि धूप में खड़ी हो तो कार के अदंर का तापमान बाहर के तापमान से बहुत ज्यादा हो जाती है। बाहर यदि 25 C तापमान हो तो कार के अंदर का टेम्प्रेचर 50 C या इससे अधिक भी हो सकता है। इस लिए लू लग सकती है। कुछ लोग बच्चों या बुजुर्गों को बंद कार में छोड़कर किसी काम से चले जाते हैं छोटे बच्चे, बुजुर्ग लोगों को कभी भी बंद कार में अकेला नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि बहुत कम समय में ही हिट स्ट्रोक के शिकार हो सकते हैं। क्योंकि बाहर निकलना चाहें तो भी बाहर नहीं निकल पाए और आस पास किसी को उनकी परेशानी का अहसास न हो। यह खतरनाक हो सकता है। इस लिए आप कहीं भी जाएं तो बच्चों और बुजुर्गों को कार में न छोड़े उन्हें भी अपने साथ ले जाएँ।

गर्मी एवं लू लगने के कारण कालरा होना

Loo लू असल में ये गर्मी से होने वाली शारीरिक समस्या है। ये हमारे शरीर में खुद को ठंडा रखने की कार्यप्रणाली होती है। इस कार्यप्रणाली के कारण हम बाहर की गर्मी या शारीरिक गतिविधि के कारण अंदर बढ़ने वाली गर्मी से खुद को बचा नहीं पाते पसीना आना उसी कार्यप्रणली का एक हिस्सा होता है। पसीना आने के लिए श्री में प्रयाप्त मात्रा में पानी का होना जरूरी होता है। पानी की कमी होने पर यह कार्य प्रणाली सही तरीके से काम नहीं कर पाती है। ऐसे में यदि शरीर का तापमान 104 f से ज्यादा हो जाये तो हमे कालरा की शिकायत हो जाती है। लू लगने को ही हीट स्ट्रोक कहते हैं। ऐसे में चिकित्सा बहुत कम्पलसरी हो जाती है।

Loo एवं गर्मी से बचने के लिए कुछ सरल घरेलू उपचार इस प्रकार हैं:

  • घर से बाहर धूप में निकलते समय छाते का इस्तेमाल करना चाहिए, या सिर ढक कर धूप में नकिलने से भी लू से बचा जा सकता है।
  • Loo लू से बचने धनिए को पानी में भिगोकर रखें, फिर उसे अच्छी तरह मसलकर छानकर उसमें थोड़ी सी चीनी मिलाकर पीने से लू में राहत मिलती है।
  • गर्मियों में आम का पन्ना पीना चाहिए यह कच्चे आम का शर्बत होता है जो आपको लू से बचाता है।
  • इमली के बीज को पीसकर उसे पानी में घोलकर कपड़े से छान लें इस पानी में शक़्कर मिलाकर पीने से लू से बचा जा सकता है।
  • बाहर निकलने से पहले हमेशा अपने साथ पानी की बोतल रखें और थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें। दिन में खाली पेट बाहर नहीं निकलना चाहिए। घर से निकलने से पहले कुछ न कुछ खाकर ही निकले इस प्रयोग से लू में बचाव होता है।

गर्मी एवं लू से बचने के लिए भरपेट भोजन करें

गर्मी के दिनों में भूखे पेट बाहर नहीं निकलना चाहिए जब भी घर से बाहर निकलना हो तो भरपेट भोजन करके ही निकलना चाहिए ये लू से बचाव करता है।

Loo लू एवं गर्मी से बचने के लिए अधिक से अधिक पानी का सेवन करना चाहिए

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ग्रीष्मकाल में अधिक पसीना आता है इसलिए हमारे शरीर का पानी अधिक मात्रा में खर्च होता है। यदि पानी की आपूर्ति न हो तो शरीर से पसीना निकलना बंद हो जाएगा। पसीना शरीर के तापमान को नियंत्रित कर हमे लू से बचाता है। इसी प्रकार शीतल जल एक अमृत पेय है। घर के बाहर निकलने से पहले खूब पानी पिएं ताकि आपके के शरीर में पानी की कमी न आने पाए। पानी के अतिरक्त इस मौसम में शर्बत, गन्ने का रस, लस्सी आदि का भी अधिक से अधिक मात्रा में सेवन करना चाहिए। पानी व् रेशा प्रधान तरावट देने वाले फलों का सेवन करना चाहिए।

गर्मी एवं लू से बचाव करने के कुछ घरेलू उपचार

  • धूप में निकलने से पहले पूरे अंगों को ढकने वाले कपड़े का इस्तेमाल करें। अगर हो सके तो आपको सफेद या गलके रंग के कपड़े पहनें चाहिए। इससे गर्मी कम लगती है।
  • गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी न हो इसलिए तरबूज, ककड़ी, खीरा खाना चाहिए। इसके आलावा फलों का जूस भी पीना चाहिए।
  • गर्मी के मौसम में पानी में ग्लूकोज मिलाकर पीते रहना चाहिए। इससे आपके शरीर को ऊर्जा मिलती है। जिससे आपको थकान कम लगती है।
  • गर्मी एवं लू से बचने के लिए बेल या निम्बू का शर्बत भी पीना चाहिए यह आपके शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है।
  • जब आप कहीं भी घर से बाहर गये हो तो वापस आने के ठीक बाद पानी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। क्योंकि उस समय आपके शरीर का तापमान अधिक हो जाता है और उस समय पानी पीना आपके के शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए जब आपके शरीर का तापमान सामान्य हो जाए तभी पानी पीना चाहिए।
  • घर से पानी या कोई ठंडा शर्बत पीकर ही बाहर निकलें, जैसे आम पना, शिकंजी, खस का शर्बत इत्यादि, खस का शर्बत लू के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
  • गर्मी के दिनों में बार-बार पानी पीते रहना चाहिए ताकि शरीर में पानी की कमी न होने पाए।
  • पानी में नीम्बू और नमक मिलाकर दिन में दो-तीन बार पीते रहने से लू लगने का खतरा कम हो जाता है।
  • धूप में घर से बाहर जाते वक्त खाली पेट नहीं जाना चाहिए।
  • हरी सब्जियों के सूप का सेवन करने से भी लू से बचा जा सकता है।
  • गर्मी के मौसम में हल्का भोजन करना चाहिए। भोजन में दही को भी शामिल करना चाहिए।
  • गर्मी से बचने के लिए नहाने से पहले जौ के आटे को पानी में मिलाकर उसका पेस्ट बनाकर अपनी बाड़ी पर खूब अच्छी तरह लगाकर कुछ देर बाद ठंडे पानी से नहाने से लू का असर कम हो जाता है।
  • Loo लू से बचने के लिए कच्चे आम का लेप बनाकर पैरों के तलवों पर मालिश करनी चाहिए।
  • लू लगने और ज्यादा गर्मी में शरीर पर घमौरियां हो जाती हैं उस समय बेसन को पानी में घोलकर घमौरियों पर लगाने से फायदा होता है।
  • गर्मी के मौसम में खाना खाने के ठीक बाद गुड़ खा लेने से भी लू से बचा जा सकता है।
  • टमाटर की चटनी, नारियल और पेठा खाने से भी लू नहीं लगती।
  • मेथी की सूखी पत्तियों को ठंडे पानी में कुछ समय भिगोकर रखें कुछ देर बाद उसे हाथ से मसल छानकर इस पानी में थोड़ा सा शहद मिलाकर दो-दो घंटे के बाद पीते रहने से लू में राहत मिलती है।
  • गर्मी एवं लू से बचने के लिए सिंथेटिक या टाइट कपड़े पहनने से हवा नई लग पाती और शरीर के अंदर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। ऐसे में हीट स्ट्रोक या लू का असर हो सकता है।

Loo लू एवं गर्मी के कुछ सरल घरेलू उपचार

लू लगने पर में शंखपुष्षी के प्रयोग: लू लगने से रोगी बेसुध हो जाता है, और प्रलाप करने लगता है, उस समय नींद लाने के लिये शंखपुष्पी चूर्ण 5-10 ग्राम चूर्ण को भैंस के दूध एवं शहद के साथ पिलाने से लू में शीघ्र लाभ होता है।

लू लगने पर प्याज से उपचार: लू लग जाने पर प्याज का ताजा रस शरीर पर मालिश करने से लू का प्रकोप फौरन समाप्त हो जाता है।

लू लगने पर नीम से उपाय: लू लगने पर नीम के पंचाग चूर्ण 10 ग्राम, मिश्री 10 ग्राम, एकत्र पानी के साथ पीस-छानकर पिलाने से लू लगने के उपद्रव शांत हो जाते हैं।

लूक का असर में इमली से इलाज: लू लगने पर इमली फल के गूदे को ठंडे पानी में पीसकर, मुंडे हुए सिर पर लगाने से लू का असर और बेहोशी मिटती है। पकी हुई इमली को पानी में मलकर उसी पानी में कपड़ा भिगोकर शरीर को कुछ देर तक पोछने-फेरने से लू का असर कम होता है।

लू लगना में गुड़हल पुष्प के प्रयोग: लू से पीड़ित व्यक्ति को गुड़हल के 80 फूल लेकर, हरे डंठल को निकालकर पंखुड़ियों को नीबू के साफ रस में रखकर, रात्रि में किसी खुले स्थान पर कांच के बर्तन में मुंह बंद कर भिगोकर रख दें। प्रातः मसल छानकर इसमें 650 ग्राम मिश्री या चीनी, 1 बोतल उत्तम गुलाब जल मिलाकर, दो बोतलों में बंद कर धूप में दो दिन तक रख दें, उसके बाद मिश्री अच्छी तरह मिल जाने पर 15 से 30 मिलीलीटर तक की मात्रा पीते रहने से खून लू की गर्मी दूर हो जाती है।

लू के मौसम में नींबू से उपचार: गर्मी के मौसम में लू से बचने के लिए नींबू और चीनी का शर्बत बनाकर नियमित सेवन करने से लू से प्रभवित रोगी को शीघ्र आराम मिलता है।

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