Liver-जिगर की घरेलू दवाएं/औषधीय एवं उपचार विधि

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लीवर, जिगर/यकृत: आज कल की बदलती जीवनशैली में हर व्यक्ति को पेट से सम्बंधित कुछ न कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ये परेशानी लीवर में गड़बड़ी के कारण होती है। खान-पान में विशेष ध्यान न देने पर लीवर ख़राब हो जाता है। इसमें लीवर का फैटी होना, सूजन आ जाना और लीवर में इन्फेक्शन हो जाना आदि शामिल है। यदि हमारा खाना सही से नहीं पच पा रहा है तो पेट में किसी न किसी प्रकार की परेशानी हो सकती है तो हमें समझ जाना चाहिए की ये लीवर की खराबी के कारण रो रहा है अगर इसका समय से इलाज न किया जाये तो आपके लिए घातक साबित हो सकता है। ज्यादातर लीवर की खराबी अधिक तेल मसाले वाले भोजन करना, ज्यादा शराब पीना या बाहर का अधिक खाना खाने की वजह से होता है। लीवर की खराबी के कई लक्षण हो सकते हैं जैसे: त्वचा पर सफ़ेद धब्बे पड़ना, सिर में दर्द रहना, मुंह से बदबू आना, पेशाब या मल गहरे रंग का होना, आंखों के नीचे काले धब्बे पड़ना, पेट में हमेशा दर्द रहना, भोजन का सही ढंग से नहीं पचना आदि लीवर की खराबी के प्रमुख लक्षण हैं।

लीवर ख़राब होने के करण निम्नलिखित हैं जैसे: दूषित खाना और पानी का सेवन करना, मसालेदार और चटपटी चीजें खाना, खाना खाते समय ओकी आना, बार-बार डेकॉर आना, विटामिन B की कमी के कारण, एंटीबायोटिक दवाईयों का अधिक सेवन करना, मलेरिया या टायफायड, चाय, कॉफी, जंक फूड का सेवन अधिक सेवन करना, सिगरेट, शराब के कारण, 6 घंटे से कम नींद लेना आदि शामिल है।

लीवर खराब होने के प्रमुख लक्षण जैसे: पेट में दर्द और सूजन होना, लीवर वाली जगह में दर्द होना, छाती में जलन या भारीपन, भूख न लगना, जी मचलाना, खून की उल्टी होना, बदहजमी, पेट में गैस, गैस के साथ बदबू आना, पेट में भारीपन, मुंह का स्वाद खराब होना, कमजोरी या थकान, पीलिया होना, त्वचा में जलन इत्यादि।

एलोवेरा से लीवर दुर्बलता का इलाज: घृतकुमारी कुमारी के पत्तों का रस दो भाग तथा मधु 1 भाग दोनों द्रव्यों को चीनी मिटटी के पात्र में मुंह बंद कर 1 सप्ताह तक धूप में रखें। तत्पश्चात इसको छान ले। यह औषधि योग 10-20 ग्राम की मात्रा में प्रातः-सांय सेवन करने से यकृत विकरों में अच्छा लाभ करता है। इसकी अधिक मात्रा विरेचक है, परन्तु उचित मात्रा में करने से मल एवं वात की प्रवृत्ति ठीक होने लगती है, यकृत (लीवर) की दुर्बलता सबल हो जाती हैं तथा उसकी क्रिया सामान्य हो जाती है।

गिलोय से लीवर का उपचार: लीवर वा जिगर में ताज़ी गिलोय 18 ग्राम, अजमोद 2 ग्राम छोटी पीपल 2 नग, नीम की सीके 2 नग इन सबको कुचलकर, रात्रि को 250 ग्राम जल के साथ मिटटी के बर्तन में रख दें। प्रातः पीस छानकर पीला दें। 15 से 30 दिन तक सेवन से पेट के सभी प्रकार के रोग दूर जाते हैं।

जैतून तेल से लिवर का इलाज: जैतून तेल लिवर रोग के लिए सबसे उत्तम औषधि है। नाश्‍ते में या फिर पानी के साथ जैतून का सेवन करना चाहिए। अगर आप जैतून तेल का इस्तेमाल नहीं कर सकते तो आपको सिगरेट, शराब और तंबाकू के अलावा अनावश्यक खानपान से दूर रहना होगा। ये आपके लिवर के साथ ही सेहत बिगाड़ने के भी दुश्मन हैं।

हल्दी से लीवर का उपचार: हल्दी के नियमित सेवन से लिवर की सभी समस्याओं से निदान पाया जा सकता है। लिवर एंटीसेप्टिक गुण और एंटीऑक्सीडेंट का सबसे उत्तम स्त्रोत है। हल्दी की रोगनिरोधन क्षमता हैपेटाइटिस B व C का कारण बनने वाले वायरस को वृद्धि से रोकती हैं। दूध में हल्दी मिलाकर नित्य सेवन करने से लिवर दुरुस्त रहता है।

आंवला से लिवर का उपचार: आंवला में विटामिन C का सबसे उत्तम स्त्रोत पाया जाता है जो लिवर, आंख, बाल और त्वचा के लिए सबसे उत्तम औषधि साबित हुई है। कई शोधों के अंतर्गत यह साबित हो चुका है कि आंवले में लिवर को सुरक्षित रखने वाले सभी तत्व मौजूद होते हैं।

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करेला से लिवर का इलाज: करेले का स्वाद भले ही कड़वा होता है लेकिन यह लिवर रोग के लिए बहुत गुणकारी होता है। प्रतिदिन 1 ग्लास करेले का जूस पीने से लिवर दुरुस्त रहता है। इसके अलावा यह फैटी लिवर की परेशानी को भी नष्ट करता है।

पालक और गाजर से लिवर का उपचार: लीवर की गर्मी और सूजन कम करने में पालक और गाजर का जूस सबसे उत्तम औषधि साबित हुई है। लीवर की गर्मी और सूजन कम करने में पालक और गाजर का जूस मिलाकर सुबह-शाम नियमित पीना चाहिए इस प्रयोग से लीवर की सभी प्रकार की बीमारियां जल्द ही ठीक हो जाती हैं। हल्दी में एंटी सेप्टिक गुण भरपूर पाया जाता है जो लीवर पर रामबाण की तरह असर करता है। हल्दी और दूध का सेवन रात को सोने से पहले करने से लीवर की कमजोरी नष्ट हो जाती है और लीवर को ताकत मिलती है।

मुलेठी से लिवर का उपचार: लीवर को स्वस्थ रखने के लिए मुलेठी का प्रयोग कर सकते हैं। लिवर रोग में मुलेठी की जड़ का चूर्ण बनाकर इसे पानी में उबले, अब उबले हुए पानी को ठंठा कर छान लें। इसका प्रयोग नियमित रूप दिन में एक दो बार करने से लिवर की कमी दूर हो जाती है।

सेब के सिरके से लिवर का इलाज: सेब का सिरका हमारे शरीर के हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालता है। सेब का सिरका 1 दिन में 2 बार एक एक चम्मच और शहद को पानी में मिलाकर पीने से लिवर को ताकत मिलती है। पाचन शक्ति को दुरुस्त रखने में सेब का सिरका गुणकारी होता है। खाना खाने से ठीक एक घंटा पहले पानी में सेब के सिरके को मिलाकर पीने से पेट की चर्बी कम हो जाती है।

पपीता से लिवर का उपचार: लिवर रोग में पपीता सबसे उत्तम औषधि साबित हुई है। लीवर में सूजन आने पर प्रतिदिन दो चम्मच पपीते के रस में नींबू का रस मिलाकर दिन में दो-तीन बार लें। इस उपाय को लगभग एक माह तक करें इससे लीवर की सूजन कम हो जाती है।

प्याज से लिवर का इलाज: प्रतिदिन दिन में दो-तीन बार 700 ग्राम प्याज का सेवन करने से लीवर सिरोसिस की बीमारी नष्ट हो जाती है।

नींबू से लिवर का उपचार: लिवर रोग से छुटकारा पाने के लिए एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर, सेंधा नमक डालकर दिन में दो-तीन बार सेवन करने से यकृत की कमजोरी और गर्मी दूर हो जाती है।

लस्सी से लिवर का इलाज: जिगर रोग में अगर गर्मी बढ़ जाए तो एक गिलास लस्सी में जीरा, काली मिर्च और हींग डालकर नियमित सेवन करने से लिवर की गर्मी कम हो जाती है।

टमाटर से लिवर का उपचार: अगर आप लिवर जैसी समस्या का सामना कर रहें हों तो प्रतिदिन 3-4 कच्चा टमाटर जरूर खाएं। नियमित रूप से टमाटर का सेवन करने से लिवर से जुड़ी सारी परेशानी दूर हो जाएँगी।

जामुन से लिवर का इलाज: जामुन का कसैला स्वाद भी औषधियों के लिए उत्तम माना जाता है। जामुन के सीजन में 200-300 ग्राम साफ-सुथरा और पके हुए जामुन प्रतिदिन खाली पेट खाने से जिगर की कमी दूर हो जाती है और फैटी लीवर के लिए भी यह फायदेमंद होती है।

ग्रीन टी से लिवर का उपचार: लिवर रोग से छुटकारा पाने के लिए सुबह खाली पेट 1 कप ग्रीन टी का सेवन करें। ग्रीन टी में एंटी-आक्सीडेंट गुण पाये जाते हैं जो आपके लिवर में मौजूद विषैले पदार्थों को नष्ट करने हमारी मदद करते हैं। जिससे आप लिवर की समस्या से निदान पा सकते हैं।

साबुत अनाज से लिवर का इलाज: साबुत अनाज में फाइबर और पौष्टिक तत्‍व होने के कारण यह जल्दी पच जाता है और लिवर से जुड़ी बिमारियों से दूर रहने के लिए होल ग्रेन या साबुत अनाज का प्रयोग करना चाहिए। इससे आपका लिवर स्वस्थ रहता है।

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