गाजर के फायदे और नुकसान एवं औषधीय गुण

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गाजर की दवा:- कैंसर, मधुमेह, कोलेस्ट्रोल, वजन, त्वचा, रक्त शुद्धि, पाचन शक्ति, मासिक धर्म, बवासीर, गर्भाशय की शुद्धि, प्रसव कष्ट, खांसी, सूजन, पेट दर्द, दस्त, नेत्र रोग, अधकपारी, हृदय रोग, जलोदर, पित्ती शोथ, कटे-जले, घाव कुंजारोग आदि बिमारियों के इलाज में गाजर के औषधीय चिकित्सा प्रयोग निम्नलिखित प्रकार से किये जाते है:-Gajar Benefits And Side Effects In Hindi.गाजर के फायदे और नुकसान एवं सेवन विधि:

Table of Contents

गाजर में पाये जाने वाले पोषक तत्व:

गाजर में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, रेशे, खनिज तत्व, कैल्शियम फास्फोरस, लौहा इत्यादि पाये जाते हैं। गाजर में विटामिन ए, बी, सी तथा विटामिन बी समूह के थायमिन, रीबोफ्लॉविन तथा निकोटीनिक अम्ल पाये जाते हैं। गाजर के बीजों में एक उड़नशील तेल पाया जाता हैं। यह शरीर के लिए पौष्टिक सावित हुई है।

आयुर्वेदिक औषधिजड़ी-बूटी इलाज

 कैंसर रोग में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

कैंसर में गाजर के जूस का सेवन करना चाहिए क्योंकि गाजर में पाये पोषक तत्व फायटोनुट्रिएंट्स जो कि कैंसर को बढ़ावा देने वाले कीटाणुओं को नष्ट करते हैं तथा उनको कैंसर बढ़ाने से बाधित करते हैं, तथा गाजर के जूस में कैरोटिनॉइड और एंटीऑक्सीडेंट पोषक तत्व से भरपूर होने के कारण हमारे शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। अथवा हमारे शरीर की इम्युनिटी को शक्ति प्रदान करती है।

मधुमेह में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

मधुमेह के रोगियों के लिए यह एक स्वस्थ विकल्प के रुप में है। इसके अलावा गाजर में निहित कैरोटेनॉयड्स रक्त-शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने में सक्षम हैं। तथा इन्सुलिन प्रतिरोध को भी प्रभावित कर मधुमेह रोगियों को मधुमेह से लड़ने में गाजर शक्तिशाली सावित हुई है।

रक्त शुद्धि में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

रक्त शुद्धि में निरंतर रूप से गाजर का स्वरस पीने से आपके शरीर का खून प्राकृतिक रूप से साफ़ होता है। 2 या 3 गाजर नियमित रूप खाएं  और गाजर को मिक्सी में जूस बनाकर सेवन करें, आप इस रस के स्वाद को और भी ज़्यादा बढ़ाने के लिए इसमें थोड़ा सा मधु भी डाल सकते हैं। अगर आप रोजाना गाजर का रस नहीं पी सकते तो हफ्ते में कम से कम एक बार इसके रस का सेवन करें, आप के शरीर का रक्त हमेशा साफ रहेगा।

पाचन शक्ति में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

पचन शक्ति में गाजर का प्रयोग करने से आप की हाज़मे की समस्या को पूरी तरह ख़त्म कर देती हैं। गाजर खाने के फायदे गाजर में फाइबर पोषक तत्व पाये जाते हैं जो आपके पाचन शक्ति को सुचारू रूप से चलाने में मदद करती है, दिन में दो बार लाल रंग के गाजर खाने की कोशिश करें। इसी तरह निरंतर गाजर का सेवन करने से आपके पेट की सभी प्रकार की बीमारियां पूरी तरह नष्ट हो जाएंगी।

कोलेस्ट्रोल में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

कोलेस्ट्रोल में गाजर खाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह आपके शरीर में कोलेस्ट्रोल का स्तर नियंत्रित रखने में काफी मददगार सावित हुआ है। अतः नियमित रूप से रोज़ रात को खाने के बाद तथा सोने से पहले एक गिलास गाजर का रस सेवन करने से आपके कोलेस्ट्रोल को नियंत्रित रखता है।

वजन में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

वजन कम करने में गाजर का जूस काफी लाभदायक है। क्योंकि गाजर में कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है कैलोरी की मात्रा कम होने के कारण यह वजन घटाने वाले लोगों के लिए बहुत लाभकारी है।

त्वचा में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

गर्मियों में गाजर का रस पीने से, त्वचा के लिए एक शक्तिशाली प्राकृतिक सूर्य ब्लॉक के रूप में कार्य करती है। यह त्वचा को मुलायम रखने का काम करती है और मुँहासे, कील, दाग-धब्बे से त्वचा का बचाव करती है। तथा इसके अलावा, गाजर त्वचा को स्वस्थ, चमकदार और जीवंत रखने के लिए भी गुणकारी मानी जाती है।

मासिक धर्म में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

मासिक धर्म में गाजर का काढ़ा सुबह-शाम पीने से गर्भाशय से दूषित पदार्थ निकालकर गर्भाशय शुद्ध हो जाता हैं। एक सप्ताह सेवन करने से मासिक धर्म ठीक प्रकार से होने लगता हैं और मासिक धर्म में होने वाल कष्ट भी नष्ट हो जाता हैं। 20 ग्राम गाजर के बीज, प्याज, सोया, बथुआ, मूली, पालक, मैथी, अजवायन इन सबके बीज 3-3 ग्राम, बैंगन, धमासा, कुटकी, इन्द्रायण, उल्ट कंबल तथा ऊंटकटारा इन सबकी जड़ 3-3 ग्राम तथा बांस की लकड़ी का चूरा तीन ग्राम, इसमें 20 ग्राम गुड़ मिलाकर एक किलोग्राम पानी में काढ़ा बना कर 100 ग्राम शेष रह जाने पर इसकी 3 मात्रा स्त्री को तीन बार पिलाने से कष्टार्तव, मूढगर्भ और गर्भाशय के अंदर अशुद्ध रक्त बाहर निकल कर गर्भाशय शुद्ध हो जाता है।

बवासीर में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

रक्तार्श (बवासीर) खूनी बवासीर में रक्त अगर अधिक गिरता हो तो गाजर का 10-20 ग्राम रस दही की मलाई के साथ पीने से बवासीर में लाभ होता है। बवासीर में अनारदाना या खट्टे अनार के रस तथा दही के साथ पकाया हुआ गाजर का काढ़ा बवासीर में लाभकारी होता है।

गर्भाशय की शुद्धि में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

गर्भाशय शुद्ध में जंगली गाजर को कद्दूकस करके इसके रस में कपड़े को तर करके योनि में धारण करने या योनि में पिचकारी देने से गर्भाशय शुद्ध हो जाता है।

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प्रसव दोष में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

प्रसव के समय कष्ट को कम करने के लिए गाजर के 10 ग्रामं बीज और उसके 100 ग्राम पत्तों का क्वाथ बनाकर स्त्री को पिलाने से प्रसव कष्ट कम होता हैं। योनि में गाजर के बीजों की धुंवा देने से भी कष्ट दूर होता है।

खांसी में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

खांसी में गाजर के स्वरस में मिश्री मिलाकर चटनी बना लें, अब इसमें काली मिर्च बुरककर चटाने से खांसी में लाभ होता हैं। तथा कफ आराम से निकल जाता है।

सूजन में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

सूजन से पीड़ित रोगी को गाजर की सब्जी खिलाने या गाजर का स्वरस पिलाने से सूजन पर लेप करने से सूजन बिखर जाती है।

पेट दर्द में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

पेट दर्द में गाजर को भाप में उबालकर, गाजर का 10 ग्राम रस निकाले अब इसमें 20 ग्राम मधु मिलाकर पीने से छाती की पीड़ा तथा पेट दर्द दूर हो जाती है।

दस्त में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

अतिसार में गाजर का 10-20 ग्राम तक रस आवश्यकतानुसार पीने से लाभ होता हैं:दस्त में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:CLICK HERE

नेत्र रोग में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

नेत्र ज्योति में गाजर 250 ग्राम सौंफ को साफ़ करके कांच के पात्र में रखे, इसमें बादामी रंग की गाजरों के रस की तीन बार झक दें, जब सूख जाये तो 10 ग्राम रोज रात के समय दूध के साथ सेवन करने से नेत्र ज्योति में वृद्धि होती हैं।

अधकपारी में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

आधाशीशी (अधउका) में गाजर के पत्तों को घी से चुपड़कर गर्म करके उसका रस निकालकर 2-3 बूँद नाक और कान में डालने से छीकें आकर आधाशीशी का दर्द ठीक हो जाता है

हृदय रोगमें गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

हृदय रोग में 5-6 गाजर को अंगारों में पकाये या कच्ची ही छीलकर रात भर बाहर ओस में रखी रहने दें। प्रातः काल केवड़ा या गुलाब अर्क तथा मिश्री मिलाकर सेवन करने से हृदय की धड़कन सामान्य हो जाती हैं। गाजर को कद्दूकस कर दूध में उबालें, जब गाजर गल जाये तो खंड मिलाकर खाने से हृदय को शक्ति प्रदान करती हैं। गाजर को साफ़ करके छोटे-छोटे टुकड़े करके मधु मिलाकर जल में उबालें, जब गाजर कुछ नरम हो जायें तो निकालकर कपड़े पर फैलाकर सूखा लें, उसके बाद मधु में उबालकर एकतार चाशनी बनाएँ और बर्तन में रखें, एक किलोग्राम मुरब्बे में 1-2 ग्राम दालचीनी, सौंठ, इलायची, केशर, कस्तूरी तथा जायफल दाल दें। दो माह बाद इस मुरब्बे का सेवन 20-40 ग्राम तक करें, यह दिल की कमजोरी और उन्माद के लिए अति उत्तम हैं।

जलोदर में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

जलोदर में गाजर को साफ़ करके छोटे-छोटे टुकड़े करके मधु मिलाकर जल में उबालें, जब गाजर कुछ नरम हो जायें तो निकालकर कपड़े पर फैलाकर सूखा लें, उसके बाद मधु में उबालकर एकतार चाशनी बनाएँ और बर्तन में रखें, एक किलोग्राम मुरब्बे में 1-2 ग्राम दालचीनी, केशर,सौंठ, इलायची, कस्तूरी तथा जायफल मिला दें। दो माह बाद इस मुरब्बे का सेवन 20-40 ग्राम तक करने से जलोदर में अति उत्तम सावित हुई हैं।

खून की कमी में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

खून की कमी में गाजर को कद्दूकस कर दूध में उबालकर खीर की तरह खाने से दिल को ताकत बढ़ती हैं, तथा खून की कमी को दूर करती हैं।

पित्तशोथ में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

पित्तशोथ में गाजर की पुल्टिस में नमक डालकर बांधने या लेप करने से पित्त शोथ बिखर जाती हैं। तथा पित्त को आराम मिलता है।

कटे-जले में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

दग्ध (कटे-जले) में गाजर को उबालकर, पीसकर जले हुए स्थान पर लेप करने से कष्ट दूर होता है तथा सफ़ेद सा दाग नहीं पड़ने देता।

घाव में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

घाव में गाजर की पुल्टिस बांधने और घाव के ऊपर लेप करने से घाव शीघ्र ही भर जाता है। गाजर को उबालकर पीस कर लेप करने से पूय युक्त दुर्गन्धित घाव पर बांधने से घाव के कीटाणु मर जाते है, और घाव शीघ्र स्वच्छ हो जाते हैं।

कुंजारोग में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:

कुंजारोग में गाजर के महीन छिलकों को पीसकर आँखों में अंजन करने से कुंजा रोग शीग्र नष्ट हो जाता हैं।

गाजर का अचार खाने से अनेक फायदे

गाजर का अचार बहुत ही स्वादिष्ट और हमारे शरीर के लिए लाभदायक होता है। यह हमारे शरीर को शक्ति शाली बनाने में मदद करता है। तथा सभी प्रकार के रोगों से लड़ने की क्षमता रखता है, और हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करती है। गाजर का अचार खाने से किसी भी प्रकार की बीमारी से हमे डर नहीं रहती। गाजर का सिरका युक्त अचार यकृत और प्लीहा वृद्धि को नष्ट करता हैं। अगर कुछ हानि करे तो प्रयोग बंद कर दें।

गाजर पौधे का परिचय

गाजर के पौधे से सभी भारतीय परिचित हैं। गाजर की केवल तरकारी ही नहीं, इससे अनेक व्यंजन बनाये जाते हैं, गाजर का हलवा, गाजर का अचार, मुरब्बा पाक आदि। गाजर वंयज और कृषिजन्य दो प्रकार की होती हैं। रंग भेद से भी यह लाल, पीली, काली, आदि अनेक तरह की होती हैं।

गाजर के बाह्य-स्वरूप

गाजर का क्षुप अनेक शाखा युक्त, एक से चार फुट ऊंचा होता हैं। पत्ते-पक्षवत अनेक भागों में विभक्त, फल 1/8 लम्बे एवं रोमश, मूल 2-12 इंच लम्बा एवं मांसल, गाजर के अनेक प्रकार के रंग व आकार होते हैं।

गाजर के औषधीय गुण-धर्म

तीक्ष्ण, मधुर, कड़वी, गर्म, अग्निदीपन करने वाली, हल्की ग्राही और रक्तपित्त, बवासीर, संग्रहणी, कफ तथा वातनाशक हैं। राजनिघण्टु के मत में गाजर मीठी, रुचिकारक, किंचित चरपरी, अफारा दूर करने वाली कृमिघ्न तथा दाह-शूल पित्त और तृषा शामक हैं।
जंगली गाजर :- चरपरी, उष्ण, कफ, वात नाशक, दीपन, हृदय, रुचिकारक, कुष्ठ, अर्श, शूल, दाह, दमा और हिचकी में लाभदायक है।
बीज :- इसके बीज स्नायु मंडल के लिए पौष्टिक हैं।

गाजर खाने के नुकसान

गाजर का पीला पार्ट बहुत गरम होता है इसे ज्यादा मात्रा मे खाने से छाती मे जलन हो सकती है। तथा दस्त भी हो सकती है।

गाजर में फाइबर की मात्रा अधिक होती है अगर आप गाजर का सेवन अधिक मात्रा मे करते है तो आपको पेट दर्द जैसी समस्या का समना करना पड़ेगा।

इसमें हमने आपको गाजर खाने के फायदे और नुकसान के बारे मे बताया है। नुकसान तब होता है जब आप किसी भी चीज का अधिक मात्रा मे सेवन करते है तो हमें यह नुकसान पहुंचाती है, हम किसी भी चीज का रूरत से ज्यादा सेवन से बचे और अपने स्वास्थ्य को स्वस्थ रखे।

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