फोड़ा-फुंसी के कारण लक्षण घरेलू दवाएं/औषधीय एवं उपचार विधि-Abscess Home Treatment in Hindi.

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फोड़ा-फुंसी के कारण लक्षण घरेलू दवाएं/औषधीय एवं उपचार विधि: त्वचा पर फोड़े-फुंसी होना एक आम समस्या है। फोड़ा-फुंसी कष्दायक व पस से भरा बंद घाव होता है। जो आमतौर पर बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण होता है। बरसात के मौसम में बैक्टीरिया बहुत तेजी से बढ़ने लगते हैं। जिसके कारण फोड़े-फुंसी होने पर लालिमा, सूजन, खुजली और दर्द जैसे लक्षण होने लगते हैं। यदि आपकी त्वचा पर फोड़े-फुंसी हो गए हैं, तो उनको छुएं, दबाएं या नोचे नहीं। अगर फुंसी अपने आप फुटकर उसमे से द्रव बहने लगे तो यह संक्रमण साफ होने की प्रक्रिया हो सकती है। अगर इसका समय से इलाज न किया जाए तो यह नासूर बन जाता है जो आपके लिए घातक साबित हो सकता है।

फोड़ा-फुंसी के संकेत तथा लक्षण: यह आमतौर पर त्वचा में मौजूद जीवाणु जैसे स्टैफीलोकोसी के कारण होता है। जीवाणु संबंधी औपनिवेशीकरण बाल के रोम से शुरू होता है और इसके कारण सामान्य कोशिकाओं का प्रवाह तथा सूजन होने लगता है। ये स्वास्थ्य समस्याए त्वचा की संक्रमण के लिए लोगों को अधिक संवेदनशील बनाती है। यदि मनुष्य के खून में कोई दोष या विकार हो तो भी फुंसी या फोड़े हो सकते हैं। जो बाल कूप या तेल ग्रन्थियों में शुरु होता है। सबसे पहले संक्रमण के क्षेत्र में त्वचा लाल हो जाती है।

फोड़ा-फुंसी कारण: फोड़ा-फुंसी बालों के चारों ओर ऊबड़ लाल, पस से भरा हुआ लम्प होता है जो मुलायम, गर्म, खुजली और बहुत ही कष्टदायक होता है। जो शुरुआत में मटर के आकार का होता है और बाद में गोल्फ की गेंद के आकार तक का हो सकता है। जब फ़ोड़ा पक जाता है और उसमें से पस निकलने लगता है, तब इसके गांठ के केन्द्र में एक पीला या सफेद बिंदु बन जाता है। इस अवस्था में में रोगी को बुखार भी हो सकता है और उसकी लसिका में सूजन हो सकती है तथा उसे थकान का एहसास भी होता है। इस आवर्ती फोड़े को जीर्ण फुंसी कहा जाता है।

फोड़ा में हल्दी के के प्रयोग: फोड़ा में हल्दी और सरसों के तेल को खरल करके शहत-शहत लेप करने से फोड़ा धीरे-धीरे नष्ट हो जाता है। हल्दी मे एंटीसेप्टिक तत्व मौजूद होते हैं जो त्वचा के कीटाणुओ से लड़ने में सक्षम होते हैं।

फोड़े-फुंसी का इमली से उपचार: फोड़े-फुन्सियां में इमली के 15 ग्राम पत्तों को गर्म करके उनकी पुल्टिस बनाकर बांधने से फोड़ा पककर शीघ्र फूट जाता है। इसके अलावा इमली के बीजों की पुल्टिस बांधने से फुंसिया नष्ट हो जाती हैं।

फोड़े-फुंसी में इन्द्रायण से इलाज: फोड़े-फुंसी सर्दी-गर्मी से जो नाक में ऐसे फोड़े हो जाते हैं, जिनमें से पीप निकलता हो, उस पर इन्द्रायण फल को नारियल तेल के साथ लेप करने से नाक की फुंसी ठीक हो जाती हैं।

फुंसी में अमलतास के प्रयोग: शिशु की फुंसी में अमलतास के पत्तों को गोदूध के साथ पीसकर लेप करने से नवजात शिशु के शरीर पर होने वाली फुंसी या छाले फौरन ठीक हो जाते हैं।

फोड़े-फुंसी का बेल से उपचार: रक्त विकार से उत्पन्न फोड़े फुंसियों पर बेल की जड़ या लकड़ी को जल में पीसकर लेप करने से फोड़े-फुंसी में में शीघ्र लाभ होता है।

फोड़े-फुंसी में अतीस से इलाज: फोड़े फुंसी में अतीस के 5 ग्राम चूर्ण को फांककर ऊपर से चिरायते का काढ़ा पीने से फोड़े फुंसी नष्ट हो जाती है।

फोड़े-फुंसी में बरगद के प्रयोग: फोड़े-फुंसियों में बरगद के पत्तों को गर्म कर बाँधने से फोड़े-फुंसी शीघ्र ही पक कर फूट जाते है। इसके अलावा बरगद के पत्तों को जलाकर उसकी भस्म में मोम और घी मिला मलहम जैसा बनाकर घावों में लेप करने से फोड़ा-फुंसी में शीघ्र लाभ होता है।

फोड़े का अरंडी से उपचार: शय्याक्षत (रोगी को बहुत समय तक खाट पर लेटे रहने से होने वाले फोड़े) में एरंड तेल लगाने से फोड़े जल्दी नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा बच्चों के उल्टी, दस्त और बुखार में एरंड तेल बहुत गुणकारी औषधि है।

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फोड़े-फुंसी में गेंदा फूल से इलाज: फोड़े-फुंसी में गेंदा के पत्तों को पानी के साथ पीसकर शरीर पर लेप करने से फोड़े-फुंसी नष्ट होती है।

फोड़े-फुंसी में भारंगी के प्रयोग: फुंसी में भारंगी के पत्ते और कोमल डालियों का निचोड़ा हुआ रस घी में मिलाकर शरीर पर लेप करने से आराम मिलता है।

फोड़े-फुंसी का मुलेठी से उपचार: फोड़े-फुंसी में मुलेठी को पीसकर उसका पेस्ट लेप करने से वे जल्दी ही फोड़े-फुंसी में पीव नहीं भरता है।

फोड़ा-फुंसी में नीम की पत्तिओं से इलाज: वर्षा ऋतु में बच्चों के फोड़े फुंसियां निकल आती हैं नीम की 6-10 पकी निबौली 2-3 बार जल के साथ प्रयोग करने से फुंसियां छूमंतर हो जाती है या फिर सुबह-सुबह ब्रस करने के ठीक बाद नीम की कोमल पत्तिओं को खाने से भी इस समस्या से निदान पा सकते हैं।

फोड़ा-फुंसी का प्याज से उपचार: फोड़ा-फुंसी, यौवन पिण्डिका, नारू, कंठमाला इत्यादि रोगो पर प्याज को गाय के घी में तलकर बांधने से अथवा प्याज के रस का लेप करने से फोड़ा-फुंसी शीघ्र नष्ट हो जाती है। प्याज मे पाए जाने वाले एंटीसेप्टिक गुण फोड़े के लिए एक उत्तम घरेलू उपचार है।

फोड़ा-फुंसी में पीपल के प्रयोग: फोड़ा-फुंसी में पीपल की छाल को जल में घिसकर फोड़े फुंसियों पर लेप करने से जल्दी ठीक हो जाती है।

फोड़ा-फुंसी का सहिजन से उपचार: फोड़े-फुंसी में सहिजन के फलियों का शाग बनाकर रोगी को खिलाने से बरसात में होने वाले फोड़े-फुंसी से आराम मिलता है।

फोड़े-फुंसी में शरपुन्खा से इलाज: फोड़ें-फुंसी में शरपुंखे के 15-20 ग्राम काढ़े में 2 चम्मच शहद मिलाकर खाली पेट सुबह-शाम पीने से फोड़ा-फुंसी ठीक हो जाती है।

फोड़े-फुंसी का सत्यानाशी से उपचार: फोड़ा-फुंसी में सत्यानाशी के पंचाग का रस निकालकर इसमें 5 ग्राम गाय का दूध में मिलाकर दिन में दो तीन बार पी लेने अथवा सत्यानाशी के छालों को पीसकर लेप करने से फोड़ा-फुंसी में फौरन आराम मिलता है।

फोड़ा-फुंसी में शीशम से इलाज: फोड़ा-फुंसी में शीशम के पत्तों का 50-100 मिलीलीटर काढ़ा सुबह-शाम पीने से फोड़े-फुंसी नष्ट हो जाते है। इसके अलावा कोढ़ में भी शीशम के पत्तों या बुरादों का काढ़ा प्रयोग किया जाता है।

फोड़ा-फुंसी की सूजन में सूर्यमुखी के प्रयोग: फोड़ा-फुंसी की सूजन में सूर्यमुखी के पत्तों के काढ़े से धोने से लाभ होता हैं। इसके अलावा जीर्ण श्लीपद आदि में इसके पत्तियों को पीसकर लेप करने से फोड़ा फूटकर पानी निकल जाता है और सूजन कम हो जाती है।

फोड़े-फुंसी का काली मिर्च से उपचार: फोड़े-फुंसी को दूर भगाने में काली मिर्च और प्याज बहुत लाभदायक होते हैं। इसमें एंटी-ऑक्‍सीडेंट और एंटीबैक्‍टीरियल गुण मौजूद होते हैं जो फोड़े-फुंसी के कारण होने वाली सूजन और दर्द को नष्ट कर देता है।

फोड़ा-फुंसी में कच्चे आलू से इलाज: फोड़ा-फुंसी में कच्चे आलू का रस फुंसियों पर लेप करें अथवा सुबह के समय निहार मुंह चार चम्मच रस पिने से फोड़ा-फुंसी नष्ट हो जाते हैं।

फोड़े-फुंसी का गाजर से उपचार: गाजर को पीसकर तवे पर हल्का-सा तेल डालकर गरम करके इस पुल्टिस को फोड़े-फुंसियों पर बांधने से शीघ्र लाभ होता है।

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