अनार के फायदे, गुण, नुकसान एवं औषधीय प्रयोग

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अनार के औषधीय गुण

अनार की दवाएं:- बुखार, खांसी, सिरदर्द, बवासीर, योनि की खुजली, कैंसर, मुहांसे, गर्भपात, स्तन की गांठ, गंजापन, दांत, नकसीर, नेत्र रोग, कर्ण, बहरापन, श्वांस, हैजा, उन्माद (मिर्गी), हृदय विकार, कंठविकार, दस्त, सूखा रोग, मुँह के छले, पीलिया, उल्टी, मूत्राघात, नाखून पीड़ा आदि बिमारियों के इलाज में अनार के औषधीय चिकित्सा प्रयोग निम्मलिखित प्रकार से किये जाते है:-अनार के फायदे और नुकसान एवं सेवन विधि

Table of Contents

अनार में पाये जाने वाले पोषक तत्व

पोषक तत्व                         मात्रा
आयरन                       –      4%
थायमिन                     –      5.5%
विटामिन A, C, E, K  –      0%, 17%, 4%, 14%0

पोटेशियम                   –       5%
फास्फोरस                   –       5%
कैल्शियम                   –       1%
प्रोटीन                         –       3%
डाइट्रो फाइबर              –       11%
टोटल फैट                    –       6%
कार्बोहाइड्रेट                 –       14%
ऐल्लैर्जिक एसिड          –        3%
एनर्जी                          –        4%

अनार में विटामिन A, विटामिन C, विटामिन K, फोलिक एसिड आयरन, पोटेशियम, फास्फोरस, मैग्नेशियम, और विटामिन बी काम्प्लेक्स भरपूर मात्रा में होते है। अनार में प्यूनिकेलेजिन नामक एंटीओक्सिडेंट तत्व पाया जाता है जो फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है। अतः हृदय रोग तथा कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की सम्भवना कम होती है।

बुखार में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

बुखार में अनार का एक फल रोजना प्रयोग करने से शरीर को शक्तिशाली तथा कमजोरी को दूर कर देता है, बुखार में लाभदायक होता है।

खांसी में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

खांसी में अनार के ताजे पत्रों के 1 किलो रस में मिश्री मिलाकर, काढ़ा बना लें, 20-20 ग्राम दिन में 2-3 बार चाटने से खांसी, नजला दूर होता है। खांसी में अनार का अर्क 2-2 चम्मच दिन में तीन-चार बार प्रयोग गुणकारी होता है।

सिरदर्द में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

सिरदर्द में अनार के छाया में सूखा कर आधा किलो पत्तों में आधा किलो सुखी धनिया मिलाकर महीन चूर्ण कर लें, इसमें 1 किलो गेंहू का आटा मिलाकर, 2 किलो गाय के घी में भून ले, ठंडा होने पर 4 किलो चीनी मिला लें। सुबह-शाम गर्म दूध के साथ 50 ग्राम तक मात्रा सेवन करने से सिर दर्द और सिर चकराना दूर होता है।

बवासीर में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

अर्श (बवासीर) अनार की जड़ के 100 ग्राम काढ़ा में 5 ग्राम सौंठ चूर्ण मिलाकर दिन में दो-तीन बार पीने से खुनी बवासीर में अत्यंत लाभ होता है। अनार के पत्तों का 5-10 मिलीग्राम स्वरससुबह-शाम पीने से बवासीर ठीक हो जाती है। अतः अनार बवासीर के लिये विशेष गुणकारी है

योनि की खुजली में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

योनि की खुजली में अनार के छिलके को कूट कर चूर्ण बनाकर पानी के साथ मिलाकर योनि के आस-पास लेप करने से योनि की खुजली दूर हो जाता है

कैंसर में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

कैंसर में अनार का जूस फायदेमंद है। अनार में फ्लेवोनॉइड्स नाम का एंटीऑक्सीडेंट होता है। फ्लेवोनॉइड्स कैंसर नाशक होता है तथा कैंसर से लड़ने में मदद मिलती है।

मुहांसे में अनार के फायदे एवं सेवन विधि: 

कील, मुहांसे, धब्बे, झुर्रियां आदि में अनार गुणकारी होता है, अनार के स्वरस को चेहरे पर लेप करने से मुहांसे कील आदि में लाभ होता है। तथा चेहरे पर निखार आता है, चेहरा सुंदर दिखने लगता है।  मुहांसे, कील में नींबू के चमत्कारी गुण

गर्भपात में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

गर्भपात में अनार के ताजे 20 ग्राम पत्तों को 100 ग्राम जल में पीस-छानकर पिलाते रहने से तथा पत्तों को पीसकर पेट के निचले हिस्से पर लेप करते रहने से गर्भस्त्राव या गर्भपात का खतरा नहीं रहता है। यदि गर्भवती का हृदय कमजोर हो तो गर्भवती को मीठे अनार खाने चाहिए।

स्तनों की गांठ में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

स्तन की गांठ में अनार के पत्ते, छिलका, फूल, कच्चे फल और जड़ की छाल समभाग लेकर, मोटा पीसकर, दुगाना सिरका, तथा चार गुना गुलाब जल में भिगोये। चार दिन बाद इसमें सरसों का तेल मिला माध्यम आंच पर पकावें। तेल मात्र शेष रह जाने पर छानकर बोतले में भरकर रख लें। इस तेल को प्रतिदिन स्तनों पर मालिश करने से स्तन की मांस की शिथिलता में लाभ होता है।

गंजापन में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

गंजापन में अनार के पत्तों का स्वरस 100 ग्राम पत्तों का कल्क मिला, और आधा किलो सस्सों का तेल मिलाकर सिर पर लेप करने से सिर का गंजापन दूर होता है। तथा बालों का झड़ना रुकता है।

दांत की पीड़ा में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

दंतशूल में अनार तथा गुलाब के शुष्क फूल, दोनों को पीसकर मंजन करने से मसूड़ों से पानी अथवा खून आना बंद हो जाता है। केवल अनार की कलियों के चूर्ण का मंजन करने से मसूढ़ों से खून आना बंद हो जाता है। मीठे अनार के छाया शुष्क 8-10 पत्तों के चूर्ण का मंजन करने से दांतो का हिलना, मसूढ़ों से खून और पीव का आना या सूजन में फायदा गुणकारी होता है।

नकसीर में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

नकसीर में अनार की कली जो निकलती हुई हवा के झोके से नीचे गिर पड़ती है, इसका रस 1-2 बून्द नाक में टपकाने से या सुंघाने से नाक से खून बहना बंद हो जाता है। यह नकसीर की अति उत्तम औषधि है। अनार के पत्तों के काढ़ा को या 10 ग्राम रस पिलाने से तथा पीसकर मस्तक पर लेप करने से नक्सीर में लाभदायक होता है।

नेत्र रोग में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

नेत्र रोग में अनार के 5-6 पत्रों को पानी पीसकर दिन में 2 बार लेप करने तथा पत्तों को पानी में भिगोकर पोटली बनाकर आँखों के ऊपर फेरने से दुखती आँखों में लाभ होता है।

कर्ण रोग में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

कान के दर्द होने पर अनार के ताजे पत्तों का रस 100 ग्राम, गौमूत्र 400 ग्राम, और तिल तेल 100 ग्राम, तीनों को धीमी आंच पर पकावें, तेल मात्र शेष रह जाने पर छानकर रख लें। कान में सुबह-शाम नियमित सेवन से कान की पीड़ा कर्णनाद और वधिर्ता में लाभ होता है।

बहरापन में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

बहरापन में अनार के पत्तों के रस में बराबर मात्रा में बेल पत्र स्वरस और गाय का घी मिलाकर 20 ग्राम घी (गर्म), 250 ग्राम मिश्री मिले दूध के साथ प्रातः-सांय सेवन करने से बहरापन में लाभ होता है।

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श्वांस में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

श्वास में सूखा अनार दाना 100 ग्राम, सौंठ, काली मिर्च, पीपल, दालचीनी, तेजपात, इलायची 50-50 ग्राम एकत्र चूर्ण कर उसमें समान मात्रा में चीनी मिला लें। दिन में 2 बार शहद के साथ 2-3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से कास, श्वास, हृदय रोग आदि दूर होते है। अनार का छिलका 40 ग्राम, पीपल और जवाखार 6-6 ग्राम तथा गुड़ 80 ग्राम की चाशनी बनाकर उसमें सबका महीन चूर्ण मिलाकर 500-500 मिलीग्राम की गोली बनाकर 2-2 गोली दिन में 3 बार गर्म जल से सेवन करने से और भी उत्तम लाभ होता है।

हैजा में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

हैजा रोग में अनार के 6 ग्राम हरे पत्तों को 20 ग्राम जल के साथ पीस छानकर उसमें 20 ग्राम चीनी का काढ़ा मिलाकर 1-1 घंटा के बाद पिलाते रहने से हैजा में गुणकारी होता है। खट्टे अनार का 10-15 मिलीलीटर स्वरस को नियमित रूप से सेवन करने से लाभ होता है।

उन्माद (मिर्गी) में अनार की दवाएं एवं सेवन विधि:

उन्माद (मिर्गी) में अनार के पत्ते और गुलाब के ताजे पुष्प 10-10 ग्राम ताजे फूलों के सूखे फूल 5 ग्राम आधा किलो जल में पकाकर 250 ग्राम शेष क्वाथ रह जाने पर 10 ग्राम गाय का घी मिलाकर गर्म ही गर्म सुबह-शाम पिलाने से उन्माद और मिर्गी में गुणकारी होता है।

हृदय विकार में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

हृदय विकार में अनार के 10 ग्राम ताजे पत्तों को 100 ग्राम जल में पीस छानकर सुबह-शाम पिलाने से हृदय की धड़कन में लाभ होता है। अनार का शर्बत 20-25 मिलीलीटर का नित्य सेवन करने से धडकन में गुणकारी है।

कंठ विकार में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

कंठ विकार में अनार के ताजे पत्रों के 1 किलो रस में मिश्री मिलाकर, काढ़ा बना लें, 20-20 ग्राम दिन में 2-3 बार चाटने से आवाज का भारीपन, खांसी, नजला दूर होता है।

दस्त में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

अतिसार (दस्त) में अनार फल के छिलके के 2-3 ग्राम चूर्ण का सुबह-शाम ताजे जल के साथ प्रयोग करने से दस्त तथा खुनी दस्त में लाभ होता है। अनार फल के छिलके सहित कूट कर रस निचोड़ कर 30-50 ग्राम तक पिलावें। इसने चीनी मिलाकर पिलाने से पिट जन्य वमन, खुजली और थकान में लाभ होता है।

बच्चो का सूखा रोग में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

बच्चों का सूखा रोग में अनार की कली 20-25 ग्राम, आटे में बंद कर रस निकाल लें। इस रस को थोड़े दूध के साथ नियमित पिलाने से बच्चों का सूखा रोग में गुणकारी होता है।

मुख के छले में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

मुँह छाले में 10 ग्राम अनार के पत्तों को 400 ग्राम पानी में उबालकर चतुर्थाश शेष काढ़ा से कुल्ले करने से मुख के छले तथा मुँह से आने वाली दुर्गंध दूर होती है।

पीलिया में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

पाण्डु कामल (पीलिया) में 250 ग्राम अनार के रस में 750 ग्राम शक्कर मिलाकर चाशनी बना लें। इसका सेवन दिन में 3 या 4 बार करें। छाया शुष्क अनार पत्र का महीन चूर्ण 6 ग्राम को प्रातः गौ मूत्र, छाछ सुबह-शाम छाछ के पनीर के साथ सेवन करने से पीलिया ठीक हो जाती है।

वमन में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

वमन (उल्टी) में अनार के 10 मिलीलीटर गुनगुने रस 5 ग्राम में चीनी मिलाकर पिलाने से वमन उल्टी में लाभ होता है। अनार के पत्रों के 5-10 मिलीग्राम रस को दिन में दो बार पिलाने से, खुनी उल्टी, खुनी दस्त,सोमरोग, मूर्च्छा और लू में लाभदायक होता है।

हिचकी में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

हिक्का (हिचकी) में 20 ग्राम अनार के शर्बत में छोटी इलायची के बीज, सूखा पोदीना, बंशलोचन, जहरमोहरा खताई और अगुरु 1-1 ग्राम तथा पीपल 500 मिलीग्राम का चूर्ण मिला चटनी बना लें। आवश्कतानुसार थोड़ी-थोड़ी चटनी चाटने से हिचकी का शीघ्र पतन होती है।

मूत्रघात में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

मूत्राघात पेशाब की जलन में अनार के स्वरस में छोटी इलायची के बीज और सौंठ का चूर्ण मिलाकर नियमित सेवन से पेशाब की जलन ठीक होती है। अनार पत्र 10 ग्राम और हरा गोखरू 10 ग्राम दोनों को 150 ग्राम जल में पीस छानकर पिलाने से लाभ होता है।

नाख़ून पीड़ा में अनार के फायदे एवं सेवन विधि:

नाखून पीड़ा में अनार के फूलों के साथ धमासा और हरड़ समभाग पीसकर नाख़ून में भरने से, नाखून के भीतर की सूजन और पीड़ा में लाभ होता है।

अनार पौधे का परिचय

भारतवर्ष में अनार के वृक्ष सर्वत्र पाये जाते हैं। पश्चिमी हिमाचल प्रदेश और सुलेमान की पहाड़ियों पर तथा ईरान एवं अफगानिस्तान में यह स्वम जाट होता है। स्वाद भेद से अनार की तीन किस्में पाई जाती हैं। देशी अनार खट्टे-मीठे होते हैं। काबुल और कंधार के अनार मीठे होते हैं। काबुली अनारों में एक गुठली रहित, सरीला अत्यंत मीठा अनार होता है। यह फल सर्वोत्तम होता है। अनार का केवल फल ही नहीं, अपितु इस वृक्ष का सर्वाग ही औषधीय गुणों से भरपूर होता है। फल की अपेक्षा कली व छिल्के में अधिक गुण पाये जाते हैं।

अनार के बाह्य-स्वरूप

अनार का गुल्म वा वृक्ष 10-15 फुट ऊँचा होता है। काण्ड़त्वक, चिकनी व धूसरवर्ण की होता है। पत्र लगभग 2-3 इंच लम्बे और आधे से चौथाई इंच चौड़े तथा दोनों सिरों पर पतले, आयताकार या अभिलटवाकार होते हैं। पुष्प नांरगी, रक्तवर्ण, कभी-कभी पीले होते हैं जो प्रायः एकल या कभी-कभी गुच्छो में लगते हैं। फल गोलाकार लगभग दो इंच व्यास का, बाहाकोष से युक्त, फलत्वक चर्मवत काष्ठीय, फल का भीतरी भाग अनेक पर्दो से विभक्त जिसमें अनेक कोणीय बीज होते हैं जिनका आवरण मांसल, रक्तवर्ण, गुलाबी या श्वेत होता है। पुष्प अप्रैल -मई में तथा फल जुलाई -सितंबर में आते हैं।

अनार के गुण- धर्म

त्रिदोषहर, तृप्तिकारक, पाचन, हल्का किंचित कसैला, मलावरोधक, स्निग्ध, मेध्य, बल्य, ग्राही, दीपन तथा तृष्णा, दाह, ज्वर, हृदय रोग, मुख दुर्गंध, कंठरोग और मुख टोगनाशक है। रुक्ष, रक्त पित्तकारक तथा वात कफ नाशक दीपन रुचिकारक, वात पित्तनाशक और पाचन में हल्का है। अनारदाना कच्चा सुखाया हुआ अनार रुचिकारक हृदय को प्रिय और वातानुलोमन है। कृमिनाशक मलरोधक रक्त अतिसार और कास नाशक है। पाचक पौष्टिक, क्षुधा वर्धक, पित्तकारक और वमन को रोकने वाला है। नासिका से रक्त स्त्राव को दूर करता है। अनार की जड़ कृमिहर हैं। फीता कृमियों को नष्ट करने की यह उपयुक्त औषधि है।

अनार खाने के नुकसान

अनार में कुछ ऐसे एंजाइम पाये जाते हैं जो लीवर में मौजूद एंजाइम के कार्यों को खण्डित करते हैं। आप पहले से लीवर से की दवा खा रहे हों तो डॉक्टर की सलाह लेकर ही अनार का सेवन करें।

अनार में शुगर की मात्रा अधिक होती है। इसलिए यदि आप डायबिटीज के मरीज हैं तो अनार खाने का सेवन मत करें।

अनार में कैलोरी की मात्रा भी पर्याप्त होती है। अनार के दाने खाने या जूस पीने से आपका वजन भी तेजी से बढ़ सकता है।

अनार के दाने अधिक मात्रा में सेवन करने से जी मिचलाना, पेट में दर्द और उल्टी, डायरिया भी हो सकता है। अधिक अनार खाने से मुंह में सूजन और दर्द और श्वसन में भी तकलीफ हो सकती है।

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