भांग के फायदे, गुण, नुकसान और औषधीय गुण

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भांग अनेक रोगों की दवा जैसे:- गंठिया, बुखार, खांसी, बवासीर, मासिक धर्म, दमा, सिरदर्द, खुनी दस्त, पागलपन, पेशाब की जलन, हैजा, अंडकोष की सूजन, कर्णरोग, निद्रानाश, सिर की रुसी, दीपन, ट्यूमर, जख्म आदि बिमारियों के इलाज में भांग के औषधीय चिकित्सा प्रयोग निम्नलिखित प्रकार से किये जाते है:भांग के गुण, फायदे, नुकसान और औषधीय प्रयोग

आयुर्वेदिक औषधिजड़ी-बूटी इलाज

Table of Contents

गंठिया में भांग की दवाएं एवं सेवन विधि:

गठिया में भांग के बीजों के तेल की मालिश गंठिया पर करने से गठिया रोग शीघ्र नष्ट हो जाता है।

बुखार में भांग की दवाएं एवं सेवन विधि:

मलेरिया बुखार में शुद्ध भांग का चूर्ण एक ग्राम, दो ग्राम, दोनों को मिलाकर 4 गोलियां बना लें। जाड़े का बुखार दूर करने के लिए 1-1 गोली 2-2 घंटे के अंतर् से खाये या शुद्ध भांग की 1 ग्राम की गोली ज्वर के एक घंटा पहले सेवन करने से ज्वर का वेग कम हो जाता है।

खांसी में भांग की दवाएं एवं सेवन विधि:

खांसी में गांजे का 65 मिलीग्राम सत दमा और खांसी के वेग को कम करता है:खांसी में गाजर के फायदे एवं सेवन विधि:CLICK HERE

बवासीर में भांग की दवाएं एवं सेवन विधि:

अर्श (बवासीर) में फूली हुई और दर्दनाक बवासीर पर हरी या सूखी भांग 10 ग्राम अलसी, 30 ग्राम की पुल्टिस बनाकर बांधने से दर्द और खुजली नष्ट हो जाती है।

मासिक धर्म में भांग की दवाएं एवं सेवन विधि:

मासिक धर्म में आने से पहले उदर को मृदु विरेचन देकर उदर को शुद्ध कर लेना चाहिए। फिर गांजा सुबह-शाम-दोपहर सेवन करने से दर्द कम होती है और रक्तस्राव नियमानुसार होने लगता है।

दमा में भांग की दवाएं एवं सेवन विधि:

दमा में भांग की सेंकी हुई 125 मिलीग्राम भांग को 2 ग्राम काली मिर्च और 2 ग्राम मिश्री मिलाकर देने से श्वांस का वेग कम होता है।
भांग का धुंआ पीने से श्वास और दमा रोग में लाभ होता है।

सिरदर्द में भांग की दवाएं एवं सेवन विधि:

मस्तक पीड़ा में भांग के पत्तों को महीन पीसकर सूघने से मस्तक पीड़ा नष्ट हो जाती हैं। भांग के पत्तों का अर्क गर्म कर कान में 2-3 बूँद की मात्रा डालने से सर्दी और गर्मी की मस्तक पीड़ा मिटती है।

खुनी दस्त में भांग की दवाएं एवं सेवन विधि:

आमातिसार (खुनी दस्त) में भांग के 125 मिलीग्राम चूर्ण की फंकी सौंफ के 4-6 बूँद आक के साथ सुबह-शाम सेवन करने से अधिक दर्द नाशक खुनी दस्त नष्ट हो जाता हैं। सेंकी हुई भांग को धोकर, महीन पीस लें, 125 मिलीग्राम चूर्ण को शहद के साथ दिन में दो बार चाटने से अतिसार और आमातिसार दोनों प्रकार के दस्त में लाभ होता हैं:खुनी दस्त में तुलसी के फायदे एवं सेवन विधि:CLICK HERE

पेट दर्द में भांग की दवाएं एवं सेवन विधि:

उदर शूल (पेट दर्द) में भांग और मिर्च चूर्ण दोनों को समान मात्रा में गुड़ में 1/2 ग्राम गोली बना कर सेवन करने से पेट दर्द में आराम मिलता है।

पागलपन में भांग की दवाएं एवं सेवन विधि:

पागलपन में 250 मिलीग्राम भांग को हींग के साथ या 65 मिलीग्राम सूखा सार हींग के साथ सेवन करने से स्त्रियों के आवेश रोग में बहुत लाभ होता हैं।

पेशाब की जलन में भांग की दवाएं एवं सेवन विधि:

मूत्रकृच्छ्र (पेशाब की जलन) में भांग और खीरा ककड़ी की मगज को पानी में घोट छानकर ठंढई की तरह पिलाने से पेशाब की जलन नष्ट होती है।

हैजा में भांग की दवाएं एवं सेवन विधि:

विसूचिका (हैजा) में हैजे के प्रारम्भ में गांजा या भांग 250 मिलीग्राम छोटी इलायची, काली मिर्च 250-250 मिलीग्राम तथा कपूर मिलाकर आधा-आधा घंटे या 1-1 घंटे पर उबालकर ठंठा जल के साथ सेवन करने से हैजे का रोगी ठीक हो जाता है।

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अंडकोष की सूजन में भांग की दवाएं एवं सेवन विधि:

अंडकोष की सूजन में भांग के पानी को थोड़ी देर भिगो रखें, फिर उस पानी से सूजन अंडकोष को धोने से तथा फोम अंडकोष पर बांधने से अंडकोष की सूजन बिखर जाती है। भांग के गीले पत्तों की पुल्टिस बनाकर अंडकोष की सूजन पर बांधने से और सूखी भाग को पानी में उबालकर बफारा देने से अंडकोष की सूजन बिखर जाती है।

कर्णरोग में भांग की दवाएं एवं सेवन विधि:

कर्णरोग में भांग के 8-10 बूँद स्वरस को कान में डालने से कीड़े मरते हैं और कान की पीड़ा में शीघ्र आराम मिलता है।

निद्रानाश में भांग की दवाएं एवं सेवन विधि:

निद्रानाश में भांग के सेवन से नींद बहुत अच्छी आती हैं। जिन दशाओ में अफीम के सेवन से नींद नहीं होती, उन दशाओ में भांग का सेवन बहुत अच्छा हैं, क्योंकि भांग के प्रयोग से कोष्टबद्धता और मस्तक पीड़ा नष्ट हो जाती है।

सिर की रुसी में भांग की दवाएं एवं सेवन विधि:

सिर की रुसी में भांग के पत्तों का स्वरस सिर पर लेप करने से सिर की मुसी (रूसी) नष्ट हो जाती है और सिर के कीड़े मर जाते है।

दीपन में भांग की दवाएं एवं सेवन विधि:

दीपन में काली मिर्च और भांग के 500 मिलीग्राम चूर्ण को मधु के साथ सुबह-शाम चाटने से भूख बढ़ती हैं।

ट्यूमर में भांग की दवाएं एवं सेवन विधि:

स्नायु पीड़ा (ट्यूमर) में पित्त की सूजन और एक प्रकार की शोथ जो मुँह पर होती है और आसपास फैलती जाती है। उस पर भांग के पंचाग को पानी में पीसकर लेप करने से सूजन कम हो जाती है।

जख्म में भांग की दवाएं एवं सेवन विधि:

जख्म में भांग के पत्तों के चूर्ण को घाव और जख्म पर बुरक़ाने से जख्म शीघ्र भर जाते है।

भांग का परिचय

पश्चिम बंगाल एवं बिहार में प्रचुरता से पाये जाते है। भांग के नर पौधों के पत्रों को सुखाकर भांग तथा मादा पौधों की रालीय पुष्प मंजरियों को सुखाकर गांजा तैयार किया जाता है तथा भांग की शाखाओं और पत्तों पर जमे राल सदृश पदार्थ को चरस कहते हैं।

भांग पेड़ के बाह्य-स्वरूप

भांग के वर्षायु, गंधयुक्त, रोमश क्षुप 3-8 फुट ऊँचे होते हैं। पत्र एकांतर क्रम से व्यवस्थित होते है, ऊपर की पत्तियां 1-3 खण्डों तथा निचली पत्तियाँ 3-8 खण्डों से युक्त होती है। निचली पत्तियों में पत्रवृन्त लम्बे होते है, पुष्प छोटे हरितवर्ण, कोणोदभूत तथा एकलिंगी होते हैं। फल छोटे दानेदार होते हैं जिनके भीतर एक-एक चपटा बीज होता हैं, पुष्प और फल शरद ऋतु में लगते हैं।

भांग पौधे के रासायनिक संघटन

भांग में भूरे रंग की एक मृदु राल, जिसे कैनबिनोल कहते हैं, पायी जाती हैं। राल में लाल रंग का एक गाढ़ा चिपचिपा तेल पाया जाता है। हवा में खुला रखने पर यह रालीय हो जाता है। इसके अतिरिक्त भारतीय भांग में कुछ गोंदीय पदार्थ शर्करा, उड़नशील तेल तथा कैल्शियम फास्फेट आदि तत्व भी पाये जाते हैं।

भांग वृक्ष के औषधीय गुण-धर्म

कफ नाशक, कड़वी ग्राही, पाचक, हल्की, तीक्ष्ण, गर्म पित्त कारक और मदकारिणी तथा अग्नि वर्द्धक हैं। इसके बीज ग्राही और वमन तथा दस्तों को रोकने वाले हैं।

भांग के नुकसान

गांजा और भांग का मात्रा से अधिक सेवन, शरीर को दुर्बल, पुरुष को नपुंसक, चरित्रिन, विचारहीन बनाता है। अतः इसका प्रयोग काम उत्तेजना के लिए या नशे के लिए नहीं करना चाहिए।

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