गर्भाशय के गंभीर रोग के कारण, लक्षण, दवा, इलाज एवं उपचार विधि

Sponsored

गर्भाशय के रोग-आज कल के खान-पान की वजह से महिलाओं को कई तरह के रोगों का समना करना पड़ रहा है और कुछ इतने ज्यादा खतरनाक हो गए है की इनकी वजह से जान जाने तक की संभावना रहती है। गर्भाशय (बच्चेदानी) का Infection भी एक ऐसी ही बीमारी है। इसी वजह से गर्भ धारण करने की क्षमता कम होने लगती है और कई बार इन्फेक्शन (Infection) इतना बढ़ जाता है कि महिलाओं की मृत्यु भी हो जाती है। ये समस्या महिलाओं की प्रजनन क्षमता को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। क्योंकि गर्भधारण करने और बच्चे को जन्म देने में गर्भाशय (बच्चेदानी) की सबसे अहम भूमिका होती है। किसी-किसी महिलाओं में यह समस्या अत्यधिक जटिल होकर शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर देती है। वैसे तो अब महिलाओं के परेशान होने की जरुरत नहीं क्योंकि आधुनिक दवाइयों एवं देशी जड़ी-बूटी उपचार के कई विकल्पों ने दर्द और बच्चे होना, दोनों समस्या को संभव कर दिया है। वैसे तो इस तरह की समस्या में आपको ज्यादातर घरेलू दवा, जड़ी-बूटी तरीको का इस्तेमाल करना चहिये।

आयुर्वेदिक औषधिजड़ी-बूटी इलाज

गर्भाशय (बच्चेदानी) की समस्या के कारण –

1. सही प्रकार खान पान पर ध्यान न देना।

2. ज्यादा-से ज्यादा गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करना।

3. गर्भधारण के समय सावधानी ना बर्तना।

4. गर्भधारण के समय किसी भी मर्ज की दवाई लम्बे समय तक सेवन करना।

5. गर्भधारण के दौरान सेक्स करना।

गर्भाशय के लक्षण –

1. उलटी (वमन) जी मचलना आदि।

2. पीरियड्स (Period) के समय अनियमितता।

3. भूख ना लगना।

4. पेट के निचले (यानि नाभ के नीचे) के हिस्से में दर्द होना।

5. गर्भधारण में समस्या होना।

गर्भाशय रोग में उलटकंबल से उपचार-

गर्भाशय की समस्या से निजात पाने के लिए उलटकंबल की 1 किलों जड़ को जौ कूट कर 4 गुने जल में पकावें, 1 किलों शेष रह जाने पर इसमें 115 ग्राम काली मिर्च का चूर्ण और सवा किलो गुड़ मिलाकर, चीनी मिटटी के पात्र में बंदकर धान की राशि में दबा दें। फिर छानकर बोतलों में भर लें। इसको 10-25 ग्राम तक बराबर जल मिलाकर मासिक धर्म से 1 सप्ताह पहले सेवन करने से गर्भाशय के रोग ठीक हो जाते है। पथ्य-भोजन में केवल दूध भात का प्रयोग करना चहिए।

आनाहवाट (गर्भवती स्त्री को सुख प्राप्त करने) में वचा के लाभ-

गर्भवती स्त्री को प्रसव सुख प्राप्ति करने में वचा के साथ दूध, लहसुन मिलाकर थोड़ा गर्म कर लें, तत्पश्चात उसमें काला नमक तथा हींग मिलाकर सेवन करने से गर्भवती स्त्री को सुख प्राप्त होता है।

गर्भस्थापना की समस्या में उलटकंबल के फायदे-

गर्भस्थापना में उलटकंबल की जड़ की छाल डेढ़ ग्राम पान के डंठल 3-4 नग और काली मिर्च 3 नग, इन्हे ताजे जल के साथ पीसकर 50 ग्राम जल मिलाकर प्रातःकाल खाली पेट सेवन करने से ऋतु धर्म के 7 दिन पूर्व से प्रयोग में लाने से स्त्रियां गर्भधारण कर लेती है।

गर्भाशय के रुधिर जमाव में तिल के लाभ-

गर्भाशय के रुधिर जमाव में 625 मिलीग्राम तिल का चूर्ण दिन में तीन चार बार सेवन करना चाहिए या गर्म जल में स्त्री को बैठना चाहिए। ध्यान दें कि जल स्त्री के कमर तक पहुंचना चाहिए इस तरह 5 मिनट तक बैठाने से स्त्री के गर्भाशय का जमा हुआ खून बिखर जाता है।

गर्भाशय की शुद्धि में तेज पत्ता के फायदे-

गर्भाशय की शुद्धि के लिए स्त्रियों को तेजपात के पत्तों का महीन चूर्ण 1-3 ग्राम तक मात्रा में सुबह-शाम सेवन करना चाहिए इससे गर्भाशय शुद्ध होता है। इसके अलावा प्रसूता को तेजपात के पत्तों का काढ़ा 40-60 मिलीग्राम सुबह-शाम पिलाने से दूषित रक्त तथा मल आदि निकल कर गर्भाशय शुद्ध हो जाता है।

गर्भाशय की पीड़ा में तेज पत्ता के गुण-

गर्भाशय की पीड़ा की समस्या से शीघ्र छुटकारा पाने के लिए महिलाओं को तेजपात का काढ़ा बनाकर काढ़े में बैठ जाने से गर्भाशय की पीड़ा शांत होती है।

गर्भाशय कैंसर में राई (सरसों) के लाभ-

गर्भाशय में कैंसर होने पर सप्ताह में 2-3 बार राई के निवाये जल की पिचकारी द्वारा योनि धोने से गर्भाशय के कैंसर में लाभ होता है। इसके अलावा 25 ग्राम राई को 1 कप ठंडे जल में भिगोकर लुआब बना लें फिर 750 ग्राम निवाये जल में मिलाकर प्रयोग करने से स्त्रियों के गर्भाशय के कैंसर में लाभ होता है।

गर्भाशय की पीड़ा में राई (सरसों) के गुण-

गर्भाशय के सभी प्रकार की पीड़ा में अति तीव्र वेदना में नाभि के नीचे या कमर पर राई में भीगे प्लास्टर बार-बार बाँधने पर गर्भाशय की पीड़ा शांत होती है।

गर्भाशय विकार में पुनर्नवा के फायदे-

गर्भाशय विकार में अनार्तव में पुनर्नवा की जड़ को कपास की जड़ के साथ पीसकर काढ़ा बनाकर प्रयोग करने से गर्भाशय विकार दूर होता है।

गर्भधारण की समस्या में पिया बासा से उपचार-

गर्भाधारण की समस्या में पिया बासा की 10 ग्राम जड़ों को पीसकर गाय के दूध के साथ स्त्री पुरुष दोनों को तीन दिन तक पिलाने से सहवास (सेक्स) करने से स्त्री गर्भ धारण कर लेती हैं।

गर्भधारण की समस्या में पिप्पली के गुण-

गर्भधारण में पिप्पली औषधि अत्यंत गुणकारी है। गर्भधारण में पिप्पली, सौंठ, मरीच और नागकेशर समभाग मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को गाय के देशी घी में मिलाकर दूध के साथ एक माह तक नियमित सेवन करने से स्त्री गर्भधारण कर लेती है।

गर्भाशय की पीड़ा में पिप्पली लाभकारी-

गर्भाशय की पीड़ा से छुटकारा पाने के लिए स्त्रियों को पिप्पली, सौंठ, मरीच और नागकेशर समभाग मिलाकर चूर्ण बना लें, इस चूर्ण को गाय के देशी घी में मिलाकर दूध के साथ एक सप्ताह तक नियमित रूप प्रयोग करने गर्भाशय की पीड़ा शांत होती है।

गर्भाशय की सूजन में पिप्पली के लाभ-

गर्भाशय की सूजन समस्या में पिप्पली, सौंठ, मरीच और नागकेशर समभाग मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को गाय के देशी घी में मिलाकर दूध के साथ रात्रि में सोने से पहले दो तीन माह तक सुबह-शाम सेवन करने से गर्भाशय की सूजन में लाभ होता है।

गर्भनिरोधक में पलाश के फायदे-

Sponsored

गर्भनिरोधक की रामबाण दवा पलाश/ढाक है। इसके बीज 10 ग्राम, मधु 20 ग्राम और गाय के घी 10 ग्राम इन सबको घोटकर इसमें रुई को भिगोकर बाती बनाकर स्त्री प्रसंग से तीन घंटे पहले योनि में धारण करने से गर्भधारण नहीं होने पाता। इसके अलावा पलाश के बीजों को जलाकर इनमें आधी मात्रा में हींग मिलाकर चूर्ण बनाकर 2 से 3 ग्राम तक की मात्रा में मासिक धर्म के समय, ऋतुस्राव प्रारम्भ होते ही और उसके कुछ दिन बाद तक प्रयोग करने से स्त्री की गर्भधारण शक्ति नष्ट हो जाती है।

गर्भ निरोध में नीम के गुण-

नीम के शुद्ध तेल में रुई का फोहा तर करके सेक्स करने से पहले योनि के भीतर रखने से शुक्राणु 1 घंटे के भीतर ही मर जाते है और गर्भ स्थापित नहीं होता। इसके अलावा 10 ग्राम नीम के गोंद को 250 ग्राम पानी में गलाकर कपड़े में छान लें, उसमें 1 हाथ लम्बा और एक हाथ चौड़ा साफ़ मलमल का कपड़ा भिगोकर छाया में सूखा ले, सूखने पर रूपये बराबर गोल-गोल टुकड़े काटकर साफ़ शीशी में भर लें, सेक्स करने से पहले एक टुकड़ा अंदर सांठ लें, इससे गर्भ नहीं ठहरता एक घंटे बाद उस कपड़े को निकालकर फेंक देना चाहिए।

गर्भशोष में मुलेठी के लाभ-

गर्भशोष में गर्भस्थ शिशु सूखता जा रहा हो तो ऐसी अवस्था में गंभारी फल, मुलेठी एवं मिश्री समभाग 15-20 ग्राम मात्रा को प्रातः सांय दूध में उबालकर नियमित गर्भवती महिला को पिलाने से गर्भशोष में लाभ होता है।

महिलाओं के गर्भधारण में मौलसिरी फायदेमंद-

गर्भाशय शुद्धि में जिन स्त्रियों के गर्भ न रहता हो तो उन स्त्रियों को मौलसिरी की छाल के 5-10 ग्राम चूर्ण या 10-20 ग्राम काढ़ा का सेवन कराने से कुछ ही दिनों में उनका गर्भाशय शुद्ध होकर स्त्री गर्भ धारण कर लेती हैं।

गर्भाशय के पानी में मौलसिरी के गुण-

गर्भाशय के पानी में मौलसिरी की छाल के 5-10 ग्राम चूर्ण में समान भाग खंड में मिलाकर स्त्री को खिलाने से गर्भाशय से पानी निकलना बंद हो जाता है।

गर्भकाल की उल्टी में लौंग के फायदे-

गर्भकाल में महिलाओं को अक्सर तर उल्टी होती है उस समय महिलाओं को 1 ग्राम लौंग चूर्ण को मिश्री की चाशनी व अनार के रस में मिलाकर चाटने से गर्भवती स्त्री को उल्टी आना बंद होती है। इसके अलावा लौंग का फाँट पिलाने से गर्भवती की वमन बंद हो जाती है।

गर्भधारण में कटेरी लाभ-

गर्भधारण में सफेद कटेरी की जड़ को पुष्य नक्षत्र के दिन लाकर कन्या के हाथ से पिसवा के गौ के दूध के साथ संतान की इच्छा रखने वाली स्त्री को ऋतु स्नान के उपरान्त पिलाने से वो गर्भ धारण कर लेती है।

गर्भपात में कटेरी के उपयोग-

गर्भपात में बड़ी कटेरी की 10-20 ग्राम जड़ों को 5-10 ग्राम छोटी पीपल के साथ भैंस के दूध में पीस छानकर कुछ दिन तक नित्य दो तीन बार पिलाते रहने से गर्भपात का भय नहीं रहता और स्वस्थ शिशु उत्पन्न होता है।

गर्भाशय की सूजन में जीरा के फायदे-

गर्भाशय की सूजन में काले जीरे के काढ़ा में स्त्री को बैठाने से लाभ होता है। इसके अलावा काला जीरा के स्थान पर सफेद जीरा भी उपयोग में लाया जा सकता है।

गर्भधारण में इन्द्रायण के उपाय-

गर्भधारण में बेल पत्रों के साथ इन्द्रायण की जड़ो को पीसकर 15-20 ग्राम की मात्रा नियमित सुबह-शाम पिलाने से स्त्री गर्भ धारण करती हैं। इसके अलावा इन्द्रायण की जड़ों को पीस कर प्रसूता स्त्री के बढ़े हुए पेट पर लेप करने से पेट आसानी से अपनी जगह पर आ जाता है।

गर्भधारण में गुड़हल फूल के गुण-

गुड़हल की जड़ को गाय के दूध में पीसकर उसमें बिजौरा नींबू के बीज का महीन चूर्ण मिलाकर, मासिक धर्म के समय पिलाने से गर्भधारण होता है। इसके अलावा गुड़हल का मूल और फूलों का 30-40 मिलीलीटर काढ़ा प्रातः काल पिलाते रहने से गर्भ स्थित और बालक का विकास होता है।

गर्भधारण में गोरखमुंडी के लाभ-

गर्भधारणार में जायफल के 1 ग्राम चूर्ण के साथ गोरखमुंडी का 2 ग्राम चूर्ण मिलाकर 3 ग्राम लगभग चूर्ण बकरी के दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से स्त्री गर्भधारण करती हैं।

गर्भस्थापना में गूलर फल के फायदे-

गर्भस्थापना के बाद गर्भ के अस्थाई हो जाने पर गूलर के कच्चे फलों से सिद्ध किए हुए गाय के दूध से भोजन करना चाहिए। जिससे गर्भ की वृद्धि होकर गर्भपात होने की संभावना भी समाप्त हो जाती है।

गर्भपात में गोखरू के फायदे-

गर्भाशय शूल (गर्भपात) के पश्चात होने वाले दर्द में गोखरू फल 5 ग्राम, काली किशमिश 5 ग्राम और दो ग्राम मुलेठी इन सब को एक साथ पीसकर सुबह-शाम सेवन करने से गर्भपात में लाभ होता है।

गर्भाशय की रक्षा में गंभारी के गुण-

गर्भरक्षार्थ में गंभारी फल और मुलेठी के समभाग चूर्ण में दोनों के बराबर मिश्री मिलाकर 3 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से गर्भावस्था में बालक की रक्षा होती है।

गर्भाशय की शुद्धि में गाजर लाभ-

गर्भाशय शुद्ध में जंगली गाजर को कद्दूकस करके इसके रस में कपड़े को तर करके योनि में धारण करने या योनि में पिचकारी देने से गर्भाशय शुद्ध हो जाता है।

गर्भाशय की समस्याओं से निजात पाने के लिए संतुलित आहार खाएं – Eat healthy food in Hindi

अच्छे भोजन का सेवन कर आप अपने गर्भाशय को स्वस्थ रख सकती हैं। आप अपने आहार में क्या-क्या शामिल कर सकती है, जो आपको और आपके गर्भाशय को स्वस्थ रखने में फायदेमंद साबित रख सकता है।

कई तरह के संतुलित आहार आपके गर्भाशय को स्वस्थ रखने और प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में लाभकारी हो सकते हैं जैसे- गूलर फल, उलटकंबल, वचा, तिल, तेज पत्ता, राई (सरसों), पुनर्नवा, पिया                   बासा, पिप्पली, पलाश, नीम, मुलेठी, मौलसिरी, लौंग, कटेरी, इन्द्रायण, जीरा, गुड़हल फूल, गोरखमुंडी,

गर्भाशय की पीड़ा में खुरासानी अजवायन से उपचार-

गर्भाशय की पीड़ा में खुरासानी अजवायन के स्वरस को फोहा में लेप करके इसकी बत्ती बनाकर योनि में धारण करने से गर्भाशय की पीड़ा शांत होती है।

गर्भज अन्न द्वेष में इलायची के गुण-

गर्भज अंत्र द्वेष में इलायची के बीजों के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर 3 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से गर्भवती स्त्री को भूख खुलकर लगती है।

गर्भाशय में गन्ना का जूस लाभकारी-

गर्भाशय के अत्याधिक रक्तस्राव में गन्ना रस में भीगी पट्टी योनि मार्ग पर धारण करने से गर्भशाय में लाभ होता है।

Search Link: garbhashay ke rog, garbhashay me infection ke lakshan, garbhashay problem in hindi, garbhashay me sujan in hindi, bachedani me infection ke lakshan, garbhashay image, uterus ki sujan, bachedani me infection in hindi, uterus me infection ke lakshan in hindi.

Sponsored

Reply

Don`t copy text!