कान का दर्द, खुजली, रोग, दवा, इलाज, घरेलू उपचार विधि

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कान का दर्द-दोस्तों, ज्यादा तर लोग कान की समस्या से परेशान हैं यदि किसी व्यक्ति के कान से तरल पदार्थ निकलता हो तो उसे कान बहना या ओटेारिया (Otorrhea) कहा जाता है। लेकिन यह समस्या ज्यादा तर छोटे शिशुओं व बच्चों में देखने को मिलती है और यह समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। दोस्तों, कान से बहने वाला पदार्थ Year wax के नाम से भी जाना जाता है। यह एक तरल पदार्थ होता है जो शरीर में स्वाभाविक तौर से पैदा होता है। वहीं कई बार कान से ब्लड आना, पस या अन्य प्रकार के द्रव भी निकलने लगते हैं जो आपको बताता है कि आपके कान में इंफेक्शन या चोटिल हो गया है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कान दर्द कभी-कभी अन्य अंतर्निहित समस्या जैसे साइनसिसिटिस, आपके दांतों में समस्याएं, आपकी नाक में संक्रमण या फेरनक्स, आपके गले में कैंसर या एक आभा जो माइग्रेन से ठीक पहले आता है। परन्तु आपको परेशान होने की जरूरत नहीं कुछ सरल घरेलू दवा एवं औषधीय के प्रयोग से कान की समस्या से निदान पा सकते हैं।

आयुर्वेदिक औषधिजड़ी-बूटी इलाज

दोस्तों, अब हम जानेंगे कान की समस्या से निजात दिलाने वाली 43 सरल घरेलू जड़ी-बूटी के बारे में- 

एलोवेरा से कान दर्द का उपचार: कान में अधिक पीड़ा होने पर घृतकुमारी के रस को गर्म कर जिस कान में दर्द हो रहा हो उसके दूसरी तरफ के कान में दो-दो बून्द टपकाने से कान के दर्द में आराम मिलता है।

गिलोय से कान के मैल का उपचार: गिलोय को पानी में घिस गुनगुना करके कान में 2-2 बून्द दिन में दो बार डालने से कान का मैल निकल जाता है।

अलसी से कान की सूजन का इलाज: कान की सूजन में अलसी को प्याज के साथ पकाकर उसे कान में टपकाने से कान की सूजन मिटती है।

अनार से कर्ण रोग का उपचार: कान में दर्द होने पर अनार के ताजे पत्तों का रस 100 ग्राम, गौमूत्र 400 ग्राम, और तिल तैल 100 ग्राम, तीनों को धीमी आंच पर पकावें, तैल मात्र शेष रह जाने पर छानकर रख लें। कान में सुबह-शाम नियमित सेवन से कान की पीड़ा कर्णनाद और वधिर्ता में लाभ होता है।

अनार से बहरापन का उपचार: बहरापन में अनार के पत्तों के रस में बराबर मात्रा में बेल पत्र स्वरस और गाय का घी मिलाकर 20 ग्राम घी (गर्म), 250 ग्राम मिश्री मिले दूध के साथ प्रातः-सांय सेवन करने से बहरापन में लाभ होता है।

अर्जुन से कान के दर्द का इलाज: कर्णशूल (कान की पीड़ा) में अर्जुन के पत्तों का स्वरस 3-4 बूँद कान में डालने से कान की पीड़ा मिटटी है।

आक से कर्णरोग का उपचार: कर्णरोग में सरसों का तेल और लवण से युक्त आक के पत्तों को वैध बांये हाथ में लेकर दाहिने हाथ से एक लोहे की कड़छी को गर्म कर उसमें दाल दें। फिर इस तरह अर्क पत्रों का स्वरस कान में डालने से कान के समस्त रोग दूर होते है। इसके अलावा कान में मवाद आना, साँय-साँय की आवाज होना आदि में आक लाभदायक है।

श्योनाक से कर्णशूल का उपचार: कर्णशूल (कान के दर्द) में श्योनाक की छाल को पानी के साथ महीन पीसकर तिल के तेल में रख लें और तेल में दुगना पानी डालकर धीमी आग पर पकायें, जब तेल शेष रह जाये तो इसको छानकर शीशी में भर लें, इस तेल की 2-4 बूँद कान में टपकाने से कान की पीड़ा शांत होती है।

बरगद से कर्ण रोग का इलाज: कान में यदि फुंसी हो या कीड़े पड़ गये हो तो बरगद के दूध की चार से पांच बूँदों में सरसों के तेल मिलाकर डालने से ही कान का दर्द तथा कान की फुंसी नष्ट हो जाती है।

भांग से कर्णरोग का उपचार: कर्णरोग में भांग के 8-10 बूँद स्वरस को कान में डालने से कीड़े मरते हैं और कान की पीड़ा में शीघ्र आराम मिलता है।

भारंगी से कर्णरोग का इलाज: कर्णरोग में भारंगी की जड़ को घिसकर एक बूँद कान में डालने से लाभ होता है। तथा कान के कीड़े मर जाते है।

चमेली से कर्णरोग का उपचार: कान में यदि दर्द हो या पीब निकलती हो तब चमेली के 20 ग्राम पत्रों को 100 ग्राम तिल के तेल में उबालकर तेल को कान में 1-1 बूँद डालने से पीब निकलना बंद हो जाता है तथा चमेली के तेल में एलबा मिला के कान में डालने से कान की खुजली मिटती है इसके अलावा चमेली के पत्रों का 5 मिलीलीटर रस 10 मिली गौमूत्र में मिलाकर गर्मकर कान में डालने से कान का दर्द मिटता है।

दालचीनी से कान के बहिरापन का उपचार: कान के बहिरापन में दालचीनी का तेल 2-2 बूँद कान में टपकने से बहिरेपन में लाभ होता है।

धतूरा से कर्णरोग का इलाज: कर्णरोग में धतूरे के पत्तों का रस आग पर काढ़ा बना कर, कान के पीछे की सूजन पर लेप करने से कर्णरोग में आराम होता है। इसके अलावा कान में अगर मवाद बहती हो तो 8 भाग सरसों का तेल, 1 भाग गंधक, 32 भाग धतूरा पत्रों का स्वरस मिलाकर विधिपूर्वक तरल सिद्ध करके, इसके तेल की 1 बूँद कान में सुबह-शाम डालने से कर्णरोग में शीघ्र लाभ होता है।

अजवायन से कर्णरोग का उपचार: कर्णशूल में 10 ग्राम अजवायन को 50 ग्राम तिल के तेल में पकाकर सहने योग्य गर्म तेल को 2-3 बून्द कान में डालने से कान की पीड़ा शांत होती है।

खुरासानी अजवायन से कर्णशूल का इलाज: कर्णशूल (कान की पीड़ा) में खुरासानी अजवायन को तिल के तेल में सिद्ध करके कान में 2-3 बूँद टपकाने से कान की पीड़ा शीघ्र ही मिटता है।

ईसबगोल से कर्णशूल का उपचार: कर्णशूल (कान) में ईसबगोल के 10 ग्राम लुआब में प्याज का स्वरस 10 ग्राम मिलाकर गर्म करके सहने योग हो जाये तो कान में डालने से कान की पीड़ा मिटती है।

गेंदा फूल से कर्णरोग का इलाज: कर्णशूल (कान दर्द) में गेंदा फूल के पत्तों का रस 2-2 बूँद कान में डालने से कान का दर्द मिट जाता है।

गूलर से कर्णरोग का उपचार: कर्णशोथ में गूलर की गोंद का लेप करने से पित्तज की सूजन तथा कान के दोष दूर होते है।

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हल्दी से कर्णरोग का इलाज: कान से पूय निकलता हो तो हल्दी और फिटकरी का फूला 1:20 के अनुपात के परिमाण में मिलाकर दिन में दो तीन बार 2-2 बून्द कान में डालने से पुराना से पुराना कान का पूय निकलना बंद हो जाता है।

जामुन से कर्णरोग का उपचार: कर्णपूय स्राव में जामुन की गुठली का चूर्ण के साथ मधु मिलाकर घोटकर कान में डालने से कान से पूय निकलना बंद हो जाता है।

करेला से कान के रोग का इलाज: कर्णशूल में करेला के ताजे फल का अथवा पत्तों का रस गर्म कर कान में डालने से कान के सभी प्रकार के रोग में लाभ होता है।

कसौंदी से कान रोग का उपचार: कर्णरोग में कसौंदी के पत्तों का रस को दूध में मिलाकर धीमी आंच में गुनगुना कर कान में 2-4 बून्द टपकाने से कर्णरोग का दोष मिटता है।

मकोय से कान दर्द का इलाज: कर्णशूल (कान दर्द) में मकोय के पत्तों का हल्का गर्म रस 2-4 बूँद कान में टपकाने से कान दर्द में लाभ होता है।

मूली से कान के दर्द का उपचार: कर्णवीकार (कान के दर्द) में मूली के पानी को तिल के तेल में जलाकर कान में 2-4 बूँद डालने से कान की पीड़ा शांत होती है। इसके अलावा मूली का क्षार 4 ग्राम, मधु 30 ग्राम, दोनों को मिलाकर इसे बत्ती भिगोकर कान में रखने से पूय आना बंद हो जाता है।

नीम से कान के दर्द का इलाज: कान के दर्द में नीम पत्र रस 40 ग्राम को, 40 ग्राम तिल तेल में पकावें, तेल मात्र शेष रहने पर छानकर 3-4 बून्द कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है। इसके अलावा नीम तेल 40 ग्राम, मोम 5 ग्राम, आग पर रखकर मोम गल जाने पर उसमें फुलाई हुई फिटकरी का 750 मिलीग्राम चूर्ण भली प्रकार मिलाकर शीशी में रख लें, कान साफ़ कर बून्द दिन में 2 बार डालने से कान के दर्द में लाभ होता है।

नीम से कान के पीव का उपचार: कर्णस्राव में नीम के मद में समभाग शहद मिलाकर कान को अच्छी प्रकार साफ़ कर 2-2 बून्द सुबह-शाम नित्य टपकाने से 1-2 माह में लाभ होता है। इसके अलावा कान से पूय निकलती हो तो निम्ब तेल में शहद मिलाकर उसमें रुई की बत्ती भिगोकर कान में धारण करने से कान से पीव निकलना बंद हो जाता है।

निर्गुन्डी से कान के रोग का इलाज: कर्णरोग (कान) कान के अंदर अगर पीप पड़ गई हो तो निर्गुन्डी के पत्तों के स्वरस सिद्ध किये हुए तेल को मधु के साथ मिलाकर 1-2 बून्द कान में डालने से कान के रोग में लाभ होता है।

प्याज से कान के दर्द का उपचार: कर्णशूल (कान) के दर्द में प्याज के स्वरस को हल्का गर्म करके 2-4 बून्द कान में डालने से कान दर्द शीघ्र शांत हो जाता है।

प्याज से कान की सूजन का इलाज: कान की सूजन में अलसी को प्याज के रस में मिलाकर पकाकर छान लें, इस रस की 8-10 बून्द की मात्रा को कान में डालने से कान के अंदर की सूजन फौरन मिट जाती है।

पिप्पली से कान के दर्द का उपचार: कान की पीड़ा में पिप्पली चूर्ण को निर्धूम अंगारे पर रखने से धुंआ निकले उसे किसी नली द्वारा कान में प्रविष्ट कराने से कान का दर्द शीघ्र दूर हो जाता है।

राई से कान की सूजन का इलाज: कर्णशोथ (कान की सूजन) सन्निपात ज्वर में या कान में पीव होने पर कान के मूल में सूजन आ जाती है, इस दशा में राई के आटे को सरसों के तेल या एरंड तेल में मिलाकर लेप करने से रक्त बिखर जाती है।

राई से कान के पीव का इलाज: अगर कान से पीव निकलती हो तो 100 ग्राम सरसों का तेल या तिल का तेल अच्छी प्रकार से धीमी आंच में पकाकर ठंडा होने पर 10 ग्राम राई, 10 ग्राम लहसुन और डेढ़ ग्राम कपूर डालकर एक बोतल में भरकर रख दें, सुबह-शाम कान में 4-5 बून्द टपकाने से कान से पीव निकलना बंद हो जाता है और जख्म भर जाता है।

सहिजन से कान के नीचे की सूजन का उपचार: कान के नीचे की सूजन में सहिजन की छाल और काली राई को पीसकर हल्का लेप करने से कान के नीचे की सूजन बिखर जाती है। इसके अलावा सहिजन के गोंद को तिल के तेल में गर्म कर कान में 2-4 बून्द टपकाने से कान का दर्द शीघ्र ही मिटता है।

सहिजन से कान की खुजली का इलाज: कान की खुजली में सहिजन की जड़ का 20 मिलीलीटर रस, सैंधा नमक 125 मिलीग्राम, शहद एक चम्मच और तेल 50 मिलीलीटर को साथ गर्म करके कान में 2-2 बून्द टपकाने से कान की खुजली मिटती है।

जामुन से कर्णरोग का उपचार: कर्णपूय/स्राव में जामुन की गुठली का चूर्ण के साथ मधु मिलाकर कान में डालने से कान से पूय निकलना बंद हो जाता है।

सेहुड़ से कान की पीड़ा का इलाज: कर्णशूल (कान की पीड़ा) में सेहुंड के रस को गरम कर कानों में 2-2 बून्द टपकाने से कान की पीड़ा में आराम मिलता है।

सेहुड़ से बहरापन का उपचार: मनुष्य के बहरापन में 10-20 ग्राम थूहर और गाय के दूध को सरसों के तेल में पकायें जब तेल मात्र शेष रह जाये तो 2-2 बून्द तेल कान में डालने से बहरापन दूर होता है।

शिरस/शिरीष से कान की पीड़ा का इलाज: कर्ण (कान की पीड़ा) में सिरस के पत्ते और आम के पत्तों के रस को गुनगुना कर कान में टपकाने से कान की पीड़ा शांत होती है।

सूर्यमुखी से कर्णरोग का उपचार: कर्ण रोग में सूर्यमुखी का पत्र कल्क एवं रस सिद्ध करके उस तेल कान में डालने से कान के रोग ठीक हो जाते हैं। इसके अलावा यदि कान में कीड़े पड़ गये हो तो इसके पत्र स्वरस में थोड़ा सा त्रिकटु सौंठ, काली मिर्च, और पीपल का समभाग चूर्ण मिलाकर गुनगुना कर एक से दो बून्द कान में डालने से कान के कीड़े मर जाते हैं तथा कान की पीड़ा शांत हो जाती है।

तुलसी से कान दर्द का इलाज: कर्णशूल में तुलसी के पत्तों का ताजा रस गर्म करके 2-4 बून्द कान में टपकाने से कान की पीड़ा फौरन ठीक हो जाती है। इसके अलावा कान के पीछे की सूजन में तुलसी के पत्ते, एरंड की कोपले और थोड़े नमक को पीसकर उसका गुनगुना लेप करने से कान के पीछे की सूजन बिखर जाती है।

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