घाव/चोट की घरेलू दवा एवं औषधीय उपचार विधि-Wound/Injury Home Treatment in Hindi.

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घाव/जख्म/चोट: (Wound/Injury) एक चोट है, जो त्वचा में एक ब्रेक के कारण से उभरता है। जो पास के ऊतकों को भी नुकसान पहुँचता है। गंभीर घाव उसे कहते हैं, जो 6-7 सप्ताह में पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाते और गहरे अल्सर, अल्सर पाचन तंत्र के अस्तर पर घावों को कहा जाता है। खुले घाव, बड़े घाव, जलन और संक्रमित हो सकते हैं। खराब रक्त- की वृद्धि या कम ऑक्सीजन रक्तचाप, या रुका हुआ या संकुचित रक्त वाहिकाओं के कारण हो सकता है। ऑक्सीजन की आपूर्ति की कमी से रक्त, हृदय, गुर्दा और फेफड़ों के रोग भी ऊतकों को बढ़ावा देते हैं। संक्रमण तब होता है जब बैक्टीरिया आपके घाव में पड़ जाते हैं जो आपके घावों में बैक्टीरिया ला सकते हैं जो मधुमेह जैसे रोग संक्रमण को बढ़ावा देते हैं। लेकिन चिंता करने कोई बात नहीं है इसका इलाज कुछ सरल घरेलू दवा एवं औषधीय उपचार से किया जा सकता है।

आयुर्वेदिक औषधिजड़ी-बूटी इलाज

तुलसी के पत्ते से घाव का उपचार: घाव से शीघ्र छुटकारा पाने के लिए तुलसी के 10-20 ग्राम पत्तों को उबाउलकर हल्का गर्म-गर्म ही घाव को धोने से घाव भर जाता है। इसके अलावा तुलसी के पत्तों का रस घाव भरने में बहुत उपयोगी है।

तिल से घाव का इलाज: तिल को पीसकर पुल्टिस बनाकर घाव पर बाँधने से घाव जल्दी भर जाता है। सभी प्रकार के घावों पर तिल का तेल लगाने से घाव दो-चार दिन में भर जाता है।

तगर से घाव/जख्म का उपचार: पुराने घाव से छुटकारा पाने के लिए तगर का लेप करना चाहिये। इससे घाव जल्दी भर जाता है। दूषित घावों पर तगर के पत्तों का काढ़ा गाढ़ा-गाढ़ा लेप करने से दूषित घाव से बदबू नहीं आती और घाव भर जाता है।

शिरस/शिरीष से घाव का इलाज: घाव/जख्म से निदान पाने के लिए सिरस की छाल के काढ़े से घाव को धोते रहने और पत्रों की राख मरहम के रूप में लगाने से घाव शुद्ध होकर जल्द ही भर जाता है। इसके अलावा सिरस की छाल, रसांजन और हरड़ का चूर्ण छिड़कें या शहद के साथ मिलाकर लेप करने से घाव फौरन लाभ आराम मिलता है।

सेहुड़ से घाव का उपचार: व्रण की समस्या से परेशान व्यक्ति को सेहुंड अर्क, करंज तथा चमेली के पत्तों को गोमूत्र के साथ पीसकर लेप करने से दूषित व्रण, अर्श और नाड़ी व्रण में शीघ्र आराम मिलता है।

सत्यानाशी से घाव का इलाज: घाव जल्दी न भर रहा हो तो सत्यानाशी का दूध लेप करने से पुराने और बिगड़े हुए घाव स्वच्छ हो जाते हैं, और घाव शीघ्र भर जाते है।

शरपुन्खा से घाव का उपचार: व्रण (घाव) में शरपुन्खा की 15-20 ग्राम मूल को जल में पीसकर उसमें 2 चम्मच शहद में मिलाकर घाव पर लेप करने से दुष्ट घाव का रोपण शीघ्र हो जाता है। इसके अलावा शरपुन्खा, काकजंघा, नवजात भैसे का प्रथम मल, लज्जालु इनमें से किसी एक को आवश्यकतानुसार लेकर लेप कर लेने से सदयाक्षत नष्ट होता है।

राई से कीड़े वाले घाव का इलाज: घाव या फोड़े में कीड़े पड़ जाने पर राई के 24 ग्राम चूर्ण में शहद में मिलाकर लेप करने घाव के कीड़े मर जाते हैं।

पिया बासा से घाव का उपचार: घाव में पिया बासा के पत्रों और मूल त्वक को पीसकर, तिल के तेल के साथ पीसकर तथा तेल में दुगना पानी मिलाकर पकायें, जब केवल तेल शेष रह जाये तो उसे छानकर लेप करने से घाव शीघ्र भर जाता है।

पीपल से जीर्ण घाव का इलाज: जीर्ण घाव में पीपल के नरम कोपलों (कोमल पत्तों) को जलाकर कपड़े में छानकर, पुराने बिगड़े हुए घाव पर लेप करने से जीर्ण घावों में लाभ होता है।

पर्णबीज से घाव का उपचार: घाव से पीड़ित व्यक्ति को पर्णबीज के पत्तों को कूटकर हल्का गर्म करके घाव पर बाँधने या लेप करने से घाव शीघ्र भर जाता है। इसके अलावा, घावों के दाग में पर्णबीज के पत्रों को थोड़ा सा गरम करके मसलकर घाव पर बांधने से घाव जल्दी भर जाते हैं. और घाव ठीक होने के बाद में दाग भी नहीं पड़ता।

पवांड़ से घाव का इलाज: अपक्व घावों पर पवांड़ के 6-7 पत्तों की पुल्टिस बनाकर बांधने से घाव शीघ्र पक जाते हैं। इसके अलावा घावों की दुर्गंध में पवांड़ के 8-10 पत्तों को एरंड तेल में भून कर पुल्टिस बनाकर बांधने या लेप करने से घाव की दुर्गन्ध दूर हो जाती है।

पान से घाव का उपचार: घावों के ऊपर पान को बांधने या पान को पानी के साथ पीसकर घाव पर लेप करने से घाव शीघ्र ही भर जाता है।

पलाश से घाव का इलाज: घावों पर पलाश के गोंद को सूखकर गोंद का चूर्ण बनाकर घाव पर बुरकने या पानी में मिलाकर गाढ़ा-गाढ़ा लेप करने से घावों में लाभ होता है।

प्याज से घाव की सूजन का उपचार: व्रणशोथ में नाड़ी शूल या घावों की सूजन में प्याज के कल्क को गर्म करके बांधने से घावों की सूजन में लाभ होता है।

निर्गुन्डी से घाव का इलाज: घाव में निर्गुन्डी के पत्तों से सिद्ध किये हुये तेल को लेप करने से पुराने से पुराना घाव शीघ्र भर जाता है। इसके अलावा दुष्ट घावों में निर्गुन्डी की मूल और पत्तों से सिद्ध किये तेल को लगाने से, दुष्ट घाव, पामा, खुजली, विष्फोटक व सभी प्रकार के घावों में लाभदायक होता है।

नीम से घाव का उपचार: जो फोड़ा हमेशा बहता रहता हो, उस पर नीम छाल की भस्म लगाये। प्रथम नीम पत्तों के काढ़ा से अच्छी प्रकार धोकर फिर छाल की राख उसमें भर देने से 7-8 दिन में घाव में पूर्ण लाभ होता है। इसके अलावा नीम की गिरी को 100 ग्राम तेल में 20 ग्राम मोम डालकर पकायें, जब दोनों अच्छी तरह मिल जाये तो आग से उतार कर 10 ग्राम राल का चूर्ण मिला, अच्छी तरह मिल जाये तो आग से उतार कर 10 ग्राम राल का चूर्ण मिलाकर अच्छी तरह हिलाकर रख लें। यदि घाव में दाह और जलन हो तो उसमें थोड़ा संगजराहत भी मिला दें, यह मलहम, अग्नि से जले हुये और अन्य घावों के लिये लाभदायक है।

नागरमोथा से घाव का इलाज: व्रण (घाव) में नागरमोथा के चूर्ण को लगाने से घाव की वृद्धि नहीं होती है। नागरमोथा की ताज़ी जड़ को घिसकर गाय के घी में मिलाकर घाव पर लेप करने से घाव जल्द ही ठीक हो जाता है।

मुलेठी से घाव का उपचार: घाव के कारण उत्पन्न हुई तीव्र वेदना में रोगी को थोड़ा सी मुलेठी गर्म करके लगाने से घाव शीघ्र भर जाता है।

मौलसिरी से घाव का इलाज: व्रण (घाव) में मौलसिरी की छाल के काढ़े से दूषित घाव और गहरे घेवून को धोने से घाव शीघ्र भर जाता है तथा घाव से निकलने वाले पीव बंद हो जाते हैं।

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लाल मिर्च से घाव का उपचार: घाव में 125 ग्राम सूखी लाल मिर्चों को आधा किलो तिल तेल में पकायें, जब मिर्च काली पड़ जाये तो तेल छानकर शीशी में भर लें, और इस तेल का सेवन करने से घाव शीघ्र भर जाता है।

लाजवंती/छुई-मुई से घाव का इलाज: घाव में लाजवंती वृक्ष की जड़ को पीसकर घाव पर सुबह-शाम लेप करने से घाव शीघ्र भर जाता है। इसके अलावा जटिल घाव में छुई-मुई के पत्तो को कुचलकर रुई का फोहा घाव पर रखने से जटिल घाव में लाभ होता है।

कुटज से घाव का उपचार: व्रण (घाव) में कुटज की छाल के काढ़े से घाव धोने से घाव शीघ्र भर जाता है।

लता करंज से घाव का इलाज: घाव में लता करंज की जड़ के रस से दूषित घावों को धोने से घाव शीघ्र ही भर जाता है। इसके अलावा करंज, थूहर, अर्क, अमलतास और चमेली के पत्तों को समभाग गोमूत्र के साथ पीसकर लेप करने से दद्रु, व्रण, दूषित अर्श और नाड़ी व्रण नष्ट हो जाते हैं।

लता करंज से घाव की सूजन का उपचार: घावों की सूजन में लता करंज के 1-3 ग्राम पत्रों को निर्गुडी के पत्रों के साथ पीसकर घाव पर बांधने से घावों की सूजन कम हो जाती है।

जामुन से घाव का इलाज: वर्ण (घाव) में जामुन की छाल का 4-5 ग्राम महीन चूर्ण घाव पर छिड़कने से घाव शीघ्र भर जाता है। इसके अलावा जूते का घाव पैर में जूता काटने से या तंग जूतों से पाँव में जख्म हो जाये तो जामुन की गुठली को जल के साथ पीसकर लेप करने से जूते का घाव ठीक हो जाता है।

इन्द्रायण से घाव का उपचार: घाव में लाल इन्द्रायण के फल को पीसकर नारियल तेल के साथ गर्म करके घाव के अंदर लगाने से घाव साफ़ होकर शीघ्र भर जाता है।

इमली से घाव का इलाज: व्रण (घाव) में इमली पत्तों के काढ़े से घाव को धोने से बहुत दिनों तक रहने वाला घाव शीघ्र मिट जाता है।

हरड़ से घाव का उपचार: फैले हुये घाव को हरड़ के काढ़े से धोने से घाव सिकुड़ जाता है तथा घाव में होने वाले दर्द और घाव शीघ्र भर जाता है इसके अलावा हरड़ की 1-2 ग्राम भस्म को 5-10 ग्राम मक्खन में मिलाकर घाव पर लेप करने से घाव में लाभ होता है।

हल्दी से घाव का इलाज: हल्दी घाव की रामबाण औषधि है। हल्दी, चुना तथा सरसों का तेल बराबर मात्रा में मिलाकर सुबह-शाम घाव पर लेप करने से घाव शीघ्र भर जाता है।

गुलदाऊदी से घाव का उपचार: व्रण (घाव) में गुलदाऊदी की जड़ को घिसकर गर्म कर पके हुए फोड़े पर लेप करने से उसका मुंह खुल जाता है तथा फोड़ा फुट कर बह जाता है और घाव में शीघ्र आराम मिलता है।

गोरखमुंडी से घाव का इलाज: घाव में गोरखमुंडी के पत्तों को जल में पीसकर लेप करने अथवा पत्र स्वरस का मालिश करने से सभी प्रकार के घाव, उपदंश, पुराने घाव शीघ्र भर जाते हैं।

गूलर दूध से घाव का उपचार: व्रण (घाव) में गूलर के दूध में बावची के बीज भिगोकर, पीसकर 1-2 चम्मच की मात्रा में नियमित रूप लेप करने से सभी प्रकार की पीड़ाएं और घाव नष्ट हो जाते हैं।

गेंदा फूल से घाव का इलाज: घाव में गेंदा फूल के पत्तों को पीसकर फोड़ें-फुंसी और घाव पर लगाने से आराम होता है। इसके अलावा अर्श के मस्सों पर भी आराम होता है।

गंभारी से घाव का उपचार: घाव में गंभारी के कोमल पत्तों को पीसकर घाव पर लेप करने से अंगुली के नख संबंधी कष्ट दूर हो जाते है।

गाजर से घाव का इलाज: घाव में गाजर की पुल्टिस बांधने और घाव के ऊपर लेप करने से घाव शीघ्र ही भर जाता है इसके अलावा गाजर को उबालकर पीस कर लेप करने से पूय युक्त दुर्गन्धित घाव पर बांधने से घाव के कीटाणु मर जाते हैं, और घाव शीघ्र स्वच्छ हो जाते हैं।

अजवायन से घाव का उपचार: घाव या किसी भी प्रकार की चोट पर 50 ग्राम गर्म अजवायन को दोहरे कपड़े की पोटली में डालकर सेंक करने से 1 घंटे में आराम मिलता है। जरूरत हो तो जख्म पर कपड़ा दाल दें ताकि जले नहीं। किसी भी प्रकार की चोट पर अजवायन का सेंक चमत्कारी सिद्ध हुआ है।

अरंडी से घाव का इलाज: नाड़ी व्रण (घाव) में अरंड के कोमल कोंपलों पत्रों को पीसकर घाव पर लेप करने से घाव शीघ्र भर जाता है। गहरा घाव और फोड़ो पर अरंड के पत्तों को पीसकर लेप करने से घाव जल्दी ही भर जाते हैं।

धतूरा से घाव का उपचार: जिस घाव पर गहरा पीब या पीपड़ी जम गये हो उसको गुनगुने पानी की धार से धो कर दिन में 3-4 बार धतूरा के पत्तों की पुल्टिस बांधने से घाव जल्दी भर जाता है।

चित्रक से घाव का इलाज: पूतिवर्ण (घाव) घावों से पीव बहता हो, उनका मुँह बंद करने के लिए चित्रक छाल को जल में पीसकर लेप करने से घाव शीघ्र भर जाता है।

चमेली से घाव का उपचार: घाव-व्रणों शोधन एवं रोपण के लिये, चमेली के पत्रों के काढ़े से घावों को धोना, एवं पत्रों कण एवं पत्रों से सिद्ध तेल को लगाने से घाव में लाभदायक है।

चालमोंगरा से घाव का इलाज: घाव में चालमोंगरा के बीजों को खूब महीन पीसकर उनका बारीक चूर्ण घाव पर लेप करने से रक्तस्राव बंद होकर घाव शीघ्र भर जाता है।

भुई आंवला से घाव का उपचार: घाव में भुई आंवला का दूधिया रस घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाता है इसके अलावा भुई आंवला के कोमल पत्तों को पीसकर घाव पर लगाने से घाव जल्दी भरता है और रगड़ पर लगाने से चोट की पीड़ा शांत हो जाती है।

बरगद से घाव का इलाज: घाव में बरगद की कोपले तथा कोमल पत्तों को पीसकर जल में छान लें, जल में समभाग तिल का तेल सिद्ध कर लें। इस तेल को सुबह-शाम-दोपहर व्रण पर लेप करने से लाभ होता है। इसके अलावा बरगद के दूध में सांप की केंचुली की भस्म मिलाकर उसमे पतले कपड़े या रुई की बत्ती को भिगोकर नाड़ी व्रण में भीतर रखने से 10 दिन में शीघ्र लाभ होता है।

आयापान से घाव का उपचार: घाव में शरीर का कितना भी गहरा घाव लगा हो, लेकिन आयापान के पत्तों को पीसकर लेप करने से तथा पत्र स्वरस 5-10 ग्राम सुबह-शाम पीने से गहरे से गहरा घाव बहुत जल्दी भर जाता है।

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