दूब घास के फायदे, गुण, नुकसान और औषधीय गुण

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दूब घास अनेक रोगों की दवा जैसे:- बुखार, पथरी, बवासीर, गर्भपात, यौन शक्ति, मस्तक पीड़ा, अपस्मार (मिर्गी), नेत्ररोग, दस्त, खुनी दस्त, पेशाब की जलन, जलोदर, दाद, खुजली, बच्चों के रोग, मुखपाक, नकसीर, पित्तज, रक्तपित्त आदि बिमारियों के इलाज में दूब के औषधीय चिकित्सा प्रयोग निम्नलिखित प्रकार से किये जाते है:दूब घास के फायदे, गुण, नुकसान और औषधीय प्रयोग:

Table of Contents

दूब घास में पाये जाने वाले पोषक तत्व

दूब में प्रोटीन, काब्रोहाइड्रेट एवं रेशे पाये जाते हैं। जलाने पर 11.75 प्रतिशत भस्म प्राप्त होती हैं, अथवा पोटेशियम, मैग्नीशियम एवं सोडियम लवण पाये जाते हैं।

आयुर्वेदिक औषधिजड़ी-बूटी इलाज

बुखार में दूब घास के फायदे एवं सेवन विधि:

मलेरिया ज्वर में दूब के रस में अतीस के वहन को मिलाकर, दिन में दो तीन बार चाटने से, बारी चढने वाला मलेरिया ज्वर में अत्यधिक लाभ मिलता है।

पथरी में दूब घास के फायदे एवं सेवन विधि:

पथरी में कुंए वाली दूब 30 ग्राम पानी में पीसकर, मिश्री मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से मसाने की पथरी में लाभ होता हैं इसलिए बस्तिशोथ, सुजाक और मूत्र की जलन में यह गुणकारी हैं। दूब को मिश्री के साथ घोंट छान के पिलाने से पेशाब के साथ खून आना बंद हो जाता हैं।

बवासीर में दूब घास के फायदे एवं सेवन विधि:

अर्श (बवासीर)- खूनी बवासीर में दूब के पंचांग को पीसकर दही में मिलाकर सेवन करने से और इसके पत्तों को पीसकर बवासीर पर लेप करने से बवासीर में लाभ होता हैं।

गर्भपात में दूब घास के फायदे एवं सेवन विधि:

गर्भपात में प्रदर रोग तथा रक्तस्राव, गर्भपात आदि योनि व्याधियों में दूब का प्रयोग करते हैं। दूब से रक्त रुकता हैं। गर्भाशय को शक्ति प्रदान होती हैं। तथा गर्भ को पोषण मिलता हैं।

यौन शक्ति में दूब घास के फायदे एवं सेवन विधि:

कामशक्ति में सफ़ेद दूब वीर्य को कम करती हैं और काम शक्ति को घटाती हैं।

मस्तक पीड़ा में दूब घास के फायदे एवं सेवन विधि:

मस्तक पीड़ा में दूब और छूने दे समभाग को पानी में पीसकर मस्तक पर लेप करने से मस्तक पीड़ा शांत होती है।

अपस्मार में दूब घास के फायदे एवं सेवन विधि:

अपस्मार (मिर्गी) में दूब के पंचांग का स्वरस, मासिक धर्म, भूतोन्माद और अपस्मार में दूब गुणकारी हैं। दूब के रस में सफेद चंदन का चूर्ण और मिश्री मिलाकर पिलाने से रक्त प्रदर मिटता है।

नेत्र रोग में दूब घास के फायदे एवं सेवन विधि:

नेत्र रोग में आंख दुखने पर दूब के पत्तों को पीसकर पलको पर बांधने से दर्द में शांति मिलती हैं। नेत्र मल का आना बंद हो जाता हैं।

दस्त में दूब घास के फायदे एवं सेवन विधि:

अतिसार (दस्त) में दूब का ताजा रस संकोचक हैं, इसलिए यह पुराने अतिसार और पतले दस्तों में गुणकारी हैं। तथा खुनी दस्त में दूब को सोंठ और सौंफ के साथ उबालकर पिलाने से आम अतिसार मिट जाता हैं:दस्त में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:CLICK HERE

पेशाब की जलन में दूब घास के फायदे एवं सेवन विधि:

पेशाब की जलन में दूब की जड़ का काढ़ा पेशाब की जलन और मूत्रल होता है, इसलिए बस्तिशोथ, सुजाक और मूत्र की जलन में लाभकारी होता है। दूब को पीसकर, दूध में छानकर पिलाने से पेशाब की जलन नष्ट हो जाती हैं।

जलोदर में दूब घास के फायदे एवं सेवन विधि:

जलोदर (पेट में अधिक पानी भरना) दूब को काली मिर्च के साथ पीसकर दिन में तीन बार भोजन से पहले पिलाने से मूत्रवृद्धि होकर जलोदर और सर्वांग शोथ नष्ट होता है।

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दाद में दूब घास के फायदे एवं सेवन विधि:

दाद में दूब के चौगुने रस में सिद्ध किये हुए तेल को लगाने से दाद, खुजली व्रण मिटते हैं।

खुजली में दूब घास के फायदे एवं सेवन विधि:

खुजली में दूध को हल्दी के साथ पीसकर लेप करने से भी खुजली और दाद नष्ट हो जाता है।

बच्चों के रोग में दूब घास के फायदे एवं सेवन विधि:

बच्चों के रोग में बड़ी-बड़ी शाखों वाली दूब जो अक्सर कुओं पर होती हैं। पीस छानकर उसमें 2-3 ग्राम बारीक पिसे हुए नागदेसर और छोटी इलायची के दाने मिलाकर, सूर्योदय से पहले उस बच्चे जिसका तालू बैठ गया हो नाक में डालकर सुंघाने से तालू ऊपर को चढ़ जाता है। दूब के सेवन से ताकत बढ़ती है। बच्चे दूध निकालना बंद कर देते हैं।

मुखपाक में दूब घास के फायदे एवं सेवन विधि:

मुखपाक में दूब के काढ़ा से कुल्ले करने से मुँह के छाले नष्ट हो जाते हैं।

नकसीर में दूब घास के फायदे एवं सेवन विधि:

नकसीर में अनार के फूल के रस को दूब के रस के साथ अथवा लाक्षारस या हरड़ के साथ मिश्रित कर नस्य लेने से नासिका द्वारा प्रवृत्त त्रिदोषज रक्त पित्त बहना बंद हो जाता हैं। दूब के स्वरस की, मुनक्का, ईख के स्वरस की, दाड़िम के फूल के स्वरस की, अवपीड़ नस्य लेने से, नासिका से निकलने वाला रक्त पित्तज रक्त शीघ्र शांत हो जाता हैं। नकसीर में दूब के पंचांग का स्वरस नाक में टपकाने से लाभ होता हैं।

पित्तज में दूब घास के फायदे एवं सेवन विधि:

पित्तज में दूब का रस पिलाने पित्त से जन्य वमन मिटती हैं। दूब की चावलों के धोवन के साथ पिलाने से पित्त की वमन बंद हो जाती हैं।

रक्तपित्त में दूब घास के फायदे एवं सेवन विधि:

रक्तपित्त में दूब, लाल चंदन, भद्र्श्री, पुंडरियाका, नील कमल, लाल कमल, वानीर जल, मृणाल, मुलेठी इनका प्रयोग रक्त पित्तज रोग में लाभदायक होता है। सफेद दूब को जल में पीसकर कपड़छन कर मिश्री मिलाकर पिलाने से रक्त पित्त में लाभ होता है।

दूब घास का परिचय

दूर्बा अर्थात हरी घास प्राणी मात्रा के लिए प्रकृति का बहुमूल्य पुहार हैं। दूब हरी-हरी मखमली घास के नैसरंगिक सौंदर्य को देखकर जहां हृदय दिव्य आनंद से परिपूरित हो जाता हैं, वही दूब पर नंगे पाँव चलने के अनेक लाभ हैं। दूब से नेत्र ज्योति बढ़ती व शरीर के अनेक विकार शांत हो जाते हैं। वर्ष भर दूब खूब फलती फूलती हाँ। निघण्टुओं में सफ़ेद व नील एवं भांड दूर्बा भेद दूब के तीन भेड़ो का उल्लेख हैं। सफ़ेद दूब वास्तव में कोई भिन्न वनस्पति नहीं हैं हरी दूब ही जब सफ़ेद हो जाती हैं तो सफ़ेद दूब कहलाती हैं।

दूब घास के बाह्य-स्वरूप

दूब के बहुवर्षायु स्वभाव के पतले किन्तु कड़े कांड युक्त, प्रसरणशील पौधे होते हैं, जो भूमि पर चारो ओर फैलते हैं। नूतनाग्र भूमि पर आगे-आगे प्रसरण करता जाता हैं और वायव्य काण्ड निकल कर नया पौधा जन्म लेता जाता है। जैसे विश्व विजय पर निकला कोई रथी पीछे सैनिक तैनात करता जाता हैं। पत्तियां 1-4 इंच तक लम्बी, 1/2 इंच चौड़ी रखाकार, अग्र पर चिकनी तथा मुलायम होती हैं। दूब के पुष्प छोटे हरिताभ या नीलारुण होते हैं। फल छोटे-छोटे दानो के रूप में होते हैं।

दूब घास के औषधीय गुण-धर्म

दूब मधुर, रुचिकारक, कसैली, कड़वी, शीतल गुण वाली होती हैं यह वमन, विसर्प, तृष्णा, कफ, पित्त दाह, आमातिसार, रक्त पित्त तथा खांसी को दूर करती है। गंड दूब अर्थात (गाडर दूब) शीतल, लोहे को गलाने वाली, मल को रोकने वाली, हल्की, कसैली, मधुर, वातकारक, पचने में चरपरी तथा तृषा-दाह-कफ-रुधिर विकार, कुष्ठ, पित्त और ज्वर को दूर करने वाली हैं।

दूब घास के नुकसान

कामशक्ति में सफ़ेद दूब वीर्य को कम करती हैं और काम शक्ति को घटाती हैं।

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