घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय गुण सेवन विधि-Ghratkumari or Aloe Vera Health Benefits Uses in Hindi

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घृतकुमारी या एलोवेरा एलर्जी, सिर दर्द, खांसी, बुखार, मासिक धर्म, वीर्यवर्धक, श्वेत प्रदर,  मधुमेह,  मुहासे, झाइयां, गंठिया,  कैंसर, खूनी बवासीर, गुप्त रोग, यौनशक्ति, वीर्य बृध्दि, शीध्रपतन, स्तम्भन, लिकोरिया, तनाव, रक्त प्रवाह, त्वचा सुंदरता,  बाल झड़ना, सूजन, खून कमी, हार्मोन्स,  अल्सर,  बच्चों की  कब्ज, आर्थराइटिस,  कान दर्द, मूत्र रोग, नेत्र रोग,  खुजली,  वजन घटाने, आकर्षक केश, कटने जलने, गैस, कब्जीयत,  लीवर (liver) दुर्बलता,  तिल्ली,   चक्कर आना,  कोलेस्ट्रॉल, शारीरिक दुर्बलता, योन रोग, सफेद दाग आदि बीमारियों के इलाज में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय गुण, प्रयोग एवं उपचार विधि निम्नलिखित प्रकार से किए जाते हैं। घृतकुमारी या एलोवेरा के  के फायदे, औषधीय गुण, प्रयोग विधि, घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय प्रयोग एवं उपचार विधि, Ghratkumari or Aloe Vera Health Benefits Uses in Hindi:-

आयुर्वेदिक औषधिजड़ी-बूटी इलाज

Table of Contents

एलर्जी में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय प्रयोग एवं उपचार विधि:

एलर्जी होने पर घृतकुमारी के गूदे में भुने हुए काले तिल एवं गुड़ का लड्डू बनाकर प्रयोग करने से एलर्जी से आराम मिलता है, विशेष कर बच्चों को एलर्जी की समस्या से वचाने के लिए घृतकुमारी या एलोवेरा को औषधि के रूप में प्रयोग करने से एलर्जी से मुक्ति मिल सकती है।

सिर दर्द (आधाशीशी, अधकपारी) में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय प्रयोग एवं उपचार विधि:

किसी भी प्रकार के सिर दर्द, कमर दर्द से दुखी मरीजों को घृतकुमारी या एलोवेरा के गूदे में थोड़ी मात्रा में दारुहरिद्रा वृक्ष (भारतीय बारबेरी) का चूर्ण मिश्रित कर गर्म करके वेदना स्थान पर बांधने से वातज (गठिया वात ,कमर दर्द, घुटने का दर्द तथा कफज, माईग्रेन (अर्धावभेदक) में लाभ होता है।

खांसी में घृतकुमारी या एलो वेरा के औषधीय एवं चिकित्सीय प्रयोग एवं उपचार विधि:

खांसी से परेशान मरीजों को एलोवेरा (घृतकुमारी) के गुदे में काला नमक डाल कर सेवन करने मात्र से शीघ्र ही खांसी में बहुत आराम मिलता हैं, घृतकुमारी की जड़ का क्वाथ (काढ़ा) खांसी में अत्यंत लाभकारी होता हैं।

बुखार (ज्वर) में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय प्रयोग एवं उपचार विधि:

ज्वर (बुखार) से परेशान मरीज को घृतकुमारी की जड़ का 10-20 ग्राम काढ़ा दिन तीन बार पिलाने से ज्वर शीघ्र ही ठीक हो जाता हैं तथा मरीज को तुरंत आराम मिलता है।

यौनशक्ति, वीर्य बृध्दि, स्तम्भन, शीध्रपतन  में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय प्रयोग और उपचार विधि:

यौनशक्ति, वीर्य बृध्दि, शीध्रपतन, स्तम्भन कामशक्ति को बढ़ाने के लिए घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय प्रयोग आप के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। यौनशक्ति, वीर्य बृध्दि, शीध्रपतन, स्तम्भन सम्बन्धी समस्यायों में घृतकुमारी द्वारा आयुर्वेदिक चिकित्सा विधि अपनाने के लिए 350 ग्राम भुनी हुई गोद, 300 ग्राम घृतकुमारी या एलोवेरा गूदा (घृतकुमारी का छिलका निकला हुआ) अथवा 300 ग्राम एलोवेरा का रस और 150 ग्राम गेहूं का आटा तथाथोड़ा देशी घी मिलाकर हाथ में घी लगाकरगूंद लें (हाथ में घी लगाने से गोंद एवं आटा हाथ में नहीं चिपकेगा) पूरी तरह मिलने के बाद मिश्रण की लोई बना लें। अब कड़ाही में देशी घी डालकर इसे लाल गुलावी होने तक तल लें और फिर नीचे उतार कर दोवारा से थाली में रख कर चूरा कर लें। चूरा बनने के बाद कड़ाही में बचे हुए घी से थोड़ा घी मिलाकर दुबारा हल्का सा भुनने के बाद उतार कर इसमें आवश्यकतानुसार गुड़ या खाड़ और गोंद, काजू, बादाम के छोटे छोटे टुकड़े करके मिला लें। अब बने हुए मिश्रण के 20 से 25 ग्राम के लड्डू बना लें। इसके प्रयोग से यौनशक्ति, वीर्य बृध्दि, शीध्रपतन, स्तम्भन कामशक्ति आदि गुप्त रोग की समस्याओं में बहुत अधिक लाभ होता है।

सेवन विधि: सुबह नास्ता के समय प्रतिदिन एक एक लड्डू खाने के बाद एक ग्लास मिश्री मिले हुए दूध का सेवन करना चाहिए। इस उपयोग से काम शक्ति, वीर्य बृध्दि, स्तम्भन, शारीरिक शक्ति, यौनशक्ति बढ़ने के साथ साथ शीध्रपतन की समस्या से छुटकारा मिलता है। अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए इस प्रयोग के दौरान कम से कम 40 दिनों तक सम्भोग क्रिया से दूर रहें।

मासिक धर्म में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय प्रयोग एवं उपचार विधि:

मासिक धर्म में घृतकुमारी या एलोवेरा के 10 ग्राम गूदे पर 500 मिलीग्राम पलाश का क्षार बुरक कर दिन में दो बार सेवन करने से मासिक धर्म शुद्ध होने लगता हैं।

कमर के दर्द या स्लिप डिस्क में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय प्रयोग एवं उपचार विधि:

कमर के दर्द या स्लिप डिस्क हो जाने पे भी घृतकुमारी या एलोवेरा के के गुदे को खाए या उसकी रोटी बना कर या फिर लड्डू बना कर खाए तो कमर के दर्द या स्लिप डिस्क की किसी भी समस्या से निजात मिलता हैं।

श्वेत प्रदर (लिकोरिया या सफ़ेद पानी) में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय प्रयोग एवं उपचार विधि:

श्वेत प्रदर (लिकोरिया या सफ़ेद पानी) घृतकुमारी या एलोवेरा को गुड़ या मिश्री के साथ प्रतिदिन खाली पेट लेने से स्वेत प्रदर या लिकोरिया या सफ़ेद पानी का मर्ज ठीक हो जाता है यदि स्वेत प्रदर या लिकोरिया का मर्ज पुराना है तो बीच बीच में अंतराल के बाद इसका सेवन लगातार करना चाहिए।

मधुमेह या डाइबिटीज में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय प्रयोग एवं उपचार विधि:

मधुमेह या डाइबिटीज में घीक्वार Gheekawar (धिउकुआर) का 5 ग्राम गूदा 250 से 500 मिलीग्राम गुडुची सत्व (गिलोय का रस) के साथ स्तेमाल से मधुमेह में अत्यंत लाभकारी परिणाम होते हैं।  बथुए का उबला पानी, घृतकुमारी (ग्वारपाठे) के गूदे का रस समान मात्रा में लेकर भोजन से पहले आधा आधा कप पीने से मधुमेह से पैदा हुए विकार ठीक हो जाते हैं।

एलोवेरा रक्त शर्करा के स्तर को कम करने के लिए जाना जाता है, घृतकुमारी में ग्लूकोमान्स मौजूद हैं जो रक्त शर्करा के स्तर को कम कर देता है, जिससे मधुमेह के रोगी को लाभ होता है।

मुहासे (स्कार्स) में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय प्रयोग एवं उपचार विधि:

मुहासे (स्कार्स) होने पर एलोवेरा या घृतकुमारी जेल (गूदा) मूहासे पर लगाने से मुहांसे में शीघ्र ही ठीक हो जाते है, साथ साथ चहरे पर निखार आता है।

चहरे पर झाइयां में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय प्रयोग एवं उपचार विधि:

चहरे पर झाइयां या झुर्रियां में घृतकुमारी या ग्वार पाठा का जेल लगाने से चहरे पर पडी झाइयां समाप्त हो जाती हैं तथा फेस सुन्दर एवं आकर्षक हो जाता है।

गठिया में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय प्रयोग एवं उपचार विधि:

गंठिया रोग से परेशान मरीज को घृतकुमारी या ग्वारपाठा को कोमल गूदा नियमित रूप से 10 ग्राम की मात्रा में प्रातः एवं सांय खाने से गठिया से निजात मिल जाती है।

कैंसर में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय प्रयोग तथा उपचार विधि:

घृतकुमारी या एलोवेरा के रस का सेवन सभी प्रकार के कैंसर को ख़त्म करने में हमारे शरीर को मदद करता हैं।
घृतकुमारी अथवा ग्वार पाठा में जितने भी विटामिन्स हैं सब जल में घुलनशील होते हैं, जो आसानी से शरीर के द्वारा अबशोषित कर लेते है तथा हमारे शरीर के कैंसर के उपचार में सहयोगी होते हैं।

खूनी बवासीर में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय प्रयोग और उपचार विधि:

खूनी बवासीर से परेशान रोगी को मस्से में घृतकुमारी या एलोवेरा के 50 ग्राम गूदे में 2 ग्राम पिसा हुआ गेरू मिलकार इसकी टिकिया बनाकर, रुई के फोहे पर फैलाकर गुदा स्थान पर रखकर लंगोट की तरह पट्टी बाँध देनी चाहिये। इससे मस्सों में होने वाली जलन तथा दर्द का शमन होता हैं। एवं मस्से सिकुड़ कर दब जाते हैं। यह प्रयोग अर्शांकुर (अर्श+अंकुर), रक्तार्श (रक्त+अर्श) रोग में अत्यंत लाभदायक हैं।

तनाव में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय प्रयोग और उपचार विधि:

तनाव से ग्रसित लोगों के लिए घृतकुमारी या एलोवेरा रस रामवाण सावित हो सकता है। एलोवेरा का रस न केवल मानसिक तनाव से राहत देता है बल्कि शारीरिक तनाव से निपटने में भी मदद कर सकता है।

रक्त प्रवाह में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय प्रयोग और उपचार विधि:

रक्त प्रवाह में सुधार: घृतकुमारी या एलोवेरा आपके केशिकालों के आकार को बढ़ाने में मदद कर सकता है, जिससे आपके शरीर में रक्त परिसंचरण (हृदय, रक्त एवं रक्त वाहिनियां) में सुधार हो सकता है।

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त्वचा सुंदरता में घृतकुमारी या एलोवेरा के चिकित्सीय प्रयोग एवं सेवन विधि:

चहेरे पर घृतकुमारी या एलोवेरा जेल या गूदे के लगाने से चहेरे पर आकर्षक चमक आती है और चहेरा खिल उठता है। इसे त्वचा पर लगाने से धूप से हुई जलन (Sun Burn) और कालिमा में राहत मिलती है।

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बाल झड़ना (गंजापन) में घृतकुमारी या एलोवेरा के चिकित्सीय प्रयोग एवं सेवन विधि:

बल झड़ने या गंजेपन की स्थिति में घृतकुमारी या एलोवेरा जिसमें नारंगी और कुछ लाल रंग के पुष्प लगते है,  घृतकुमारी  के गूदे को स्प्रिट (Spirit) में गलाकर सिर में लेप करने से बाल काले हो जाते हैं। इससे बाल का झड़ना बंद हो जाता है तथा गंजे सिर पर लगाने से बाल उग आते हैं।

सूजन में घृतकुमारी या एलोवेरा के चिकित्सीय प्रयोग एवं सेवन विधि:

घृतकुमारी या एलोवेरा के प्रतिदिन सेवन से शरीर के किसी भाग की सूजन जल्द से जल्द ठीक होती हैं। घृतकुमारी के सेवन हमारे शरीर के प्रतिरोधक क्षमता को बढाता हैं।

खून कमी में में घृतकुमारी या एलोवेरा के चिकित्सीय प्रयोग एवं सेवन विधि:

रक्त की कमी के आभाव में जिन माताओं, बहनों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हो उनको खून की कमी को पूरा करने के लिए घृतकुमारी, एलोवेरा का सेवन अवश्य करना चाहिए। इसके लिए एलोवेरा के रस में गेहूं के जवारा का मिश्रण बनाकर प्रतिदिन सुबह प्रयोग करें इससे हिमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता हैं और खून की कमीपूर्ण होती है।

हार्मोन्स में घृतकुमारी या एलोवेरा के चिकित्सीय प्रयोग एवं सेवन विधि:

हार्मोन्स की कमी से महिलाओं में मासिक धर्म में अनेक प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ता है। किसी को स्त्राव ज्यादा होता हैं, माहवारी (Period) किसी को कम,किसी को देरी से आती हैं, दर्द भी होता ऐसे इस प्रकार अनेक समस्याओं से घृतकुमारी या एलोवेरा के रस सेवन से निजात मिलती है। घृतकुमारी के सेवन से तन तंदुरुस्त होता है एवं हार्मोनल सम्बन्धी समस्या में भी आराम मिलता है। एलोवेरा के रस या गुदे का प्रयोग करने से महिलाओं को मासिक धर्म में होने वाली परेशानी से छुटकारा मिलत हैं तथा मासिक धर्म सामान्य  हो जाता हैं।

अल्सर या आंत में घृतकुमारी या एलोवेरा के चिकित्सीय प्रयोग और सेवन विधि:

अल्सर या आंत सम्बन्धी समस्या में घृतकुमारी या एलोवेरा का सेवन आँतों के संक्रमण को नष्ट कर आराम दिलाती हैं। घृतकुमारीके निरंतर सेवन करने से अल्सर में बहुत आराम मिलता है तथा इसका कोई साइड इफ़ेक्ट भी नहीं होता हैं।

बच्चों की  कब्ज में घृतकुमारी या एलोवेरा के चिकित्सीय प्रयोग एवं सेवन विधि:

छोटे बच्चो को टट्टी या पोटी करने में परेशानी हो रही हो या  बहुत तकलीफ से हो रहा हो तो ऐसे में घृतकुमारी के रस में थोड़ी सी हींग गर्म करके बच्चे के नाभि के आस पास लगाने से संडास आराम से हो जाता हैं।

पुरानी कब्ज में घृतकुमारी या एलोवेरा के चिकित्सीय प्रयोग एवं सेवन विधि:

कैसा भी पुराना कब्ज हो घृतकुमारी का जूस प्रतिदिन नियमित रूप के स्तेमाल से लाभ होता हैं। अरंडी के तेल में में घृतकुमारी का जूस मिला कर खाने से या पीने से पुराना से पुराना कब्ज ठीक हो जाता हैं।

आर्थराइटिस में घृतकुमारी या एलोवेरा के चिकित्सीय प्रयोग एवं सेवन विधि:

आर्थराइटिस की समस्या से छुटकारा पाने के लिए एलोवेरा का उपयोग कर सकते हैं। घृतकुमारी के स्वरस के उपयोग से किसी भी प्रकार के समस्या में आराम मिल जाता हैं।आर्थराइटिस में घृतकुमारी के रस का लड्डू  बनाकर सेवन करने से भी आराम मिलता है।

कान के दर्द में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय उपयोग एवं सेवन विधि:

कान के दर्द में अधिक पीड़ा होने पर घृतकुमारी के रस को गर्म कर जिस कान में दर्द हो, उससे दूसरी तरफ के कान में दो-दो बून्द टपकाने से कान के दर्द में आराम मिलता है। एवं कान के दर्द का शीघ्र ही समाप्त हो जाता है।

मूत्र रोग में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय उपयोग एवं सेवन विधि:

घृतकुमारी के ताजे 5-10 ग्राम गूदे में शक्कर मिलाकर खाने से मूत्ररोग एवं गर्मी मिटती है। प्रोस्टेट ग्रैंड बढ़ जाने से अथवा यूरिन इन्फेक्शन या किसी अन्य कारण से बार बार मूत्र करने की इच्छा होती रहती है। मूत्र विकार की समस्या से बचने के लिए घृतकुमारी और गुड एवं भुने हुए काले तिल के का लड्डू बनाकर सेवन करने से मोटर रोग में अवश्य आराम मिलता है।

नेत्र रोग में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय उपयोग एवं सेवन विधि:

घृतकुमारी का गूदा आँखों में लगाने से लाली मिटती है, गर्मी दूर होती हैं। आँखों की जलन में तुरंत लाभ होता है तथा वायरल कंजक्टिवाइटिस में लाभ होता है।

दाद, खाज, खुजली में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय उपयोग एवं सेवन विधि:

खुजली, दाद, खाज से परेशान रोगी एलोवेरा का इस्तेमाल कर सकते हैं। घृतकुमारी उपयोग में एलोवेरा का रस निकाल ले उसमे नारियल तेल, कपूर और गेरु मिलाकर मिश्रण तैयार कर ले और रोज सुबह सुबह सम्पूर्ण शरीर में लगाकर कुछ देर रहने दे फिर पानी से साफ़ करें या स्नान करने से शरीर की खुजली से बहुत आराम मिलता है, घृतकुमारी उपयोग चित्त पित्त में भी आराम दिलाता है।

कोलेस्ट्रॉल एवं वजन घटाने में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय उपयोग एवं सेवन विधि:

वजन और कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए घृतकुमारी के जूस 5-10 ग्राम नियमित रूप से पीने से वजन और कोलेस्ट्रॉल कम होता है। एलोवेरा के निरंतर सेवन से शरीर निरोग रहता है।

आकर्षक केश में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय उपयोग एवं सेवन विधि:

घृतकुमारी का जेल बालों में लगाकर कुछ देर रखें और फिर पानी से अच्छी तरह से धो ले। आपके बाल रेशम जैसे मुलायम हो जाएँगे। घृतकुमारी या एलोवेरा के द्रब्य उपयोग से बालों में डॅंडरफ या रूशी समाप्त होती है। घृतकुमारी का रस बालों में नियमित इस्तेमाल करने से आकर्षक केश एवं घने होते है और बालों का झड़ना बंद हो जाता है।

कटने जलने में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय उपयोग एवं सेवन विधि:

घृतकुमारी के गूदे को अग्नि से जले हुये स्थान पर लेप करने से दाह शांत हो जाती है, तथा फफोले नहीं उठते हैं। एलोवेरा के गूदे का लेप जलन एवं कटने की जगह लगाने से ठंडक पहुंचाकर रोगी को आराम दिलता है।

पेट की गैस या वायु गोला में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय उपयोग एवं सेवन विधि:

घी कुँवार का गूदा निकालकर बराबर मात्रा में घी मिलाकर (60-60 ग्राम दोनों) उसमें हरड़ (हरीतकी) का चूर्ण तथा सेंधा नमक (लवण) 10-10 ग्राम की मात्रा में मिलाकर भली भाँती घोंट लेते हैं। इसको 10-15 ग्राम की मात्रा प्रातः एवं सांय गुनगुने पानी के साथ प्रयोग करने सेवन करने से पेट की गैस या वायु गोला सम्बन्धी विकार एवं वातज गुल्म आदि उदर तथा वातजन्य विकारों में लाभ होता हैं।

लीवर (liver) दुर्बलता में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय उपयोग एवं सेवन विधि:

घृतकुमारी कुमारी के पत्तों का रस दो भाग तथा मधु 1 भाग दोनों द्रव्यों को चीनी मिटटी के पात्र में मुंह बंद कर 1 सप्ताह तक धूप में रखें। तत्पश्चात इसको छान लेते हैं। यह औषधि योग 10-20 ग्राम की मात्रा में प्रातः-सांय सेवन करने से यकृत विकरों में अच्छा लाभ करता हैं। इसकी अधिक मात्रा विरेचक है, परन्तु उचित मात्रा में करने से मल एवं वात की प्रवृत्ति ठीक होने लगती है, यकृत (लीवर) की दुर्बलता सबल हो जाती हैं तथा उसकी क्रिया सामान्य हो जाती हैं।

तिल्ली (Spleen) में घृतकुमारी या एलोवेरा के औषधीय उपयोग एवं सेवन विधि:

घृतकुमारी या घी कुंवार के गूदे पर सुहागा बुरक कर खिलाने से तिल्ली कट जाती हैं। घृतकुमारी या एलोवेरा का सेवन तिल्ली से जुडी सभी समस्याओं का निवारण करता है।

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