खांसी के कारण, लक्षण, प्रकार, घरेलू दवाएं/आयुर्वेदिक औषधि एवं उपचार विधि

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खांसी क्या हैं What is Cough in Hindi?

मौसम के बदलाव में ज्यादा तर लोग सर्दी, खांसी, जुकाम से परेशान हो जाते हैं। यह समस्या मौसम के बदलाव होने पर आने लगती है। खांसी बैक्टीरियल या वायरल इन्फेक्शन, एलर्जी, साइनस Infection (संक्रमण) या सर्दी के कारण हो सकती है। खांसी-जुकाम एक प्रकार की रक्षात्मक प्रणाली है जो आपके सांस लेने की नलिका से बलगम और धूल-मिट्टी को बाहर निकलने में मदद करती है। यह धूम्रपान, मजबूत गंध, ठंडे मौसम या किसी अन्य परिस्थिति के कारण हो सकता है। यह आपकी साधारण गतिविधियों में बाधा डालता है, जैसे नींद में बाधा, साँस लेने में मुसीबत और फेफड़े में दर्द होता है यह पोस्टनासल ड्रिप, ब्लड प्रेशर ड्रग्स, क्रोनिक ब्रोंकाइटिस, अस्थमा या संक्रमण के कारण हो सकता है। हालांकि घबराने कि जरुरत नहीं है इसका उपचार संभव है लेकिन यह सामान्य जीवन को असुखद बना देता हैं। बलगम वाली खांसी का अगर समय से इलाज नहीं किया जाए तो यह अन्य बीमारियों का आगाज करती हैं। जैसे- खांसते-खांसते मुहं से खून आना, टीवी इत्यादि।

आयुर्वेदिक औषधिजड़ी-बूटी इलाज

खांसी के प्रकार: खांसी मुख्य रूप से चार प्रकार की होती है, जैसे- सूखी खांसी, कुक्कुर खांसी, कफ वाली खांसी, वातज खांसी इत्यादि।

1. सूखी खांसी: सूखी खांसी एक ऐसी समस्या है जो बहुत आम होती है और हर किसी को कभी भी हो सकती है। मौसम के बदलाव से हमारे शरीर में सबसे पहले असर होता है और सूखी खांसी जैसी बीमारी हमें लपेट लेती है। हमारे शरीर में सर्दी होने से नाक-गला बंद हो जाते है और हमें सांस लेने में तकलीफ होती है। कई बार सर्दी तो ठीक हो जाती है, लेकिन खांसी हमारा पीछा नहीं छोड़ती और ये खांसी बिना कफ वाली सूखी खांसी होती है।

2. कुक्कुर खांसी: कुक्कुर खांसी या काली खांसी एक वायरस सम्बन्धी बीमारी है। कहा जाता है कि कुक्कुर खांसी बच्चों की बीमारी है लेकिन ऐसा नहीं होता है। यह वयस्कों में भी पाई जाती है। यह कष्टदायक बीमारी है क्योंकि यह संक्रमित बीमारी होती है यानी इस बीमारी के श्वसन हवा के जरिये एक इंसान से दूसरे इंसान में हो जाती हैं। यह खांसी रात और दिन में बढ़ जाती है। कई बार ऐसा होता है कि खांसते-खांसते दम फूलने लगता है। आंखें लाल हो जाती हैं। इस खांसी को कुक्कुर खांसी या काली खांसी भी कहते हैं। खांसी शुरू होने के लगभग दो सप्ताह तक संक्रमित लोग सबसे ज्यादा संक्रमित होते हैं। Antibiotics (एंटीबायॉटिक्स) इसके संक्रामण से काफी हद तक बचाता है।

3. बलगम वाली खांसी: मौसम में बदलाव आते ही अक्सर लोग सर्दी, खांसी, जुकाम के शिकार हो जाते हैं। इन दिनों में इन्फेक्शन होने के कारण खांसी लगातार बनी रहती हैं जिसके कारण छाती में बलगम जम जाता है।

4. वातज खांसी: वात के वजह से होने वाली खांसी में बलगम सूख जाता है, इसलिए इसमें बलगम बहुत कम ही निकलता है या बलगम जम जाता है। कफ न निकल से खांसी लगातार और तेजी से आती रहती है, ताकि कफ निकल जाए। इस तरह की खांसी से पेट, अंत, छाती, कनपटी, गले और सिर में दर्द भी होने लगता है।

खांसी में वचा के प्रयोग: खांसी से ग्रसित मरीज को वचा को 125 मिलीग्राम पानी में घिसकर दिन में दो तीन बार सुबह-शाम तथा दोपहर पिलाने से खांसी में शीघ्र लाभ होता है।

खांसी में तुलसी के इलाज: खांसी की परेशानी से शीघ्र छुटकारा पाने के लिए तुलसी पत्र और मंजरी 50 ग्राम, अदरक 25 ग्राम, काली मिर्च 15 ग्राम, जल 500 ग्राम की मात्रा में काढ़ा बनाकर एक चौथाई भाग शेष रहने पर छानकर रख लें, इस काढ़े का सुबह-शाम नियमित सेवन करने से खांसी में लाभ होता है।

खांसी में तिल के प्रयोग: खांसी से ग्रसित मरीज को तिल के 100 मिलीग्राम काढ़े में 2 चम्मच खंड में डालकर पीने से खांसी मिटती हैं। अथवा तिल और मिश्री को उबालकर पिलाने से सूखी खांसी मिटती है।

खांसी में तेजपात के उपचार: खांसी से पीड़ित मरीज को सूखे तेजपात के पत्तों का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में एक कप गर्म दूध के साथ सुबह-शाम तथा दोपहर नियमित सेवन करने से खांसी में लाभ होता हैं। एक चम्मच तेजपात का चूर्ण शहद के साथ प्रयोग करने से खांसी ठीक हो जाती हैं।

खांसी में शिरस/शिरीष के इलाज: खांसी की समस्या से शीघ्र छुटकारा पाने के लिए मरीज को पीले सिरस के पत्तों को गाय के घी में भूनकर दिन में दो तीन बार खिलाने से खांसी नष्ट होती है।

खांसी में सेहुड़ के प्रयोग: खांसी से ग्रसित मरीज को थूहर के दो पत्तों को आग पर भून कर मसलकर रस निकालकर थोड़ा सा नमक मिलाकर पीने से खांसी में आराम मिलता है। सेहुंड के अंत के कोमल डंडों को आग में भूनकर रस निकालकर उसमें पुराना गुड़ मिलाकर पिलाने से बच्चों को वमन और विरेचन होकर खांसी मिटती है तथा थूहर का साग बना कर खिलाने से कफ और श्वांस में लाभ होता हैं।

खांसी में सौंठ के इलाज: खांसी जैसी जटिल समस्या से छुटकारा पाने के लिए सौंठ के काढ़े के साथ काला नमक, हींग तथा सौंठ के मिश्रित चूर्ण सुबह-शाम सेवन करने से खांसी की समस्या से फौरन आराम मिलता है।

खांसी में सत्यानाशी के प्रयोग: खांसी की समस्या से फौरन आराम पाने के लिए खांसी मरीज को सत्यानाशी के मूल का चूर्ण 1 ग्राम, गर्म जल या गाय के गर्म दूध के साथ सुबह-शाम नियमित रूप पिलाने से कफ बाहर निकल जाता है और खांसी में आराम मिलता है।

खांसी में शरपुन्खा के उपचार: खांसी की समस्या से ग्रसित मरीज को शरपुन्खा के सूखे मूल को जलाकर उसका धुंआ सूंघने से खांसी में तत्काल आराम मिलता हैं।

खांसी में राई के प्रयोग: खांसी में कफ गाढ़ा हो जाने पर सुगमता से ना निकलता हो तो राई 500 मिलीग्राम, सैंधा नमक 200 मिलीग्राम और मिश्री मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से कफ पतला होकर सरलता से बाहर निकल जाता है।

खांसी में पुनर्नवा के इलाज: कास (खांसी) की समस्या से छुटकारा पाने के लिए पुनर्नवा की जड़ों के चूर्ण में चीनी मिलाकर दिन में दो बार सेवन करने से सूखी खांसी जड़ से खत्म हो जाती है।

खांसी में पिया बासा के प्रयोग: खांसी के मरीज को पिया बासा के पत्तों का काढ़ा बनाकर 1 या दो चम्मच में आवश्कतानुसार शुद्ध शहद मिलाकर दिन में दो तीन बार पिलाने से खांसी में फौरन लाभ होता है।

खांसी में पिप्पली के उपचार: खांसी से परेशान व्यक्ति को 1 एक ग्राम पिप्पली चूर्ण को दोगुना शहद में मिलाकर सिल चट्टे पर पीसकर चाटने से खांसी में शीघ्र लाभ होता है।

खांसी में पवांड़ के इलाज: खांसी से शीघ्र छुटकरा पाने के लिए पवांड़ के बीजों को 1-2 ग्राम चूर्ण को गर्म जल के साथ कुछ दिन तक सेवन करने से खांसी में लाभ होता हैं।

सूखी खांसी में पान के प्रयोग: सूखी खांसी से परेशान मरीज को पान के रस में 3-4 ग्राम को मधु के साथ मिलाकर रात्रि में सोते समय चटाने से सूखी खांसी में लाभ होता है।

सूखी खांसी में वचा के इलाज: सूखी खांसी में 25 ग्राम वचा को 400 मिलीग्राम जल में उबालकर चौथाई भाग शेष रह जाने पर तीन खुराक बनाकर दिन में दो तीन बार पिलाने से सूखी खांसी में लाभ होता है।

सूखी खांसी में शतावर के प्रयोग: सूखी खांसी से छुटकारा पाने के लिए मरीज को शतावरी10 ग्राम, अडूसे के पत्ते 10 ग्राम, और मिश्री 10 ग्राम को 150 ग्राम पानी के साथ उबालकर दिन में दो तीन बार पिलाने से सूखी खांसी मिट जाती है।

सूखी खांसी में सत्यानाशी के उपचार: सूखी खांसी में फौरन छुटकारा पाने के लिए सत्यानाशी के मूल का चूर्ण आधा से 1 ग्राम गर्म जल या गाय के गर्म दूध के साथ सुबह-शाम नियमित रूप पिलाने से कफ पतला होकर बाहर निकल जाता है और सूखी खांसी के मरीज को शीघ्र आराम मिलता है।

सूखी खांसी में पिया बासा के इलाज: सूखी खांसी से ग्रसित मरीज को पिया बासा के पत्तों का काढ़ा बनाकर 1 या 2 चम्मच में आवश्कतानुसार शुद्ध शहद मिलाकर सुबह-शाम तथा दोपहर पिलाने से सूखी खांसी मिटती है।

सूखी खांसी में पिप्पली के प्रयोग: सूखी खांसी से छुटकारा पाने के लिए पिप्पली की मूल के 3 ग्राम चूर्ण को मधु के साथ, दिन में तीन बार चटाने से सूखी खांसी में लाभ होता है। सूखी खांसी में बंसलोचन, पिप्पली, मुनक्का, आंवला, मिश्री लेकर सभी को एक साथ पीसकर 3 ग्राम चूर्ण, 1 ग्राम घी और 4 ग्राम शहद में मिलाकर नित्य 10-15 दिन सेवन करने से सूखी खांसी में शीघ्र आराम मिलता है।

सूखी खांसी में पर्णबीज के इलाज: सूखी खांसी से परेशान मरीज को पर्णबीज के पत्तों का 5 मिलीलीटर रस को नियमित रूप से सुबह-शाम तथा दोपहर प्रयोग करने से सूखी खांसी में लाभदायक होता है।

बच्चों की खांसी में वचा के प्रयोग: बच्चों की खांसी में वचा को 125 मिलीग्राम पानी में घिसकर दिन में तीन बार पिलाने से बच्चों की खांसी में लाभ होता है तथा बच्चों की खांसी में माताओं के दूध के साथ वचा को घिसकर बच्चे को पिलाने से खांसी में लाभ होता हैं।

बच्चों की खांसी में काली राई के उपचार: बच्चों की खांसी में बच्चों की छाती पर काली राई के तेल की मालिश करने से बच्चे की खांसी नष्ट हो जाती है।

बच्चों की खांसी में पुनर्नवा के इलाज: बच्चों की खांसी में पुनर्नवा पत्र का स्वरस 110 ग्राम, मिश्री चूर्ण 150 ग्राम तथा पिप्पली चूर्ण 12 ग्राम इन तीनों को एक साथ मिलाकर पकायें, जब चाशनी गाढ़ी हो जाये तो उतारकर बंद बोतल में भर लें, इस शर्बत की 8-10 बून्द तक बच्चों को दिन में दो तीन बार चटाने से बच्चों की खांसी ठीक हो जाती है।

बच्चों की खांसी में पिप्पली के प्रयोग: बच्चों की खांसी में बड़ी पिप्पली को घिसकर लगभग 125 मिलीग्राम की मात्रा में मधु के साथ चटाते रहने से, बच्चों की खांसी दूर हो जाती है।

खांसी में निर्गुन्डी के प्रयोग: खांसी से परेशान मरीज को निर्गुन्डी के एक किलों स्वरस को धीमी आंच में पकाकर गुड़ की चाशनी जैसी बनाकर सुबह-शाम नित्य सेवन करने से खांसी में आराम मिलता है।

खांसी में मूली के उपचार: खांसी से परेशान मरीज को सूखी मूली का काढ़ा 60-100 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से या मूली का शाक बनाकर खाने से खांसी में राहत मिलती है।

खांसी में मौलसिरी के इलाज: खांसी से परेशान मरीज को मौलसिरी 20-25 ग्राम ताजा फूलों को रात भर आधा किलो पानी में भिगोकर रखे प्रातः काल 10-20 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम 6-7 दिन तक उस पानी को बच्चे को पिलाने से खासी मिट जाती हैं।

खांसी में काली मिर्च के प्रयोग: कष्टदायक खांसी में काली मिर्च का चूर्ण 2 भाग, पीपल का चूर्ण बनाकर उसे 8 भाग गुड़ मिलाकर 1-1 ग्राम की गोलियां बनाकर दिन में दो तीन बार उपयोग करने से खांसी में लाभ होता हैं।

खांसी में लौंग के प्रयोग: खांसी से परेशान मरीज को 50 ग्राम लौंग को तवा पर धीमी आंच पर भूनकर मुख में धारण करके चूसते रहने से साधारण खांसी शीघ्र ठीक हो जाती है।

कुक्कुर खांसी में लौंग के इलाज: कुक्कुर खांसी में 3-6 नग लौंग को आग पर भूनकर पीसकर मधु में मिलाकर चाटने से कुक्कुर खांसी नष्ट हो जाती है।

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खांसी में लाजवंती/छुई-मुई के उपचार: खांसी में लाजवंती की जड़ को गले में बांधने से खांसी आना बंद हो जाता हैं। यह प्रयोग नियमित रूप करने से कुक्कुर खांसी में भी लाभ होता है।

खांसी में कुटज के प्रयोग: खांसी में इन्द्रजौ की छाल को चावल के पानी के साथ पीसकर काढ़ा बनाकर नियमित सुबह-शाम सेवन करने से खांसी के साथ आने वाले कफ में भी शीघ्र आराम मिलता है।

खांसी में कसौंदी के इलाज: खांसी में कसौंदी की 8 से 10 ताज़ी फलियों को आग में सेंककर खाने से खासी में शीघ्र लाभ होता हैं। कफज कास तथा कृच्छ्रश्वास में कसौंदी के बीजों का चूर्ण, छोटी पिप्पली, काला नमक, तीनों को बराबर मात्रा में लेकर पानी के साथ खरल करके 250 मिलीग्राम की गोलियाँ बनाकर, प्रातः या रात्रि में 1-2 गोली मुँह में रखकर चूसने से खांसी में लाभ होता हैं।

खांसी में लता करंज के प्रयोग: खाँसी में लता करंज के बीज चूर्ण 15 से 750 मिलीग्राम की मात्रा में 125 मिलीग्राम सुहागे की खील मिलाकर, शहद के साथ दिन में 3-4 बार चटाते रहने से तथा बीजों को धागे में पिरोकर गले में बांधने से 4-5 दिन से खांसी में पूर्ण लाभ होता हैं। 10-12 ग्राम पत्र रस में काली मिर्च चूर्ण 200-500 मिलीग्राम तक मिला कर 4 दिन तक सुबह-शाम चाटने से खांसी में लाभ होता हैं।

कुक्कुर खांसी में लता करंज के उपचार: कुक्कुर खांसी में लता करंज की फलियों की माला बनाकर गले में पहनने से कुक्कुर खांसी मिट जाती हैं तथा कुक्कुर खांसी में लता करंज के बीज 1-2 ग्राम जल में घिसकर या कूटकर जल में उबालकर जल को दिन में दो तीन बार प्रयोग करने से कुक्कुर खांसी में लाभ होता हैं।

खांसी में कटेरी के इलाज: खांसी में कटेरी के फूलों के 1/2 से 1 ग्राम चूर्ण को शहद के साथ चटाने से बालकों को सभी प्रकार की खांसी दूर होती हैं। खांसी में 15-20 ग्राम पत्रस्वरस या 50-60 ग्राम मूल काढ़ा में 2 ग्राम छोटी पीपल एवं 200 मिलीग्राम सैंधा नमक मिलाकर उपयोग करने से खांसी में आराम मिलता हैं।

खांसी में जामुन के प्रयोग: खांसी एक प्रकार की जटिल समस्या है, खांसी में जरा भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए क्योंकि दो तीन हपते से ज्यादा खाँसी आने पर टी.बी. जैसी बीमारी का समाना करना पड़ सकता है। खांसी के रोगी को जामुन के फल का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम नियमित सेवन करने से खांसी शीघ्र नष्ट हो जाती है।

खांसी में इन्द्रायण के उपचार: कास (खांसी) में इन्द्रायण के फल में छेद करके उसमें काली मिर्च भरकर छेद बंद कर धूप में सूखा लें या आग के पास भूमल में कुछ दिन तक पड़ा रहने दें, फिर फल को फेंक दे और काली मिर्च के 6 दाने प्रतिदिन मधु तथा पीपल के साथ सेवन करने से खांसी में लाभ होता हैं।

खांसी में हरड़ के प्रयोग: खांसी में हरड़ में इलायची, मुनक्का, इन तीनों को समभाग मिलाकर पीसकर कर सुबह-शाम गर्म जल के साथ नियमित सेवन करने से खांसी में शीघ्र लाभ होता है।

खांसी में हल्दी के उपचार: खासी में हल्दी को भूनकर इसका 1-2 ग्राम चूर्ण मधु अथवा घी के साथ सोते समय चटाने से खासी में शीघ्र लाभ होता हैं।

खांसी में गुड़हल पत्तों के इलाज: खांसी में गुड़हल की जड़ का चूर्ण पानी के साथ पीसकर काढ़ा बनाकर सुबह-शाम तथा दोपहर नियमित रूप से सेवन करने से दोनों प्रकार की खांसी में लाभ होता हैं।

खांसी में गेंदा फूल के इलाज: खांसी से ग्रसित मरीज को गेंदा फूल के बीजों का चूर्ण बनाकर उसमें बराबर की मात्रा में मिश्री मिलाकर एक चम्मच की मात्रा में पानी के साथ 2-3 बार सेवन करने से खांसी में लाभ होता हैं।

खांसी में गंभारी के उपचार: कफज (खांसी) में गंभारी और अडूसे के कोमल पत्तों के 10-20 मिलीलीटर स्वरस को सुबह-शाम तथा दोपहर सेवन करने से कफज खांसी नष्ट होती है।

खांसी में गाजर के इलाज: खांसी में गाजर के स्वरस में मिश्री मिलाकर चटनी बना लें, अब इसमें काली मिर्च बुरककर चटाने से खांसी में लाभ होता है तथा कफ पतला होकर निकल जाता है।

खांसी में अजवायन के प्रयोग: खांसी से शीघ्र छुटकारा पाने के लिए अजवायन के चूर्ण की 2 से 3 ग्राम मात्रा को गर्म पानी या गर्म दूध के साथ दिन में 2-3 बार पिलाने से भी जुकाम, सिर दर्द, नजला, खांसी में लाभ होता है। कफ अधिक गिरता हो, बार-बार खांसी आती हो, तो इस दशा में अजवायन का सत 120 मिलीग्राम, घी 2 ग्राम और शहद 5 ग्राम के साथ दिन में 3 बार खिलाने से कफोत्पत्ति कम होकर खांसी में आराम मिलता है।

खांसी में अरंडी के उपचार: खांसी में एरंड पत्र का क्षार 3 ग्राम, तेल एवं गुड़, बराबर मात्रा में मिलाकर चटाने से खांसी शीघ्र ही नष्ट हो जाती है।

कुकुर खांसी में गन्ना के इलाज: कुकुर खांसी में गन्ना का ताजा रस 1 किलो अथवा 250 ग्राम ताजा शुद्ध घी के साथ पकायें, घी मात्र शेष रहने पर, 10 ग्राम तक सुबह-शाम नियमित सेवन करने से कुकुर खांसी में लाभ होता हैं।

खांसी में धनिया के प्रयोग: बच्चों की खांसी में चावल के पानी में 10-20 ग्राम धनिया को घोटकर चीनी के साथ सुबह-शाम तथा दोपहर पिलाने से बच्चों की खांसी और दमे में लाभ होता है।

खांसी में दालचीनी के उपचार: श्वांस रोग और खांसी से छुटकारा पाने के लिए एक चम्मच तेजपात का चूर्ण, 2 चम्मच शहद के साथ सुबह शाम सेवन करने से खांसी व श्वांस में शीघ्र आराम मिलता है।

खांसी में भांग के प्रयोग: दर्दनाक खांसी में गांजे का 65 मिलीग्राम सत दमा और खांसी के वेग को कम करता है।

खांसी में बेल के इलाज: खांसी में बेल मूल, अडूसा पत्र तथा नागफनी थूहर के पके सूखे हुए फल 4 से 5 भाग में सोंठ, काली मिर्च व पिप्पली एक साथ कूट कर रख ले, उसमें से लगभग 20 ग्राम तक सेवन करने से खांसी में शीघ्र लाभ होता है।

खांसी में बाकुची के उपचार: खांसी में बाकुची के एक ग्राम बीजों का चूर्ण अदरक के स्वरस के साथ सुबह-शाम तथा दोपहर सेवन करने से सुखी खांसी व खांसी में शीघ्र आराम मिलता है।

खांसी में बहेड़ा के इलाज: खांसी में बहेड़े के छिलके को मुंह में रखकर चूसते रहने से खांसी नष्ट हो जाती है तथा कफ आसानी से बाहर निकल जाता है। बकरी के दूध में अडूसा, काला नमक और बहेड़े डालकर पकाकर खाने से दोनों प्रकार की खांसी में शीघ्र लाभ होता है।

खांसी में अश्वगंधा के प्रयोग: खांसी में असगंध की 10 ग्राम जड़ को कूट लें, इसमें 10 ग्राम मिश्री मिलाकर 400 ग्राम जल में पकाएं, जब आठवां हिस्सा शेष रह जाये तो इसे थोड़ा-थोड़ा पिलाने से कुकुर खांसी और वात जन्य कास पर विशेष लाभ होता है।

खांसी में श्योनाक के इलाज: खांसी में श्योनाक की छाल के चूर्ण को एक ग्राम की मात्रा में अदरक के स्वरस व शहद के साथ चटाने से खांसी में शीघ्र लाभ होता है। सोनपाठा के गोंद के 3 ग्राम चूर्ण को थोड़ा-थोड़ा दूध के साथ गटक जाने से खांसी नष्ट हो जाती है।

खांसी में आक के प्रयोग: खांसी में आक पत्रों पर छाई सफेदी को इकट्ठा कर बाजरे की जैसी गोलियाँ बनाकर 1-1 गोली सुबह-शाम खाकर उसके बाद पान खाने से 2-4 दिन में खांसी से शीघ्र छुटकारा मिलता है।

खांसी में अनार के उपचार: खांसी में अनार के ताजे पत्रों के 1 किलो रस में मिश्री मिलाकर काढ़ा बना लें, 20-25 ग्राम दिन में दो-तीन बार चाटने से खांसी, नजला दूर होता है। खांसी में अनार का अर्क 2-2 चम्मच दिन में तीन-चार बार प्रयोग गुणकारी होता है।

खांसी में अमरुद के प्रयोग: यदि सूखी खांसी हो और कफ न निकलता हो तो, सुबह ताजे अमरुद को चबा-चबा कर खाने से सूखी खांसी में लाभ होता है। खांसी में अमरुद का भबक का अर्क निकालकर अमरुद में शहद मिलाकर पीने से सूखी खांसी में आराम मिलता है।

खांसी में अपामार्ग के इलाज: खांसी से ग्रसित रोगी को अपामार्ग 1/2 ग्राम क्षार व 1/2 ग्राम शर्करा दोनों को 30 ग्राम जल में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से 7 दिन में ही खासी से छुटकारा मिलता है।

सुखी खांसी में अंगूर के उपचार: सूखी खांसी में अंगूर, आंवला, द्राक्षा, खजूर, पिप्पली तथा काली मिर्च को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें। इस चटनी के नियमित सेवन करने से सूखी खांसी तथा कुकुर खांसी में लाभ होता है।

खांसी में अमलतास के उपाय: खांसी में अमलतास की गिरी 5-10 ग्राम को पानी में घोट उसमें तिगुना बूरा डाल कर गाढ़ी चाशनी बनाकर चटाने से सूखी खांसी में आराम मिलता है।

खासी में अलसी के इलाज: खांसी से शीघ्र छुटकारा पाने के लिए अलसी के बीजों को भूनकर शहद के साथ नियमित रूप से सेवन करने से खांसी में लाभदायक होता है।

खांसी, दमे में कचनार के प्रयोग: खांसी हो या दमा हो दोनों में कचनार उपयोगी है। खांसी से ग्रसित मरीज को शहद के साथ कचनार की छाल का काढ़ा दो चम्मच की मात्रा मे 3 बार खाने से खांसी और दमे में आराम मिलता है।

खांसी में अजमोद के उपचार: सूखी खांसी से निदान पाने के लिए अजमोद को पान में रखकर चबाने से सूखी खांसी में आराम मिलता है। तथा पुरानी सी पुरानी खांसी जड़ से खत्म हो जाती है।

खांसी में अकरकरा के इलाज: खांसी में अकरकरा का 100 मिलीग्राम काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पीने से पुरानी खांसी मिट जाती हैं। अकरकरा के चूर्ण का 3-4 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से यह बलपूर्वक दस्त के रास्ते से कफ को बाहर निकाल देता है।

खांसी में आम के उपाय: पके हुये आम के फल को आग में अच्छी तरह से भून ले। ठंडा होने पर धीरे-धीरे चूसते रहने से सूखी खांसी में लाभ होता है।

खांसी में अदरक के प्रयोग: अदरक में पाये जाने वाले गुण खांसी को खत्म कर देते है, खांसी से छुटकारा पाने के लिए अदरक के छूटे-छूटे करके एक-एक टुकड़े को चूसते रहने से खांसी जलन और खरांश कुकुर खांसी में लाभ होता है।

खांसी में घृतकुमारी या एलोवेरा के उपचार: खांसी से परेशान मरीजों को एलोवेरा (घृतकुमारी) के गुदे में काला नमक डाल कर सेवन करने खांसी में शीघ्र लाभ होता है। घृतकुमारी की जड़ का क्वाथ (काढ़ा) खांसी में अत्यंत लाभकारी होता हैं।

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